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Research: अर्थव्यवस्था में खपत बढ़ाने के लिए उच्च महंगाई को नीचे लाना जरूरी,तभी हाथ में आएगा पैसा
Mon, 08 Jan 2024 07:10 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Mon, 08 Jan 2024 07:10 AM IST
सार
पंत ने कहा, महंगाई में एक फीसदी अंक की कमी से जीडीपी में 0.64 फीसदी की वृद्धि होगी या पीएफसीई (निजी अंतिम उपभोग खर्च) में 1.12 फीसदी अंक की वृदि्ध होगी। अगर महंगाई को एक फीसदी तक कम किया जा सकता है तो यह जीत की स्थिति होगी।
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भारतीय अर्थव्यवस्था (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
अर्थव्यवस्था खपत में कम वृद्धि की चुनौती का सामना कर रही है। इसकी प्रमुख वजह है उच्च महंगाई का निम्न आय वर्ग के लोगों को प्रभावित करना। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा, देश की अर्थव्यवस्था अब सामान्य से कम मानसून और उच्च वैश्विक तेल कीमतों के दोहरे झटके से निपटने की जुझारू क्षमता रखती है। लेकिन, खपत बढ़ाने के लिए महंगाई को नीचे लाना एक बड़ी चुनौती है। महंगाई घटने पर ही लोगों के हाथ में खर्च के लिए अधिक पैसा आएगा।
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पंत ने कहा, महंगाई में एक फीसदी अंक की कमी से जीडीपी में 0.64 फीसदी की वृद्धि होगी या पीएफसीई (निजी अंतिम उपभोग खर्च) में 1.12 फीसदी अंक की वृदि्ध होगी। अगर महंगाई को एक फीसदी तक कम किया जा सकता है तो यह जीत की स्थिति होगी। पीएफसीई व्यक्तियों की ओर से व्यक्तिगत उपभोग के लिए वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च को दर्शाता है।
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ऊंचीं रहेंगी दरें
पंत ने कहा, आर्थिक वृद्धि सरकारी खर्च से आगे बढ़ती है। खर्च के लगातार ऊंचे स्तर पर रहने से राजकोषीय घाटे और कर्ज के लिए जोखिम पैदा होता है। इससे ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी।
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