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GST Reforms: सरकार को होगा 3700 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान, जानें एसबीआई रिसर्च ने नए बदलावों पर क्या कहा

Fri, 05 Sep 2025 01:13 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 05 Sep 2025 01:13 PM IST
सार

जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में मौजूदा चार स्तरीय कर ढांचे को दो स्तरीय ढांचे में बदल दिया गया है। इसमें 18 प्रतिशत और पांच प्रतिशत की मानक दर और कुछ चुनिंदा वस्तुओं और सेवाओं पर 40 प्रतिशत की की विशेष दर शामिल है। नए बदलावों से सरकार को करीब 3700 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। आइए जानते हैं नए बदलावों पर एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा है?

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The minimal revenue loss is estimated at Rs 3700 crore after gst reforms: SBI report
जीएसटी की दरों में बदलाव। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

जीएसटी की दरों में कमी के बाद सरकार को इससे मिलने वाले राजस्व में कम से कम  3,700 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपनी हालिया शोध रिपोर्ट में यह बात कही है। रिपोर्ट में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और महंगाई कम होने के बारे में भी टिप्पणी की गई है। 

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सरकार ने अपने अनुमानों में 48000 करोड़ रुपये कम राजस्व आने की कही है बात

सरकार के अनुमानों के मुताबिक जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने से सालाना आधार पर सरकार के खजाने में करीब 48,000 करोड़ रुपये कम आएंगे। रिपोर्ट के अनुसार, विकास और उपभोग में वृद्धि को देखते हुए, न्यूनतम राजस्व हानि 3,700 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। ऐसे में राजकोषीय घाटे पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में मौजूदा चार स्तरीय ढांचे को दो स्तरीय ढांचे में बदल दिया गया है। इसमें 18 प्रतिशत और पांच प्रतिशत की मानक दर और कुछ चुनिंदा वस्तुओं और सेवाओं पर 40 प्रतिशत की की विशेष दर शामिल है।

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जीएसटी सुधारों का बैंकिंग क्षेत्र पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव

रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी दर को युक्तिसंगत बनाने से लागत दक्षता में सार्थक सुधार होगा। इससे बैंकिंग क्षेत्र पर काफी हद तक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी दर को युक्तिसंगत बनाने से जीएसटी का औसत भार 2017 में लागू होने के समय के 14.4 प्रतिशत से घटकर 9.5 प्रतिशत हो गई है। जब जीएसटी लागू किया गया था, तब चार दरें थीं - पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत।



रिपोर्ट में कहा गया है कि आवश्यक वस्तुओं (लगभग 295) पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत या शून्य हो गई है। ऐसा होने से  चालू वित्त वर्ष में इस श्रेणी में खुदरा महंगाई भी 25 आधार अंकों से 30 आधार अंकों तक घट सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, खुदरा महंगाई दर 2026-27 तक 65 आधार अंकों से 75 आधार अंकों के बीच सीमित रह सकती है।


 

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