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महंगी पड़ेगी चाय की चुस्की, कोरोना और बाढ़ की वजह से कम हुआ उत्पादन
Thu, 20 Aug 2020 12:36 PM IST
डिंपल अलवधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Thu, 20 Aug 2020 12:36 PM IST
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चाय
- फोटो : pixabay
लॉकडाउन के दौरान भारत में चाय के उत्पादन में भारी कमी आई है। इससे संकेत मिलते हैं कि देश में चाय के दामों में तेजी आ सकती है। मार्च के दौरान चाय के उत्पादन में 41.4 फीसदी की भारी गिरावट आई है। अप्रैल में 53.8 फीसदी की भारी गिरावट आ गई। मई में उत्पादन में 28.3 फीसदी और जून में आठ फीसदी की गिरावट आई है। अनुमान के अनुसार, इस साल चाय का उत्पादन 37 फीसदी घट जाएगा, जिसके बाद यह 878 हजार टन रह सकता है।
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छह महीने में 26 फीसदी कम हुआ उत्पादन
जनवरी से जून के छह महीने में उत्पादन 26 फीसदी घटकर महज 348.2 हजार टन रह गया। लॉकडाउन के बाद जब स्थिति बेहतर होने की उम्मीद थी, तब असम में बाढ़ की समस्या आ गई। असम में मई, जून और जुलाई में भारी बारिश हुई, जिसके कारण चाय का उत्पादन प्रभावित हुआ। इससे आपूर्ति भी लगभग धड़ाम हो गई है। कई कंपनियों के पास तो प्रोसेसिंग ( पत्ती से दाना बनने की प्रक्रिया ) के लिए कच्चा माल तक नहीं है। कारोबारी बताते हैं कि मार्च में चाय की नई फसल आ जाती है। इससे कीमतों में गिरावट शुरू हो जाती है। जो अक्तूबर तक जारी रहती है। लेकिन इस बार मामला एकदम उलटा है। नई फसल आने के बावजूद कीमतों में बंपर उछाल है।
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बाढ़ से प्रभावित उत्पादन
ज्यादातर चाय का उत्पादन जुलाई महीने में होता है। जुलाई में असम में उच्च क्वालिटी चाय का उत्पादन होता है। भारत में कुल उत्पादन में करीब 50 फीसदी हिस्सा असम में ही होता है। लेकिन जुलाई में भारी बाढ़ से डिब्रूगढ़, जोरहट, गोलाघाट जिलों में बड़ी मात्रा में चाय के पौधे नष्ट हो गए। इसकी वजह से इस दौरान असम में सिर्फ 132.8 हजार टन चाय का उत्पादन हुआ।
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कितनी बढ़ी कीमत?
देश में औसतन चाय की कीमत 40 से 60 फीसदी बढ़ चुकी है। मई में हुए पहले ऑक्शन में गुवाहाटी में चायपत्ती की कीमत 52 फीसदी बढ़कर 217 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। उत्पादन प्रभावित होने से आने वाले महीनों में आम जनता पर इसका बोझ और बढ़ सकता है और चायपत्ती काफी महंगी हो सकती है।