टेलीकॉम कंपनियां भर रहीं जेब, ग्राहकों को लग रहा चूना
- ट्राई ने कंपनियों की इस लूट के खिलाफ कार्रवाई करने का
भरोसा दिलाया
- ट्राई की मांग दूरसंचार विभाग दे और अधिकार
भरोसा दिलाया
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क्या आप जानते हैं कि आपकी टेलीकॉम सर्विस प्रदाता कंपनी आपकी जेब पर डाका डाल रही है? जी हां, टेलीकॉम कंपनियों ने आपको चूना लगाने के लिए एक चोर दरवाजा तलाश लिया है।
इसके जरिए कंपनियां बात न होने पर भी आपसे पैसे वसूल रही हैं। दरअसल कंपनियां खास टेक्नोलॉजी आरएलटी (रेडियो-लिंक टेक्नोलॉजी) का इस्तेमाल कर ग्राहकों और सरकार को बेवकूफ बना रही हैं। इस टेक्नोलॉजी के जरिए कॉल ड्रॉप होने पर भी आपकी कॉल तब तक कनेक्ट दिखायी देती है, जब तक कि आप इसे खुद ही न काट दें। उल्लेखनीय है कि पहले नेटवर्क ना होने की सूरत में कॉल अपने आप कट जाती थीऔर मीटर वहीं बंद हो जाता था। लेकिन अब चूंकि कॉल कनेक्ट रहती है और मीटर चलता रहता है। इसलिए बात हो या न हो कॉल का चार्ज देना पड़ता है।
साथ ही बात ना होने की हालत में ग्राहक खुद फोन काटता है इसलिए ये कॉल ड्रॉप भी नहीं माना जाता। कंपनियां इस कवायद से कॉलड्रॉप को छुपा रही हैं और ट्राई को बता रही हैं कि कॉलड्रॉप में कमी आयी है। सीएनबीसी आवाज की खबर के बाद ट्राई ने कंपनियों की इस लूट के खिलाफ कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया है।
ट्राई की मांग दूरसंचार विभाग दे और अधिकार
गौरतलब है कि कॉलड्रॉप पर जुर्माने की योजना पर कोर्ट से रोक लग गयी थी। इसका फायदा उठाते कंपनियों ने कॉलडॉप की रोक के लिए व्यापक कदम नहीं उठाए इस नमूना देखने को मिला जब 3 से 6 मई के बीच ट्राई ने कॉलडॉप की जांच की तो आरकॉम के 2जी और वोडाफोन के 3जी को छोड़ सभी कंपनियां टेस्ट में फेल हो गयीं।
इसके बाद ट्राई ने ट्राई दूरसंचार विभाग को ट्राई कानून में संशोधन के लिए लिखने का मन बना लिया है, ताकि ट्राई को टेलीकॉम ऑपरेटर्स पर जुर्माना लगाने का अधिकार मिल सके। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि ट्राई को कॉल ड्रॉप के मामले में टेलीकॉम ऑपरेटर्स पर जुर्माना करने का अधिकार नहीं है।
इसके अलावा ट्राई ने कॉल संबंधी शिकायत के लिए ऐप लांच किया है। इससे उपभोक्ताओं को अपनी शिकायत दर्ज कराने में मदद मिलेगी और 0 निवारण में भी तेजी आएगी।