प्रतिस्पर्धा और बकाये से भारी संकट से गुजर रहा दूरसंचार उद्योग, 1.74 लाख करोड़ का है बकाया
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दुनिया में सबसे सस्ती डाटा सेवाएं मुहैया कराने वाला भारत का दूरसंचार उद्योग भारी संकट से गुजर रहा है। इस क्षेत्र पर 1.74 लाख करोड़ का बकाया है। कीमतों को लेकर कंपनियों में चल रही प्रतिस्पर्धा से इस उद्योग को भारी नुकसान हुआ है। लगातार घाटे ने कई कंपनियों को इस क्षेत्र से बाहर कर दिया है। एक समय इस उद्योग में सात-आठ कंपनियां थीं, जो घटकर अब तीन हो गई हैं। चौथी सरकारी कंपनी है।
सुप्रीम कोर्ट के नॉन-कोर राजस्व को भी कंपनियों के कुल समेकित राजस्व (एजीआर) में शामिल करने के आदेश से मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली जियो एवं पुरानी दूरसंचार कंपनियों के बीच प्रतिद्वंद्विता और बढ़ गई है। हालांकि, टैरिफ बढ़ाने और नियामक के फ्लोर या न्यूनतम टैरिफ तय करने के लिए किए जा रहे हस्तक्षेप का दोनों पक्षों से समर्थन मिलने के संकेत दिख रहे हैं। सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने दूरसंचार क्षेत्र के लिए फ्लोर प्राइज की वकालत करते हुए कहा कि हमने वॉइस कॉल से वीडियो कॉल की सुविधा में बिना ज्यादा खर्च बढ़ाए विस्तार किया। मौजूदा दबाव से निपटने के लिए ट्राई मार्च, 2020 से पहले जल्द-से-जल्द डाटा के लिए फ्लोर प्राइज लाए।
वोडा-आइडिया ने दी चेतावनी
2016 में जियो के बाजार में आने के बाद डाटा काफी सस्ता हो गया। इससे पूरे दूरसंचार क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ। इसके बाद 24 अक्तूबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की याचिका पर एजीआर (कुल समेकित राजस्व) की नई परिभाषा के आधार पर बकाया भुगतान का आदेश दिया। इस पर वोडाफोन-आइडिया लिमिटेड ने चेतावनी देते हुए साफ कहा कि राहत नहीं मिलने पर कंपनी बंद हो जाएगी।
भारत में मोबाइल डाटा सबसे सस्ता
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाला दूरसंचार बाजार है। इसके अलावा, यह सबसे सस्ता डाटा उपलब्ध कराने वाला देश बनकर उभरा है। 2019 में अमेरिका में एक जीबी मोबाइल डाटा की कीमत 12.37 डॉलर (करीब 880.73 रुपये) है। ब्रिटेन में इसके लिए 6.66 डॉलर (करीब 474.18 रुपये) खर्च करना पड़ता है। वहीं, भारत में यह कीमत महज 0.26 डॉलर (18.51 रुपये) है।