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Tomato Price Hike: महंगाई से लड़ाई में क्या मोदी की राह का रोड़ा बनेगा टमाटर? लगातार बढ़ती कीमतें बनीं चिंता का सबब

Thu, 02 Jun 2022 01:42 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीपक चतुर्वेदी Updated Thu, 02 Jun 2022 01:42 PM IST
सार

Tomato Price Hikes In India Latest Update: देश में टमाटर की लगातार बढ़ती कीमतें सरकार की महंगाई से लड़ाई में बाधा बनती नजर आ रही हैं। खाद्य मंत्रालय द्वारा पेश आंकड़े देखें तो भारत में टमाटर का औसत खुदरा मूल्य एक महीने पहले 70 फीसदी और एक साल पहले से 168 फीसदी बढ़कर मंगलवार तक 53.75 रुपये (69 सेंट) प्रति किलो हो गया है।

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Tomatoes price hike in india are the next big risk to PM Modi fight against inflation
टमाटर की बढ़ती कीमतों से बढ़ सकती है सरकार की चिंता। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देश में महंगाई आसमान छू रही है। जहां एक ओर खुदरा महंगाई आठ साल के शिखर पर पहुंच गई है, जबकि थोक महंगाई सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए नए शिखर पर पहुंच चुकी है। इसे काबू में करने के लिए पीएम मोदी लगातार कदम उठा रहे हैं, लेकिन उनकी इस राह में टमाटर बड़ा रोड़ा बन सकता है। टमाटर के लगातार बढ़ते भाव अब सरकार के लिए चिंता का सबब बनते जा रहे हैं। 

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सरकार गिराने में सब्जियों की भूमिका
गौरतलब है कि प्याज समेत अन्य सब्जियों का भारत की राजनीति में उथल-पुथल लाने कई बार अहम योगदान रहा है। सब्जियों का देश में सरकारों को गिराने का एक असामान्य इतिहास है और भारत में टमाटर की कीमतें जिस हिसाब से बढ़ रही हैं, उसने राजनेताओं को परेशानी में डाल दिया है। बता दें कि टमाटर, आलू और प्याज ऐसी सब्जियां हैं जो कि हर रोज रसोई में इस्तेमाल होती हैं और इनकी कीमतों में बढ़ोतरी सीधे रसोई के माध्यम से आम आदमी को प्रभावित करती हैं। खाद्य मंत्रालय द्वारा पेश किए गए आंकड़ों को देखें तो भारत में टमाटर का औसत खुदरा मूल्य एक महीने पहले 70 फीसदी और एक साल पहले की तुलना में 168 फीसदी तक बढ़कर मंगलवार तक 53.75 रुपये (69 सेंट) प्रति किलोग्राम पर पहुंच गईं।
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एक महीने में इतना आया अंतर 
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में टमाटर की कीमतें हालांकि, काबू में नजर आ रही हैं और खुदरा बाजार ज्यादा नहीं बढ़ी हैं। एक महीने की अवधि में दिल्ली के खुदरा बाजार में टमाटर 30 रुपये किलो से बढ़कर 60 रुपये किलो तक पहुंचा है। वहीं एक महीने में मुंबई टमाटर का दाम 36 रुपये किलो से 62 रुपये किलो, कोलकाता 25 रुपये किलो से बढ़कर 77 रुपये किलो हो गया है। 
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महंगाई ने बिगाड़ा घरेलू बजट
भारत में खाना पकाने के तेल से लेकर गेहूं के आटे तक हर चीज की कीमतें चढ़ गई हैं, जिससे अप्रैल में मुद्रास्फीति आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई और घरेलू बजट बुरी तरह बिगड़ गया है। हालांकि, सरकार ने आनन-फानन में बड़ा कदम उठाते हुए गेहूं और चीनी के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया। वहीं अब एक रिपोर्ट में ऐसी संभावना जताई गई है कि नींबू-प्याज के बाद अब टमाटर की कीमतों में लगी आग कहीं सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी न कर दे।  

उत्पादन में कमी का कीमतों पर असर
रिपोर्ट में कहा गया कि टमाटर समेत खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों का भी राजनीतिक प्रभाव हो सकता है। इसमें कहा गया कि पीएम मोदी के 2018 के अभियान के दौरान 'TOP' का अर्थ टमाटर, प्याज और आलू समझाते हुए कहा था कि किसान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। मुंबई के एक सब्जी विक्रेता 36 वर्षीय प्रेम बैस ने कहा कि वर्तमान में टमाटर की कमी है। पुरानी फसल से आपूर्ति कम हो रही है और एक नई फसल लगभग तीन महीने में ही आ जाएगी। यही कारण है कि अब टमाटर 80 रुपये प्रति किलोग्राम पर टमाटर बेच रहा है।

फिलहाल राहत की उम्मीद नहीं
बीते दिनों टमाटर के दाम बढ़ने के संबंध में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि देश के कई राज्यों में टमाटर के दाम 120 रुपये प्रति किलोग्राम के पर पहुंच गए हैं। इस बारे में बताते हुए वेजिटेबल ग्रोअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेजिडेंट श्रीराम गढवे ने कहा था कि टमाटर की कीमतों में हाल फिलहाल कमी आने की भी उम्मीद कम ही है। इसके दाम जुलाई में कम होने की संभापना बन रही है, जब नई फसल आएगी। उन्होंने कहा था कि मौसम के कारण फसल बर्बाद हुई है और सप्लाई पर असर पड़ा है। इसके चलते देश में टमाटर की कीमत चिंता का सबब बन गई है। 


अप्रैल में खाद्य महंगाई 8.83 फीसदी पर 
टमाटर एक आम सब्जी है, जो कि हर रोज आम आदमी की रसोई में इस्तेमाल होती है। इसके दाम में बेतहाशा वृद्धि केंद्र सरकार के लिए भी परेशानी की वजह है, जो कि लगातार बढ़ती खाद्य महंगाई को काबू में करने के लिए प्रयास कर रही है। यहां बता दें कि अप्रैल में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 17 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचते हुए 8.83 फीसदी हो गई है। ऐसे में कहना गलत न होगा कि टमाटर के लाल रंग से आम जनता ही नहीं, बल्कि सरकार के लिए भी समस्या खड़ी कर दी है। 

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