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खरीफ सीजन में बुआई: प्रमुख फसलों की बुआई का रकबा घटने से बढ़ रहे दाम, खाद्य तेलों की आपूर्ति बेहतर होने की आस

Tue, 08 Sep 2026 10:27 AM IST
द बोनस बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
बोनस डेस्क, नई दिल्ली। Published by: द बोनस Updated Tue, 08 Sep 2026 10:27 AM IST
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Kharif sowing Price rise as sowing area of major crops decrease supplies of edible oils expected to improve
खरीफ फसलों की बुआई सुस्त। - फोटो : amarujala.com

मानसून के अंतिम दौर में खरीफ बुआई का कुल आंकड़ा भले ही सामान्य स्तर के पास पहुंचता दिख रहा हो, लेकिन भीतर की तस्वीर चिंताजनक है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 4 सितंबर, 2026 तक खरीफ फसलों का कुल रकबा 1,086.31 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। यह पिछले साल की समान अवधि के 1,104.00 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 17.69 लाख हेक्टेयर यानी 1.60 फीसदी कम है।

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शुरुआती महीनों के मुकाबले रकबे का फासला जरूर घटा है, लेकिन सबसे चिंता यह है कि धान का रकबा पिछले साल से काफी पीछे छूट गया है। धान का रकबा 3.74 फीसदी घटकर 421.82 लाख हेक्टेयर रह गया है। 
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मोटे अनाजों में मिला-जुला रुख
ज्वार और बाजरा की बुवाई में मामूली सुधार हुआ है, लेकिन मक्के के रकबे में 3.18 फीसदी और रागी में 13.30 फीसदी की भारी गिरावट आई है। पोल्ट्री और स्टार्च इंडस्ट्री के लिए मक्के की कमी चिंता का कारण बन सकती है।
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अरहर और उड़द ने संभाला मोर्चा
दलहन का रकबा 1.60 फीसदी बढ़कर 117.13 लाख हेक्टेयर (पिछले साल 115.30 लाख हेक्टेयर) पर पहुंच गया है। उड़द की बुवाई 11.95 फीसदी और अरहर की 1.61 फीसदी बढ़ी है। हालांकि, मूंग के रकबे में 3.05% और अन्य दालों में 13.14% गिरावट रही।


खाद्य तेलों की आपूर्ति बेहतर होने की उम्मीद
कम बुआई के नतीजे अब मंडियों में दिखाई देने लगे हैं। धान, सोयाबीन, मूंगफली, मक्का और कपास के रकबे में कमी से उत्पादन कम होने के अनुमान मजबूत हो रहे हैं। वहीं, उड़द, अरहर और सूरजमुखी की बेहतर बुवाई से आने वाले महीनों में दालों और घरेलू खाद्य तेलों की आपूर्ति बेहतर होने की उम्मीद है, जिससे इन चुनिंदा जिंसों में बहुत बड़ी तेजी पर लगाम लग सकती है।

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