ग्रीन हाइड्रोजन: भारत चूक सकता है 2030 तक के लिए निर्धारित उत्पादन का लक्ष्य, जानिए क्या बोले मंत्री-अधिकारी
ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन से जुड़ी नई प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करने के लिए 100 करोड़ रुपये की पायलट परियोजनाओं के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। वहीं दूसरी ओर मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि भारत का 50 लाख मीट्रिक टन (एमएमटी) वार्षिक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य अब 2030 के बजाय 2032 तक खिसक सकता है। आइए विस्तार से जानें।
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नव व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन से जुड़ी नई प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करने के लिए 100 करोड़ रुपये की पायलट परियोजनाओं के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। इन परियोजनाओं में विशेष रूप से बायोमास से ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन जैसी उन्नत तकनीकों पर जोर दिया जाएगा। मंत्री जोशी ने यह घोषणा तीसरे अंतरराष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन सम्मेलन में की।
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ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ऐसे प्रस्ताव जरूरी
उन्होंने बताया कि इस पहल को लागू करने वाली एजेंसी बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) जल्द ही इच्छुक एजेंसियों और शोध संस्थानों से प्रस्ताव आमंत्रित करेगी। प्रह्लाद जोशी ने कहा कि मैं ऐसे नवीन प्रस्तावों की प्रतीक्षा कर रहा हूं, जो हमें हमारे ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ा सकें।
मिशन के तहत स्वदेशी तकनीकों के विकास पर हो रहा काम
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के तहत देश में नई और स्वदेशी तकनीकों के विकास पर तेजी से काम किया जा रहा है। सरकार का प्राथमिक फोकस ऐसे समाधानों पर है, जो बायोमास या अपशिष्ट पदार्थों का उपयोग कर ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन संभव बनाएं। उन्होंने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लोगो भी लॉन्च किया।
हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता के लक्ष्य 2032 तक खिसक सकता है
वहीं दूसरी ओर ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि भारत का 50 लाख मीट्रिक टन (एमएमटी) वार्षिक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य अब 2030 के बजाय 2032 तक खिसक सकता है। सारंगी ने कहा कि हम 2030 तक 5 एमएमटी का लक्ष्य हासिल करने में थोड़ा पीछे रह सकते हैं, लेकिन 2032 तक इसे पूरा कर लेंगे। उन्होंने बताया कि देश 2030 तक 3 एमएमटी वार्षिक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता हासिल करने में सक्षम रहेगा।
यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (2023) के तहत भारत ने 2030 तक 5 एमएमटी वार्षिक उत्पादन क्षमता का लक्ष्य तय किया था। सारंगी ने आगे कहा कि 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिए भारत को हर साल कम से कम 50 गीगावॉट नई क्षमता जोड़नी होगी। फिलहाल देश में 160 गीगावॉट क्षमता वाली परियोजनाएं विभिन्न चरणों में हैं, जबकि 40 गीगावॉट परियोजनाएं बिजली खरीद या बिक्री समझौते के इंतजार में हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय का फोकस इन लंबित परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने पर रहेगा, ताकि भारत अपने स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को समय पर पूरा कर सके।