{"_id":"694a83bcfb15e333440f704e","slug":"tata-motors-finance-settlement-pays-rs-32-lakh-to-settle-ncd-issue-with-market-regulator-sebi-2025-12-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Tata Motors Finance vs SEBI: 32 लाख रुपये देकर कंपनी ने सुलझाया मामला, जानें क्या थी एनसीडी से जुड़ी गड़बड़ी","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Tata Motors Finance vs SEBI: 32 लाख रुपये देकर कंपनी ने सुलझाया मामला, जानें क्या थी एनसीडी से जुड़ी गड़बड़ी
Tue, 23 Dec 2025 05:27 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 23 Dec 2025 05:27 PM IST
विज्ञापन
शेयर बाजार नियामक सेबी
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टाटा मोटर्स फाइनेंस लिमिटेड ने बाजार नियामक सेबी के साथ चल रहे एक पुराने मामले को निपटा लिया है। कंपनी ने नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स जारी करने में हुई कथित अनियमिताओं से जुड़े इस मामले को खत्म करने के लिए 32 लाख रुपये की सेटलमेंट राशि का भुगतान किया है। यह मामला कंपनी द्वारा नियमों के विपरीत जाकर डिबेंचर जारी करने और प्राइवेट प्लेसमेंट के नियमों के उल्लंघन से जुड़ा था।
विज्ञापन
क्या है पूरा मामला?
सेबी के आदेश के अनुसार, टाटा मोटर्स फाइनेंस ने इस मामले में 'सुओ-मोटो' (स्वतः संज्ञान लेते हुए) सेटलमेंट अर्जी दाखिल की थी। कंपनी ने प्रस्ताव रखा कि वह तथ्यों और कानून के निष्कर्षों को "न तो स्वीकार करती है और न ही नकारती है" के आधार पर मामले को सुलझाना चाहती है। सेबी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और संशोधित शर्तों के तहत मामले का का निपटारा कर दिया।
विज्ञापन
एनसीडी जारी करने में कहां हुई चूक?
यह विवाद नवंबर 2019 से जुलाई 2022 के बीच टाटा मोटर्स फाइनेंस द्वारा जारी किए गए टियर-II परपेचुअल नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के पांच इश्यू से जुड़ा है। कंपनी ने ये डिबेंचर 'प्राइवेट प्लेसमेंट' के आधार पर जारी किए थे।
विज्ञापन
सेबी की जांच में पाया गया कि आवंटन की तारीख से छह महीने के भीतर ये एनसीडी 200 से अधिक निवेशकों को बेचे गए। इसमें 460 करोड़ रुपये मूल्य के गैर-सूचीबद्ध इश्यू भी शामिल थे।
कंपनी अधिनियम, 2013 और सेबी के नियमों के अनुसार, यदि किसी प्रतिभूति (security) की पेशकश 200 से अधिक व्यक्तियों को की जाती है, तो उसे 'प्राइवेट प्लेसमेंट' नहीं बल्कि 'पब्लिक इश्यू' (सार्वजनिक निर्गम) माना जाता है।
सेबी ने पाया कि टाटा मोटर्स फाइनेंस की ओर से एनसीडी की इस खेप को जारी करना तकनीकी रूप से एक पब्लिक इश्यू था, और इसके लिए सार्वजनिक निर्गम से जुड़े कड़े नियमों का पालन नहीं किया गया था। ऐसे में यह यह सेबी के रेगुलेशन और नियमों का उल्लंघन था।
सेबी का आदेश और भविष्य की चेतावनी
टाटा मोटर्स फाइनेंस की ओर से 32 लाख रुपये की राशि जमा करने के बाद, सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह और संदीप प्रधान ने निपटान आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया, "आवेदक (टीएमएफएल) के खिलाफ उल्लंघनों के लिए शुरू की जा सकने वाली किसी भी कार्यवाही का निपटारा किया जाता है।" नियामक ने साफ किया कि इस सेटलमेंट के तहत आने वाले उल्लंघनों के लिए कंपनी के खिलाफ अब कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
हालांकि, सेबी ने चेताया है कि यदि निपटारे की कार्यवाही के दौरान कंपनी की ओर से दी गई कोई भी जानकारी भविष्य में गलत पाई जाती है, या यदि कंपनी शर्तों का उल्लंघन करती है, तो नियामक कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन