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तकनीक के डंडे से रुकेगी जीएसटी चोरी, नए सॉफ्टवेयर कर चोरों पर रखेंगे निगाह

Fri, 06 Jul 2018 05:10 AM IST
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 06 Jul 2018 05:10 AM IST
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Technology will stop GST tax evasionstolen

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में छोटे कारोबारियों को मिलने वाली सुविधा का इस्तेमाल कर नाम मात्र का कर चुकाने वाले बड़े कारोबारियों पर अब शिकंजा कसने वाला है। सरकार की योजना ऐसे कारोबारियों को तकनीक के डंडे से रास्ते पर लाने की है।

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जीएसटी नेटवर्क में कुछ नए तरीके के सॉफ्टवेयर पर काम चल रहा है, जो डाटा एनालिटिक्स के जरिये ऐसे लोगों पर नकेल कसेंगे। इसके अलावा, तकनीक से वैसे कारोबारी भी पकड़े जाएंगे जो फर्जीवाड़ा कर कम कर या शून्य कर अदा करते हैं। 
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केंद्रीय राजस्व सचिव हसमुख अढिया के मुताबिक, छोटे कारोबारियों के लिए शुरू की गई कंपोजिशन स्कीम में शामिल होकर उचित कर देने से बचने वाले बड़े कारोबारियों पर शिकंजा कसा जाएगा। उनका कहना है कि आज की तारीख में डाटा (आंकड़े) इज द न्यू डंडा।
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सालभर में कारोबारियों ने जीएसटी नेटवर्क पर इतने आंकड़े डाल दिए हैं कि अब उसी के सहारे वे पकड़े भी जाएंगे। इसमें अधिकारी नहीं, बल्कि सारा काम सॉफ्टवेयर करेगा। उनका मानना है कि अभी भी कुछ जगह लीकेज है, जिसे पकड़ने की कवायद शीघ्र ही शुरू होगी। 

एनालिटिक्स से आएंगे पकड़ में 
जीएसटी नेटवर्क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) प्रकाश कुमार का कहना है कि रिटर्न दाखिल करने वाले छोटे या बड़े कारोबारी बीते एक साल में काफी जानकारी अपलोड कर चुके हैं। वे जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-3बी तो भरते ही हैं, फॉर्म में प्रोडक्ट वैल्यू, इनपुट लागत, खरीद-बिक्री, वैल्यू एडिशन आदि की भी जानकारी दे रहे हैं। इन्हीं सब जानकारियों का इस्तेमाल कर डाटा एनालिटिक्स सॉफ्टवेयर कर चोरों को पकड़ेगा। यदि कोई कारोबारी इसमें पकड़ा गया, तो उन्हें अपने आप नोटिस सर्व हो जाएगा। यदि वह सही है, तो आकर बताये नहीं तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। 

कंपोजिशन स्कीम का हो रहा दुरुपयोग  

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केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधिकारी मानते हैं कि छोटे कारोबारियों की सुविधा के लिए लाई गई कंपोजिशन स्कीम का दुरुपयोग हो रहा है। इस समय देशभर में करीब 19 लाख डीलरों ने कंपोजिशन स्कीम का चयन कर रखा है, जबकि इनसे हर तिमाही महज 500-600 करोड़ रुपये का ही राजस्व आ रहा है।

उल्लेखनीय है कि साल में 1.5 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाले कारोबारी ही इसके तहत आते हैं। लेकिन कुछ मामलों में देखा गया कि व्यापारी साल में कारोबार तो काफी ज्यादा का कर रहे हैं, लेकिन दिखाते कम हैं।

इसलिए उन्हें महज एक फीसदी का ही जीएसटी चुकाना होता है। ऐसे मामलों में दूसरे कारोबारियों द्वारा दाखिल रिटर्न के आंकड़ों का भी विश्लेषण किया जाएगा, जिनके साथ ये कंपोजिशन डीलर व्यापार करते हैं। 

जीएसटी वसूलने वाले की जानकारी लीजिए ऐप पर

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कोई कारोबारी जीएसटी वसूल रहा है लेकिन वह इस कर की वसूली कर सकता है या नहीं, इसे जानना आसान हो गया है। भारतीय राजस्व सेवा के एक युवा अधिकारी ने जीएसटी वेरीफाई नाम का एक ऐप बनाया है, जिस पर कारोबारी का जीएसटी नंबर डाल कर उसके बारे में सारी जानकारी ली जा सकती है।

जीएसटी के हैदराबाद कमिश्नरेट में तैनात संयुक्त आयुक्त बी रघु किरण एवं उनकी टीम द्वारा विकसित इस ऐप को बीते एक जुलाई को ही लाइव किया गया है। किरण का कहना है कि इस पर जीएसटी नंबर डालने से पता चल जाएगा कि कारोबारी जीएसटी नेटवर्क में पंजीकृत है या नहीं। यदि पंजीकृत है तो वह कर वसूल सकता है या नहीं, सब जानकारी मिल जाएगी। 

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