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Iran War: 'होर्मुज से जहाजों की आवाजाही के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं', जानिए सरकार ने क्यों कहा ऐसा

Tue, 24 Mar 2026 08:41 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Tue, 24 Mar 2026 08:41 PM IST
सार

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत सरकार ने साफ किया है कि 'होर्मुज जलडमरूमध्य' से जहाजों की आवाजाही के लिए किसी देश की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग और अंतरराष्ट्रीय नियमों से जुड़ी पूरी खबर के लिए इसे अभी पढ़ें।

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Strait of Hormuz Freedom of navigation Persian Gulf West Asia crisis Ministry of Shipping India
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पेट्रोलियम पदार्थों से समृद्ध फारस की खाड़ी को खुले महासागरों से जोड़ने वाले एकमात्र समुद्री चैनल, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए जहाजों को किसी देश से अनुमति की आवश्यकता नहीं है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह दावा किया। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि शिपिंग कंपनियां सुरक्षा और अन्य स्थितियों पर विचार करने के बाद आवाजाही का निर्णय लेती हैं। उन्होंने ईरान के साथ किसी समझौते की बात को खारिज किया।

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अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर सैन्य हमले शुरू करने के बाद जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई थी। ईरान की जवाबी कार्रवाई ने खाड़ी क्षेत्रों में अमेरिकी ठिकानों और इजरायल को निशाना बनाया था। सिंह ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन सम्मेलनों के तहत आता है। यहां आवाजाही की स्वतंत्रता है। चूंकि जलडमरूमध्य संकरा है, इसलिए केवल प्रवेश और निकास लेन ही चिह्नित हैं जिनका शिपिंग लाइनों को पालन करना होता है।

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भारतीय जहाजों की आवाजाही पर क्या अपडेट?

23 मार्च को दो और भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकर युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे। ये जहाज 26 या 27 मार्च को भारतीय तट पर पहुंचने की उम्मीद है। एलपीजी टैंकर पाइन गैस करीब 45,000 टन एलपीजी ले जा रहा है और 27 मार्च को न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुंचेगा। जग वसंत 47,612 टन एलपीजी के साथ 26 मार्च को गुजरात के कांडला पहुंचेगा। इन दोनों जहाजों में कुल 92,612 टन एलपीजी है और 33 तथा 27 भारतीय नाविक सवार हैं। इससे पहले, एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी, जिनमें करीब 92,712 टन एलपीजी थी, सुरक्षित भारतीय तट पर पहुंच चुके थे। शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा पहुंचा था, जबकि नंदा देवी 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंची थी।

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फंसे हुए जहाजों की स्थिति क्या है?

युद्ध शुरू होने पर होर्मुज जलडमरूमध्य में कुल 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज थे। इनमें से 24 जलडमरूमध्य के पश्चिमी तरफ और चार पूर्वी तरफ थे। पिछले कुछ दिनों में, प्रत्येक तरफ से दो जहाज सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे हैं। अब युद्ध क्षेत्र में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज बचे हैं, जिनमें से 20 जलडमरूमध्य के पश्चिमी तरफ 540 नाविकों के साथ हैं, जबकि दो पूर्वी तरफ हैं। पश्चिमी तरफ फंसे जहाजों में करीब 2.3 लाख टन खाना पकाने वाली गैस वाले पांच एलपीजी वाहक शामिल हैं। इसके अलावा, एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक रासायनिक उत्पाद ले जाने वाला जहाज, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क वाहक और तीन जहाज नियमित रखरखाव के लिए ड्राई डॉक में थे।

कच्चे तेल के आयात के मोर्चे पर भारत के लिए क्या चुनौतियां हैं?

भारत अपने कच्चे तेल का करीब 88 फीसदी, प्राकृतिक गैस का 50 फीसदी और एलपीजी का 60 फीसदी आयात करता है। युद्ध से पहले, भारत द्वारा आयात किए जाने वाले आधे से अधिक कच्चे तेल सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे देशों से आते थे, जो शिपिंग के लिए जलडमरूमध्य का उपयोग करते हैं। करीब 85-95 फीसदी एलपीजी और 30 फीसदी प्राकृतिक गैस जलडमरूमध्य से आती थी। कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान को रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लैटिन अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आंशिक रूप से पूरा किया गया है। हालांकि, औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को गैस और एलपीजी की आपूर्ति कम कर दी गई है। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान सत्यापन के बाद चुनिंदा जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे रहा है।

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