वैष्णव ने कहा: बकाया ब्याज को इक्विटी में बदलने के बाद भी दूरसंचार कंपनियों पर जारी रहेगी की कर्ज की देनदारी
कर्ज में डूबीं वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (वीआईएल), टाटा टेलीसर्विसेज लिमिटेड (टीटीएसएल) और टाटा टेलीसर्विसेज महाराष्ट्र लिमिटेड (टीटीएमएल) ने अपनी-अपनी ब्याज देनदारियों के बकाया हिस्से को इक्विटी में बदलने का प्रस्ताव दिया है। ऐसा होने के बाद तीनों कंपनियों में सरकार भी हिस्सेदार हो जाएगी।
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सरकार के लिए अपने बकाया ब्याज को इक्विटी में बदलने का प्रस्ताव देने वाली दूरसंचार कंपनियों पर ऐसा करने के बाद भी मौजूदा और भविष्य के ऋण की देनदारी बरकरार रहेगी। यह बात दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कही।
'सरकार केवल निवेशक रहेगी, कंपनियां पेशेवर चलाएंगे'
समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में वैष्णव ने कहा, 'सरकार केवल एक निवेशक रहेगी। कंपनियों का संचालन पेशेवर करेंगे। सभी कर्ज देनदारियां कंपनी की जिम्मेदारी बनी रहेंगी। कंपनियों ने इसे लेकर प्रतिबद्धता व्यक्त की है। '
कर्ज में डूबी वोडाफोन आईडिया (वीआईएल), टाटा टेलीसर्विसेज और टाटा टेली सर्विसेज महाराष्ट्र ने सरकार को बकाया अपने ब्याज को इक्विटी में बदलने का प्रस्ताव दिया है। वीआईएल बोर्ड ने अपने 35.8 फीसदी शेयर और टाटा टेलीसर्विसेज महाराष्ट्र ने लगभग 9.5 फीसदी शेयर सरकार को देने का प्रस्ताव रखा है।
अगर यह योजना अमल में आ जाती है तो सरकार कंपनी में सबसे बड़ी शेयरधारक हो जाएगी। वीआईएल पर लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है।
'सही समय आने पर कंपनियों से बाहर हो जाएगी सरकार'
इस सवाल पर कि क्या आने वाली स्पेक्ट्रम बोली के लिए भुगतान की जिम्मेदारी सरकार के कंधों पर आ जाएगी, वैष्णव ने कहा कि रेडियोवेव्स के भुगतान के लिए पूरी जिम्मेदारी कंपनियों की रहेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र पर कोई भार नहीं होगा।
उन्होंने कहा, सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र के लिए सुधार पैकेज के हिस्से के रूप में कंपनियों पर बोझ कम करने के लिए, नौकरियां बचाने व और अवसर उत्पन्न करने और उद्योग में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है।
वैष्णव ने कहा, 'सही समय आने पर हम कंपनियों से बाहर हो जाएंगे। सरकार कंपनी के रोजमर्रा के कार्यों में कोई दखल नहीं देगी। उनका प्रबंधन पेशेवर करते रहेंगे।'
'अब पहले से बेहतर हालात में हैं बीएसएनएल-एमटीएनएल'
वहीं, बीएसएनएल की खराब स्थिति को लेकर वैष्णव ने कहा कि ऐसा पिछली सरकारों की ओर से लिए गए खराब फैसलों की वजह से हुआ है और अब यह बेहतर स्थिति में है। अब इन पर 59,000 करोड़ का कर्ज है। उन्होंने कहा, 'बीएसएनएल और एमटीएनएल अब बेहतर स्थिति में हैं। हमने उनके लिए 70 हजार करोड़ रुपये के पैकेज की पेशकश की है। हम उन्हें और सहयोग उपलब्ध कराने पर काम कर रहे हैं।'
वोडाफोन आइडिया को अपने हाथ में नहीं लेगा केंद्र : वैष्णव
दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया लिमिटेड की ओर से सरकार को देय बकाये पर ब्याज को इक्विटी में बदलने के फैसले के बाद सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस कंपनी का परिचालन अपने हाथों में नहीं लेगी। दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘अमर उजाला’ से कहा, उपभोक्ताओं के हित में दूरसंचार क्षेत्र को स्वस्थ और प्रतिस्पर्धी बनाए रखने की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए ऐसी कंपनियां पूर्व की तरह निजी कंपनी के रूप में पेशवर भूमिका निभाती रहेगी और सरकार महज निवेशक की भूमिका में होगी।
वैष्णव ने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र लंबे समय से मुकदमेबाजी के दौर से गुजर रहा है। सभी दूर संचार कंपनियों पर भारी मात्रा में देनदारियां हैं। ये स्थिति पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों के कारण उत्पन्न हुई। इस क्षेत्र को तनाव से बचाने और उपभोक्ताओं के हित में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए सितंबर 2021 में कुछ सुधारों को मंजूरी दी गई।
सरकार के पास शेयर बेचने का अधिकार : कंपनियों की संख्या घटने से उपभोक्ताओं को ही नुकसान होगा, इसलिए यह फैसला किया गया है। जरूरत पड़ने पर सरकार के पास उचित समय पर शेयर बेचने का अधिकार है। -अश्विनी वैष्णव, दूरसंचार मंत्री
प्रवर्तक ही देखते रहेंगे प्रबंधन और कामकाज : सीईओ
वोडाफोन आइडिया (वीआईएल) के प्रवर्तक ही उसका प्रबंधन देखेंगे। वीआईएल के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ रवींद्र टक्कर ने बुधवार को कहा, सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि वह कंपनी का परिचालन अपने हाथ में नहीं लेना चाहती है। प्रवर्तक कंपनी का प्रबंधन करने और उसे चलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सीईओ ने कहा, ब्याज बकाया को इक्विटी में बदलने के विकल्प से संबंधित दूरसंचार विभाग के पत्र में ऐसी कोई शर्त शामिल नहीं है, जिसमें निदेशक मंडल में सरकार को जगह देने की बात हो।
सरकारी सुधारों से निवेशकों में राहत
वीआईएल के सीईओ ने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र को लेकर सरकार ने जो सुधार किए, उससे निवेशकों की चिंताएं दूर हुईं। कंपनी की पूंजी जुटाने की योजना जारी रहने की उम्मीद है। प्रवर्तक भी शेयर होल्डिंग लिमिट को 21 फीसदी से घटाकर 13 फीसदी करने पर सहमत हैं। टक्कर ने कहा कि सरकार की ओर से किए गए सुधारात्मक उपाय निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत हैं।