पाकिस्तान में चाय भी हुई काली, बच्चों को नहीं मिल रहा दूध, दाम 200 रुपये के करीब
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पाकिस्तान में हालात दिनो-दिन बदतर होते जा रहे हैं। रुपये की गिरती कीमत के बीच मुल्क में विदेशी निवेश भी आधा रह गया है। रमजान के महीने में महंगाई इतनी बढ़ गई है कि लोगों को भूखे सोना पड़ रहा है। वहीं लोगों को काली चाय पीना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि खाने-पीने का सामान खरीदने के लिए लोगों को पास इतना पैसा नहीं बचा है। इस वजह से देश के कई इलाकों में भूखमरी के हालात हो गए हैं।
154 पर पाकिस्तानी रुपया
पाकिस्तानी रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 154 रुपये का हो गया है। इस हिसाब से देखा जाए तो इस महीने की शुरुआत से पाकिस्तानी रुपया लगातार गिर रहा है। इससे आयात होने वाली वस्तुएं लगातार महंगी होती जा रही है।
दूध के दाम 180 रुपये प्रति लीटर
अगर खाने-पीने की वस्तुओं की बात करें तो फिर दूध के दाम 180 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं। इससे जहां एक तरफ बच्चों को भी दूध नहीं मिल रहा है, वहीं चाय की चुस्की भी लोगों को मय्यसर नहीं हो पा रही है। सेब चार सौ रुपये प्रति किलो और मटन 1100 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रहा है। इससे लोगों की कमर टूट गई है। अभी रमजान में लोग इफ्तार और सहरी के बीच ही खाते हैं। ऐसे में लोगों को पूरे दिन भूखे रहने के बाद भी ढंग का खाना पीना भी नसीब नहीं हो पा रहा है।
इनके भी बढ़े दाम
मार्च के मुकाबले मई में प्याज 40 फीसदी, टमाटर 19 फीसदी और मूंग की दाल 13 फीसदी ज्यादा कीमत पर बिक रही है। गुड़, शक्कर, फल्लियां, मछली, मसाले, घी, चावल, आटा, तेल, चाय, गेंहू की कीमतें भी 10 फीसदी तक बढ़ गई हैं। ऑटो, सीमेंट और फार्मास्यूटिकल्स जैसे उद्योगों के कच्चे माल के आयात की कीमतें और बढ़ेंगी।
विदेशी निवेश हुआ आधा
मुल्क में विदेशी निवेश भी आधा रह गया है। पिछले 10 महीनों में केवल 1.36 अरब डॉलर का निवेश हुआ जो कि पिछले साल 2.489 अरब डॉलर था। इस निवेश के कम होने की वजह पाकिस्तान का दोस्त चीन है, जिसने अपनी तरफ से देश में किए जाने वाले निवेश में 72 फीसदी की कमी कर दी है। जुलाई-अप्रैल तक जहां चीन ने पिछले साल 1.731 अरब डॉलर का निवेश किया था, वहीं इस बार केवल 42.9 करोड़ डॉलर का निवेश किया है। ऐसा इसलिए क्योंकि चीन-पाक कॉरिडोर का काम लगभग पूरा हो गया है।
अमेरिका-यूके ने बंद किया निवेश
अमेरिका और यूके ने पिछले साल 7.6 करोड़ डॉलर व 15.6 करोड़ डॉलर का निवेश किया था। पर इस बार उन्होंने भी किनारा कर लिया है। इसके अलावा अन्य मुल्कों ने भी पाकिस्तान में निवेश करने से हाथ खींच लिए हैं। इसकी बड़ी वजह आतंकवाद को पनाह देना है, जिससे अब लोगों को जिंदगी को और भी दूभर कर दिया है।