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Budget 2023-24: बजट में बढ़ सकती है महिलाओं की हिस्सेदारी, सत्ता की चाबी साबित हो रही हैं महिला वोटर्स

Wed, 11 Jan 2023 04:03 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 11 Jan 2023 04:03 PM IST
सार

Budget 2023-24: आर्थिक मामलों के जानकार मानते हैं कि केंद्र सरकार की 80 फीसदी से ज्यादा कल्याणकारी योजनाओं के केंद्र में सीधे तौर महिलाएं शामिल होती हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना, राशन योजना, उज्जवला योजना और मनरेगा सहित अनेक योजनाओं के केंद्र में महिलाएं ही लाभार्थी होती हैं...

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share of women may hike in the Budget 2023-24, women voters are key for BJP
Budget 2023-24: महिला वोटर। - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

आगामी बजट (Budget 2023-24) में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। पिछले बजट में केवल 4.32 फीसदी की भागीदारी पर सिमट गईं महिलाओं को यह बढ़त एमएसएमई सेक्टर में औद्योगिक कार्य करने पर विशेष प्रोत्साहन योजना और शिक्षा-स्वास्थ्य क्षेत्र में ज्यादा भागीदारी के माध्यम से मिल सकती है। सरकार तकनीकी और कौशल आधारित शिक्षा में महिलाओं के लिए विशेष योजनाओं की शुरुआत कर सकती है। जिस तरह महिला मतदाता भाजपा के लिए सत्ता में आने की गारंटी साबित हो रही हैं, और इसी वर्ष नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, माना जा रहा है कि इस कोर वोटर बैंक को साधने के लिए सरकार बजट में इनके लिए विशेष प्रावधान कर सकती है।   

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पिछले बजट में महिलाओं की हिस्सेदारी

वित्त वर्ष 2022-23 में महिलाओं के लिए 1,71,006 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। यह 2021-22 में दिए गए बजट 1,53,326 करोड़ रुपये से लगभग 11 फीसदी ज्यादा था। हालांकि, बजट में महिलाओं की कुल हिस्सेदारी की दृष्टि से देखें, तो पिछले बजट में महिलाओं की हिस्सेदारी आंशिक तौर पर कम हो गई थी। 2021-22 में बजट का 4.4 फीसदी हिस्सा महिलाओं के हिस्से में आया था, जबकि 2022-23 में यह हिस्सेदारी घटकर 4.32 फीसदी रह गई थी।

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महिला और बाल विकास मंत्रालय को पिछले वित्त वर्ष में 25,172.28 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। इसके पिछले बजट यानी वित्त वर्ष 2021-22 में 24,435 करोड़ रुपये की धनराशि इस मंत्रालय को आवंटित की गई थी। इस प्रकार महिला और बाल विकास मंत्रालय को निर्धारित बजट में भी पिछली बार आंशिक बढ़त हुई थी। इस बार भी यह क्रम जारी रह सकता है।   

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केंद्र की योजनाओं के केंद्र में महिलाएं

आर्थिक मामलों के जानकार मानते हैं कि केंद्र सरकार की 80 फीसदी से ज्यादा कल्याणकारी योजनाओं के केंद्र में सीधे तौर महिलाएं शामिल होती हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना, राशन योजना, उज्जवला योजना और मनरेगा सहित अनेक योजनाओं के केंद्र में महिलाएं ही लाभार्थी होती हैं। महिलाओं के लिए निर्धारित होने वाले पिछले बजट में सबसे बड़ा हिस्सा प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से आया था।

चूंकि, पीएम आवास योजना में दिए जा रहे घरों की रजिस्ट्री परिवार की महिला सदस्यों के नाम पर होनी तय की गई थी, इससे महिलाओं के लिए निर्धारित होने वाले बजट में अच्छी बढ़ोतरी हुई थी। माना जाता है कि इस योजना के कारण प्रधानमंत्री मोदी की सरकार महिलाओं के बीच विशेष तौर पर लोकप्रिय हुई और उसे महिलाओं के वोट बड़ी संख्या में मिले और उसकी सत्ता में वापसी की राह आसान हुई।        

महिला वोटर क्यों महत्त्वपूर्ण

सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटी (CSDS) की एक रिपोर्ट के अनुसार 2007 में यूपी विधानसभा के चुनाव में बसपा को 32 फीसदी महिलाओं ने वोट दिया था और मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं थीं। 2012 में 31 फीसदी महिलाओं ने समाजवादी पार्टी को वोट दिया और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनने में कामयाब रहे। 2017 में 41 फीसदी महिलाओं ने भाजपा को वोट दिया, तो योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में भी महिलाओं ने सपा की तुलना में 16 फीसदी ज्यादा भाजपा को वोट दिया और योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने में कामयाब हुए।

हाल ही में संपन्न हुए गुजरात विधानसभा चुनावों में भी यही ट्रेंड नजर आया। इस चुनाव में वोट करने वाले 48 फीसदी पुरुषों ने भाजपा को वोट दिया, जबकि 50 फीसदी महिलाओं ने भाजपा के पक्ष में वोट डाला। 2019 के लोकसभा चुनाव में वोट देने वाली महिलाओं का 37 फीसदी वोट भाजपा को मिला। इस चुनाव में यह बात भी देखी गई कि महिलाओं का मतदान प्रतिशत लगभग पुरुषों के बराबर आ गया। इस लोकसभा में इतिहास में सबसे ज्यादा 78 महिला लोकसभा सांसद जीतकर आईं। यह आंकड़ा भी केंद्र सरकार की महिलाओं के बीच लोकप्रियता का एक प्रमाण हो सकता है।

जहां भाजपा जीती, वहां महिलाओं की भागीदारी ज्यादा

2022 की शुरुआत में ही पांच विधानसभाओं के लिए मतदान हुआ था। भाजपा ने इसमें चार राज्यों (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर) में जीत दर्ज की थी। चुनाव विशेषज्ञ इसे केवल संयोग नहीं मान रहे हैं कि इन सभी राज्यों में महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया था। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 62.2 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया था, तो पुरुषों की भागीदारी केवल 59.6 फीसदी रही थी। इसी प्रकार उत्तराखंड में 62.6 फीसदी पुरुषों की तुलना में 67.6 फीसदी महिला वोटरों ने मतदान किया। मणिपुर में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 81 फीसदी, पुरूषों का 78.2 फीसदी और गोवा में पुरुषों के 87.9 फीसदी के मुकाबले 90.5 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया।     

भाजपा के रणनीतिकार मानते हैं कि केंद्र सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं के कारण उनमें भाजपा के प्रति समर्थन बढ़ रहा है। यह ट्रेंड लोकसभा चुनावों के साथ-साथ विधानसभा के चुनावों में भी बना हुआ है। यही कारण है कि इस बार भी केंद्र सरकार के बजट में महिलाओं के प्रति विशेष झुकाव देखा जा सकता है।

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