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Manmohan Singh: आरबीआई गवर्नर बोले-आर्थिक सुधारों के वास्तुकार रहे मनमोहन सिंह, राजन ने कहा- वे दूरदर्शी थे

Fri, 27 Dec 2024 02:56 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 27 Dec 2024 02:56 PM IST
सार

Manmohan Singh: भारत के आर्थिक सुधारों के वास्तुकार के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने योगदान से अमिट छाप छोड़ी है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि देते हुए यह बात कही। पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने भी पूर्व पीएम को याद करते हुए दूरदर्शी व ईमानदार बताया।

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Singh's contributions as architect of India's economic reforms have left indelible mark: RBI guv
संजय मल्होत्रा - फोटो : ANI

विस्तार

भारत के आर्थिक सुधारों के वास्तुकार के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने योगदान से अमिट छाप छोड़ी है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि देते हुए यह बात कही।  पूर्व प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री सिंह 1982 से 1985 के बीच आरबीआई के गवर्नर भी रहे।

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मल्होत्रा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, एक दूरदर्शी अर्थशास्त्री और आरबीआई के पूर्व गवर्नर के निधन पर मुझे गहरा दुख हुआ है। भारत के आर्थिक सुधारों के निर्माता के रूप में उनके योगदान ने एक अमिट छाप छोड़ी है। आरबीआई इस बड़े शोक में राष्ट्र के साथ शामिल है।"
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भारत के आर्थिक सुधारों के निर्माता सिंह का गुरुवार रात 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जब 1991 में सिंह ने वित्त मंत्रालय की बागडोर संभाली, तब भारत का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 8.5 प्रतिशत के करीब था, भुगतान संतुलन घाटा बहुत बड़ा था और चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 3.5 प्रतिशत के करीब था।
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हालात को बदतर बनाने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार केवल दो सप्ताह के आयात के भुगतान के लिए ही पर्याप्त था, जो दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था गहरे संकट में थी। ऐसे मौके पर सिंह की ओर से प्रस्तुत केन्द्रीय बजट 1991-92 के बाद नए आर्थिक युग की शुरुआत हुई।

यह स्वतंत्र भारत के आर्थिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसमें साहसिक आर्थिक सुधार हुए, लाइसेंस राज का उन्मूलन हुआ और कई क्षेत्रों को निजी और  विदेशी खिलाड़ियों के लिए खोला गया ताकि पूंजी का प्रवाह हो सके। सिंह लगातार दो कार्यकालों 2004-09 और 2009-14 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। उनके परिवार में पत्नी गुरशरण कौर और तीन बेटियां हैं।

मनमोहन सिंह एक दूरदर्शी और ईमानदार अर्थशास्त्री थे: रघुराम राजन
भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने शुक्रवार को कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एक प्रतिभाशाली अर्थशास्त्री थे, जिनके पास भारत की संभावनाओं के बारे में दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ-साथ राजनीतिक व्यवहार्यता की अच्छी समझ भी थी। राजन ने सिंह को विनम्र और मृदुभाषी बताया, जिनके गुणों के कारण वे मोंटेक सिंह अहलूवालिया, रंगराजन और राकेश मोहन जैसे प्रतिभाशाली लोगों को अपनी टीम में शामिल करने में सक्षम हुए।

उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, "वह एक प्रतिभाशाली अर्थशास्त्री थे, जिनके पास भारत के भविष्य के बारे में एक महान दृष्टिकोण था और साथ ही उन्हें राजनीतिक रूप से क्या संभव है, इसकी भी अच्छी समझ थी...प्रधानमंत्री नरसिंह राव के सहयोग से उन्होंने जो उदारीकरण और सुधार किए, उन्होंने आधुनिक भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव रखी।" सितंबर 2013 से सितंबर 2016 के बीच भारतीय रिजर्व बैंक के 23वें गवर्नर रहे राजन ने याद करते हुए बताया कि सिंह हमेशा जिज्ञासु रहते थे।

उद्योग जगत के दिग्गजों ने याद किया मनमोहन सिंह को

उनके निधन पर गौतम अदाणी, अनिल अंबानी, एन. चंद्रशेखरन, कुमार मंगलम बिड़ला और आनंद महिंद्रा सहित भारतीय उद्योग जगत की बड़ी हस्तियों ने डॉ. सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने शुक्रवार को कहा कि सिंह उन दिग्गजों में से एक थे जिन्होंने एक नये उदारवादी भारत की कल्पना की थी जो आज दुनिया में अपना उचित स्थान ले रहा है।

अपने शोक संदेश में टाटा संस के प्रमुख एन चंद्रशेखरन ने कहा कि दिवंगत सिंह के प्रेरक नेतृत्व ने उन्हें दुनिया भर में सम्मान दिलाया। उन्होंने बयान में कहा, ‘‘ हम पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हैं, जो उन दिग्गजों में से एक थे जिन्होंने एक नए, उदार भारत की कल्पना की थी जो दुनिया में अपना उचित स्थान ले रहा है।’’ चंद्रशेखरन ने कहा, ‘‘ डॉ. सिंह को हमेशा उनकी दूरदर्शी सोच तथा गहरी अंतर्दृष्टि के लिए याद किया जाएगा। वे हमेशा विनम्र रहे और अपने व्यक्तिगत मूल्यों को बनाए रखा।’’

आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन से भारत ने अपने सबसे बड़े नेताओं और बेहतरीन अर्थशास्त्रियों में से एक को खो दिया है।

बिड़ला ने बयान में कहा, ‘‘ भारत ने अपने सबसे बड़े नेताओं तथा बेहतरीन अर्थशास्त्रियों में से एक को खो दिया है। 1991 के दशक के उनके क्रांतिकारी सुधारों ने कई दशकों तक आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा दिया और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसने भारत तथा भारतीयों के लिए संभावनाओं के गणित को नया आकार दिया।’’



वहीं विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उनकी तेज बुद्धि, सहज विनम्रता तथा व्यक्तिगत ईमानदारी के लिए सराहा जाता है ... यह ऐसे गुण हैं जो राजनीति में विरले ही देखने को मिलते हैं। उन्हें न केवल भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर भी सबसे महान राजनेताओं में से एक के रूप में याद किया जाएगा।

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