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Tea Production: खराब मौसम के कारण चाय का उत्पादन घटा; बढ़ सकती हैं कीमतें, उद्योग ने सरकार से की ये मांग
Tue, 17 Sep 2024 02:34 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 17 Sep 2024 02:34 PM IST
सार
Tea Production: एसोसिएशन से जुड़े चाय बागानों से मिली रिपोर्ट्स से पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में अगस्त तक चाय उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की कमी का अनुमान है। असम के बागान पिछले वर्ष की तुलना में अगस्त 2024 तक लगभग 3 प्रतिशत पीछे रह सकते हैं।
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खराब मौसम के कारण चाय का उत्पादन प्रभावित
- फोटो : amarujala.com
विस्तार
भारतीय चाय संघ के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में देश में चाय उत्पादन में काफी गिरावट आई है। असम में चाय के उत्पादन में 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जुलाई तक पश्चिम बंगाल में चाय का उत्पादन 21 प्रतिशत कम हुआ है। एसोसिएशन ने इस गिरावट के लिए मई तक अपर्याप्त वर्षा और अत्यधिक गर्मी को जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद जून और जुलाई में अत्यधिक वर्षा हुई, जिससे चालू सीजन के दौरान फसल उत्पादन में बाधा आई।
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एसोसिएशन ने कहा, " उत्तर भारतीय चाय उद्योग का उत्पादन आंकड़ा मई तक लगातार अपर्याप्त वर्षा व अत्यधिक गर्मी और जून-जुलाई में अत्यधिक वर्षा के कारण एक अनिश्चित स्थिति में रहा।" एसोसिएशन के अनुसार, पश्चिम बंगाल और असम दोनों में चाय की झाड़ियों को कमजोर करने वाले गंभीर कीट और रोग संक्रमण से स्थिति और भी खराब हो गई है। एसोसिएशन ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इससे आने वाले महीनों में फसल को और नुकसान हो सकता है।
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एसोसिएशन से जुड़े चाय बागानों से मिली रिपोर्ट्स से पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में अगस्त तक चाय उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की कमी का अनुमान है। असम के बागान पिछले वर्ष की तुलना में अगस्त 2024 तक लगभग 3 प्रतिशत पीछे रह सकते हैं। परिचालन का समय से पहले बंद होना और 2024 में 160-170 मिलियन किलोग्राम चाय का अनुमानित नुकसान भी चिंता का कारण है।
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एसोसिएशन ने कहा कि उत्तर भारतीय चाय की कीमतों में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, लेकिन यह वृद्धि उत्पादन में कमी की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उत्तर बंगाल में 21 प्रतिशत फसल का नुकसान हुआ लेकिन केवल कीमत में केवल 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, जबकि असम में उत्पादन 11 प्रतिशत गिरा और कीमतों में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। एसोसिएशन ने कहा, "उत्पादन में गिरावट के कारण उत्तर भारत में में औसतन कीमतों में लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि कीमत में यह वृद्धि उत्पादन के नुकसान के अनुरूप नहीं है।"
चाय उद्योग को देरी से मिलने वाली सब्सिडी के अलावा मजदूरी व खाद्यान्न जैसे आवश्यक इनपुट की बढ़ती लागत से भी जूझना पड़ रहा है। इन बढ़ते वित्तीय दबावों के साथ, चाय उद्योग अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहा है। एसोसिएशन ने सरकारी सहायता के लिए अपनी मांगें तेज कर दी हैं। भारतीय चाय संघ के अध्यक्ष संदीप सिंघानिया ने कहा, "चाय उद्योग पश्चिम बंगाल सरकार के समक्ष वित्तीय प्रोत्साहनों के साथ उद्योग को सहयोग देने के लिए की गई अपील के जवाब का इंतजार कर रहा है। उद्योग जगत वित्तीय प्रोत्साहनों के लिए असम सरकार का आभारी है, लेकिन खाद्यान्नों के मामले में भी इसी तरह के पहल की जरूरत है। खुले बाजार में खाद्यान्नों की बढ़ती कीमतों के कारण उद्योग पर भारी बोझ पड़ रहा है।"