NCR में पटाखों पर लग सकता है हमेशा के लिए बैन, होगा 1000 करोड़ का नुकसान
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दिल्ली एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर हमेशा के लिए बैन लग सकता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में आज सुनवाई होगी। फिलहाल 1 नवंबर तक कोर्ट ने पहले से ही पूरे एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर बैन लगा रखा है। बैन को आगे बढ़ाने के लिए अर्जुन गोपाल नाम के व्यक्ति ने कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है, जिस पर सुनवाई होगी। दिवाली से पहले लगाए गए बैन से हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था।
प्रदूषण के चलते आ सकता है ये फैसला
दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के चलते इस बारे में कोर्ट संज्ञान ले सकता है और हमेशा के लिए बैन लगाने पर फैसला दे सकता है। अगर बैन लगता है तो फिर अकेले दिल्ली-एनसीआर में एक हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका मतलब ये है कि शादियों और अन्य मौकों पर चलने वाले पटाखे पर पूरी तरह से रोक लग सकती है।
जीएसटी के दायरे में आई पटाखों की बिक्री
इस साल से पटाखों को भी जीएसटी के दायरे में आ गई है। पटाखों को 28 फीसदी स्लैब में रखा गया है। इस वजह से पिछले वर्ष की तुलना में पटाखे महंगे हो गए हैं। पटाखों के महंगा होने की वजह से इस बार थोक व्यापारी पहले से ही कम बिक्री से परेशान थे, वहीं दिल्ली-एनसीआर में बैन लगने से इसको काफी नुकसान होगा।
दिल्ली-एनसीआर के पटाखा विक्रेताओं के वकील ने पिछले साल नवंबर के आदेश को बहाल करने का विरोध करते हुए तब कहा था कि 12 सितंबर का सुप्रीम कोर्ट का आदेश सीपीसीबी सहित सभी पक्षों को सुनने के बाद दिया गया था। इसलिए उसे बदलने की जरूरत नहीं है। हालांकि पटाखों से हवा की गुणवत्ता खराब होती है लेकिन, यह पार्टीकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 के बढ़ने के पीछे मुख्य वजह नहीं है।
इन शहरों में पड़ेगा असर
प्रदूषण के बढ़े हुए स्तर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस दिवाली दिल्ली एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी है। इससे गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद, सोनीपत, मेरठ, बुलंदशहर एवं बल्लभगढ़ के पटाखा विक्रेताओं को झटका लगेगा।
सदर बाजार है सबसे बड़ा थोक मार्केट
दिल्ली का सदर बाजार पटाखों की बिक्री का सबसे बड़ा थोक मार्केट है। दिवाली से पहले हर साल सदर बाजार के 74 दुकानदारों को लाइसेंस मिलता है, जबकि इस बार मात्र 24 दुकानदारों को पटाखे बेचने का लाइसेंस मिला था।
शिवकासी में भी दिखेगा असर
तमिलनाडु के शिवकासी से ही पूरे देश में पटाखों की सप्लाई की जाती है। पटाखों के लिए शिवकासी को गढ़ माना जाता है। पूरे देश में 85 फीसदी बिक्री यहीं से होती है। करीब 3 लाख लोग यहां पर पटाखे बनाने के कारोबार से जुड़े हुए हैं।
वहीं 5 लाख लोग सप्लाई और पेपर प्रिंटिंग से जुड़े हैं। शिवकासी में लोगों को आशंका है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन अन्य शहरों में भी हो सकता है, जहां प्रदूषण की समस्या है।