Share Market: जरूरत-लक्ष्य के आधार पर लें निवेश का फैसला, बाजार के उतार-चढ़ाव से न हों प्रभावित
पिछले कुछ दिनों से शेयर बाजार लगातार एक ही दिशा में ऊपर की तरफ जा रहा है। ऐसे में निवेशकों को डर है कि वो बाजार में पैसे लगे रहने दें या निकाल लें। एक्सपर्ट की मानें तो बाजार के उतार-चढ़ाव से निवेशकों को प्रभावित नहीं होना चाहिए।
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शेयर बाजार एक ही दिशा में आगे बढ़ रहा है...ऊपर की ओर। इसने स्वाभाविक रूप से नए निवेशकों को अपने निवेश के बारे में चिंता करने पर मजबूर कर दिया है। इन दिनों मुझसे अक्सर पूछे जाने वाले सवाल बाजार में मौजूदा स्थिति के बारे में होते हैं और मुझे इसका जवाब देना मुश्किल लगता है, क्योंकि बाजार के ऊपर या नीचे होने के कारण न तो आप निवेश करते हैं और न ही बाहर निकलते हैं। आपको अपनी जरूरत और दृढ़ विश्वास के आधार पर निवेश करना चाहिए, न कि अन्य वजहों से।
मैं इसे सरल तरीके से समझाता हूं। हम सभी स्वस्थ रहने के लिए खाते हैं। कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें स्वास्थ्य समस्याओं के कारण कम खाने की सलाह दी जाती है। लेकिन, जिन्हें कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं है, उनके खाने पर कोई पाबंदी नहीं होती। फिर भी, एक व्यक्ति अपनी पसंद व नापसंद के आधार पर कुछ खाता है और कुछ नहीं खाता है। इसमें अन्य कारक काम नहीं करता। एक निवेशक को भी इसी प्रकार निवेशित रहने या बाहर निकलने पर फैसला लेना चाहिए।
बाजार के उतार-चढ़ाव से न हों प्रभावित
कम ब्याज दरों, उच्च महंगाई, आय पर अनिश्चितता और बढ़ती उम्र की वास्तविकताओं को देखते हुए हम सभी समझते हैं कि बचत-निवेश की जरूरत है। हमारे पास इतना फंड होना चाहिए, जो सेवानिवृत्ति में हमारा साथ दे। इसलिए, बाजार के उच्च स्तर पर रहने के बावजूद निवेश करते रहना चाहिए। हां, बाजार में गिरावट की आशंका है, लेकिन यह आपके निवेश से बाहर निकलने का कारण नहीं होना चाहिए। कोई व्यक्ति जिस तरह से कई कारकों के आधार पर निवेश की योजना बनाता है, उससे बाहर निकलने से पहले भी उसे विभिन्न कारकों और पहलुओं पर विचार करना चाहिए।
वित्तीय लक्ष्य बनाएं, तय करें समय-सीमा
जीवन के शुरुआती दौर से ही निवेश के बारे में सोचें। यही वह समय है, जब अधिक जोखिम के साथ ज्यादा पैसे निवेश कर सकते हैं। साथ ही, अपने वित्तीय लक्ष्य बनाएं और उन्हें पाने की समय-सीमा तय करें। इससे आप निवेशित रहने के लाभों का अनुभव कर पाएंगे।
कब निकलना चाहिए बाहर
आदर्श रूप से किसी को शेयर बाजार में बहुत लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहिए। साथ ही, वही पैसा लगाना चाहिए, जिसकी उसे कई वर्षों तक जरूरत नहीं है। यह एक बार में बहुत ज्यादा पैसा नहीं हो सकता है, लेकिन यही वह रकम हो सकती है, जिसे कोई बचा सकता है और जिसकी जरूरत नहीं है। हालांकि, हम इसके विपरीत करते हैं। हम बहुत सारा पैसा यह सोचकर खर्च कर देते हैं कि हमें इसकी जरूरत नहीं है। मेरा मतलब घरेलू सामान, किराना, कपड़े आदि जैसी जरूरी चीजों पर खर्च करने से नहीं है। मेरा मतलब उन चीजों पर खर्च से है, जिनकी हमें तुरंत जरूरत नहीं है। इनमें मोबाइल फोन को बार-बार अपग्रेड करना, बार-बार बाहर खाना खाना या हमेशा कपड़ों पर खर्च करना शामिल हो सकता है।
पैसे खर्च करने में बनें रूढ़िवादी
पैसे खर्च करने में थोड़ा रूढ़िवादी होना चाहिए, लेकिन निवेश करने में उदार होना चाहिए। निवेश को आंतरिक रूप से अपनाना चाहिए और एक आदत बना लेनी चाहिए। ठीक वैसे ही, जैसे हम दांत साफ करते हैं या खाना खाते हैं। हां, किसी को अपनी जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग पहलुओं को ध्यान में रखकर समय-समय पर निवेश से बाहर निकलने पर भी विचार करना चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर आपने निवेश के लिए एक लक्ष्य मूल्य निर्धारित किया था और यह आपके अनुमानित समय से पहले उस तक पहुंच गया है, तो निवेश से बाहर निकलने या इसे आगे जारी रखने के बारे में सोचना चाहिए। निवेश एक प्रतीक्षा का खेल है...उचित समय सीमा के लिए अपने निवेश के साथ समय बिताने को तैयार रहें।
निवेश पर समय की पाबंदी नहीं
निवेश को ट्रेड में न मिलाएं क्योंकि ट्रेडिंग निवेश नहीं है। यह बाजार स्थितियों, स्टॉक, फंड या बाजारों की दिशा पर आधारित होती है। ट्रेडिंग को राइड शेयर ऑटो-कैब की तरह समझें। आप सिर्फ गंतव्य तक जाने के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। निवेश करना बाइक-कार के मालिक होने जैसा है। आपको इसका पोषण करना है व इसकी कीमत से परे मूल्य पाना है। इसलिए, अगर इसका सीधा उत्तर खोजने की सोच रहे हैं कि क्या निवेश का यह सही समय है...तो इसका उत्तर है कि कभी भी समय सही या गलत नहीं होता है।