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टाटा समूह विवाद: सात ट्रस्टों ने दाखिल किए 84 कैविएट; नोएल-नेविल टाटा पर क्यों बढ़ा दबाव?

Thu, 08 Oct 2026 05:03 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई।
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 08 Oct 2026 05:03 AM IST
सार

टाटा ट्रस्ट के अंदर चल रहे विवाद के बीच सात ट्रस्टों ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के सामने 84 कैविएट दाखिल किए हैं। इनमें नोएल टाटा और नेविल टाटा को कैविएटर बनाया गया है। इस बीच, नोएल टाटा की नियुक्ति और फैसलों में उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आखिर टाटा ट्रस्ट में विवाद की वजह क्या है? पढ़िए रिपोर्ट

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Tata Group dispute: Seven trusts file 84 caveats amid growing concerns over Noel and Neville Tata
टाटा समूह विवाद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

टाटा ट्रस्ट के भीतर चल रहे विवाद के बीच सात ट्रस्टों ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष कुल 84 कैविएट दायर किए हैं। इनका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ट्रस्टों से जुड़े किसी मामले में चैरिटी कमिश्नर कोई आदेश देने से पहले संबंधित पक्षों की बात सुने।
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सूत्रों के मुताबिक, इन कैविएट में नोएल टाटा और नेविल टाटा को कैविएटर बनाया गया है।  टाटा ट्रस्ट के अंतर्गत आने वाले सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) में शासन और फैसले लेने के अधिकार को लेकर विवाद बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में कैविएट दाखिल करने की वजह नोएल टाटा और नेविल टाटा के खिलाफ लगाए गए अलग-अलग आरोप बताए जा रहे हैं। टाटा ट्रस्ट ने फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
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सर रतन टाटा ट्रस्ट पर पहले से रोक
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर पहले ही सर रतन टाटा ट्रस्ट के कामकाज पर कुछ प्रतिबंध लगा चुके हैं। इसके चलते ट्रस्ट फिलहाल बैठक नहीं कर पा रहा है। यह रोक हटने तक ट्रस्ट की बैठक आयोजित नहीं की जा सकती। उधर, श्रीनिवासन ने नोएल टाटा की नियुक्ति और उनके स्थायी ट्रस्टी के रूप में बने रहने की जांच की मांग की है। यह भी सवाल उठाया है गया कि नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट का चेयरमैन बनाने का आधार क्या था और वह इस पद पर कैसे बने हुए हैं।

श्रीनिवासन ने एसडीटीटी से जुड़े कुछ फैसलों में नोएल टाटा की भागीदारी और मतदान के अधिकार पर भी रोक लगाने की मांग की है। इसमें टाटा संस के निदेशकों, प्रतिनिधियों या प्रॉक्सी की नियुक्ति अथवा उन्हें निर्देश देने से जुड़े मामले शामिल हैं।
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