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DAP: घरेलू मांग पूरा करने के लिए भारत ने अप्रैल-जून तिमाही में किया करीब 10 लाख टन डीएपी का आयात, आंकड़े जारी

Tue, 22 Jul 2025 05:47 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Tue, 22 Jul 2025 05:47 PM IST
सार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार घरेलू मांग को पूरा करने के लिए अप्रैल-जून तिमाही के दौरान 9.74 लाख टन डीएपी आयात किया गया। 2025 खरीफ सीजन के दौरान रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी अधिक है। इसका कारण अधिक बुवाई कवरेज और अच्छे मानसून की स्थिति है।

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To meet domestic demand, India imported about 1 million tonnes of DAP in the April-June quarter, data released
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल - फोटो : डीडी न्यूज

विस्तार

भारत ने घरेलू मांग को पूरा करने के लिए अप्रैल-जून तिमाही के दौरान 9.74 लाख टन डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) का आयात किया है। सरकार ने मंगलावर को यह जानकारी दी। 

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राज्यसभा में रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने चालू वर्ष के लिए डीएपी आयात के आंकड़े साझा किए। आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अप्रैल में 2.89 लाख टन, मई में 2.36 लाख टन और जून में 4.49 लाख टन डीएपी का आयात किया गया।
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बीते वर्षों में प्रमुख उर्वरक डीएपी का आयात 

  • वित्त वर्ष 2024-25 में 45.69 लाख टन
  • वित्त वर्ष 2023-24 में 55.67 लाख टन
  • वित्त वर्ष 2022-23 में 65.83 लाख टन 
  • वित्त वर्ष 2021-22 में 54.62 लाख टन 
  • वित्त वर्ष 2020-21 में 48.82 लाख टन 

वहीं यूरिया का आयात 2024-25 में 56.47 लाख टन, 2023-24 में 70.42 लाख टन, 2022-23 के दौरान 75.80 लाख टन, 2021-22 में 91.36 लाख टन और 2020-2 में 98.28 लाख टन रहा।


अधिक बुवाई और अच्छे मानसून से उर्वरक की जरूरत बढ़ी
पटेल ने कहा कि सरकार खरीफ 2025 की जरूरतों को पूरा करने के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है। 2025 खरीफ सीजन के दौरान रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी अधिक है। इसका कारण अधिक बुवाई कवरेज और अच्छे मानसून की स्थिति है।


केंद्र की एनबीएस नीति 
केंद्र ने फॉस्फेटिक और पोटासिक (पीएंडके) उर्वरकों के लिए अप्रैल 2010 से, पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) नीति लागू की है। इसके तहत अधिसूचित पीएंडके उर्वरकों पर उनकी पोषकता के आधार पर वार्षिक/अर्धवार्षिक आधार पर एक निश्चित राशि की सब्सिडी प्रदान की जाती है। P&K उर्वरक खुले सामान्य लाइसेंस (OGL) के अंतर्गत आते हैं और कंपनियां अपनी व्यावसायिक गतिशीलता के अनुसार इन उर्वरकों का आयात करने के लिए स्वतंत्र हैं।

डीएपी उत्पादक देशों के साथ दीर्घकालिक व्यवस्था
पटेल ने कहा कि उर्वरकों की मांग और उत्पादन के बीच के अंतर को आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक कारकों के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के प्रभाव को कम करने के लिए, उर्वरक कंपनियों ने निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डीएपी उत्पादक देशों के साथ दीर्घकालिक व्यवस्था की है।
 

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