सब्जियों की कीमत, मोबाइल टैरिफ बढ़ने की वजह से RBI ने सस्ता नहीं किया कर्ज
सब्जियों के दाम चढ़ने और दूरसंचार कंपनियों के टैरिफ बढ़ाने से रिजर्व बैंक को आने वाले समय में खुदरा महंगाई बढ़ने की चिंता है। इसके साथ ही आरबीआई ने बृहस्पतिवार को चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के लिए खुदरा महंगाई अनुमान बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया, जो पहले 3.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।
मौद्रिक नीति समिति की इस साल पांचवीं बैठक के बाद गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि खुदरा महंगाई पर कई कारकों का असर होता है। प्याज-टमाटर सहित अन्य सब्जियों व दूध-दाल जैसे खाद्य पदार्थों के दाम चढ़ने और खरीफ फसल की आवक में देरी से अक्तूबर में खुदरा महंगाई बढ़ी है। लिहाजा 2019-20 की दूसरी छमाही (अक्तूबर-मार्च) में अनुमानित खुदरा महंगाई बढ़कर 5.1-4.7 फीसदी के बीच रह सकती है।
वहीं, दूरसंचार कंपनियों के टैरिफ बढ़ाने का असर बुनियादी क्षेत्र की महंगाई पर दिखेगा, जो अभी 4 फीसदी से नीचे है। हालांकि, सरकार सब्जियों की कीमतें थामने के लिए लगातार आयात कर रही है और उम्मीद है कि फरवरी की शुरुआत में इस पर काबू पा लिया जाएगा।
गवर्नर ने कहा कि इसे देखते हुए अगले वित्त वर्ष 2020-21 की पहली छमाही में खुदरा महंगाई 4-3.8 फीसदी पर आ सकती है। गौरतलब है कि अक्तूबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.6 फीसदी हो गई थी। इस दौरान खाद्य महंगाई दर 39 महीने के उच्चतम स्तर 6.9 फीसदी पर पहुंच गई थी।
ग्राहकों तक पहुंचा लाभ, एनबीएफसी को मिल रहा कर्ज
आरबीआई ने नीतिगत दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचने की गति पर संतुष्टि जताई। कहा, दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने को लेकर आरबीआई चिंतित था, लेकिन अधिकतर बैंकों की ब्याज दरें बाहरी बेंचमार्क से जुड़ने के बाद काफी सुधार आया है। इससे खुदरा कर्ज 0.44 फीसदी तक सस्ता हो गया है। गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि एनबीएफसी की हालत में भी सुधार आ रहा है और बैंकों की ओर से उन्हें कर्ज भी दिया जा रहा है। आरबीआई नहीं चाहता कि कोई बड़ी एनबीएफसी बंद हो। इसके लिए हम शीर्ष-50 एनबीएफसी पर लगातार नजर रखे हुए हैं।
सरकार के साथ तालमेल बेहतर, डिजिटल करेंसी को अनुमति नहीं
गवर्नर ने कहा कि सरकार के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूकने को लेकर आरबीआई बिलकुल चिंतित नहीं है और राजकोषीय स्थिति को देखते हुए ही मौद्रिक नीतियां तय की जा रही हैं। इसे लेकर सरकार के साथ रिजर्व का तालमेल काफी बेहतर है। उन्होंने कहा कि अक्तूबर में राजकोषीय घाटा बजट में तय लक्ष्य का 102 फीसदी पहुंच गया है, लेकिन तीसरी और चौथी तिमाही में राजस्व बढ़ने पर यह नीचे आ जाएगा। डिजिटल करेंसी पर प्रतिबंध को लेकर दास ने कहा कि किसी भी निजी डिजिटल करेंसी को अनुमति नहीं दी जाएगी और यह कहना बहुत जल्दबाजी होगा कि आरबीआई अपनी डिजिटल मुद्रा लाएगा।
सहकारी बैंकों को रखना होगा 500 करोड़ का रिजर्व
भविष्य में पीएमसी बैंक जैसे घोटाले से बचने के लिए रिजर्व बैंक ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए नियम सख्त कर दिए हैं। अब सभी सहकारी बैंकों को केंद्रीय भंडारण कर्ज सूचना (सीआरआईएलसी) के तहत 500 करोड़ या ज्यादा की संपत्ति का आधार रखना जरूरी होगा। अभी तक इसके दायरे में वाणिज्यिक बैंक, वित्तीय संस्थान और कुछ एनबीएफसी आती हैं। दास ने कहा कि इस बाबत पूरे निर्देश दिसंबर आखिर तक जारी कर दिए जाएंगे। इसका असर देशभर के 1500 से ज्यादा शहरी सहकारी बैंकों पर होगा। आरबीआई ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए समान समूहों यानी पी2पी के बीच कर्ज की सीमा पांच गुना बढ़ाकर 50 लाख कर दिया है। इसका लाभ छोटे कारोबारियों को मिलेगा।