BIS Bomb Disposal Standard: बम डिस्पोजल के लिए पहली बार भारत में बने खास मानक, मजबूत होगी सुरक्षा; जानिए सबकुछ
भारत ने अपनी आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने और रक्षा विनिर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश में पहली बार बम निरोधक प्रणालियों के लिए एक समर्पित 'भारतीय मानक' तैयार किया गया है।
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देश में बम निस्तारण से जुड़े उपकरणों के लिए अब एक साफ-सुथरा और तय भारतीय नियम बन गया है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने IS 19445:2025 नाम से यह नया मानक जारी किया है। इसका मकसद यह तय करना है कि बम निस्तारण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण विस्फोट और छर्रों के असर को कितनी अच्छी तरह रोक पाते हैं।
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मानक का उद्देश्य
यह मानक केंद्रीय गृह मंत्रालय और टर्मिनल बैलिस्टिक अनुसंधान प्रयोगशाला के अनुरोध पर विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य निर्माताओं, खरीद एजेंसियों और परीक्षण संस्थानों को एक समान, वस्तुनिष्ठ और विश्वसनीय मूल्यांकन ढांचा उपलब्ध कराना है।
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने कहा कि यह मानक स्वैच्छिक अपनाने के लिए है। उनके अनुसार, इसके लागू होने से मूल्यांकन प्रक्रियाओं में एकरूपता आएगी, गुणवत्ता-आधारित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और महत्वपूर्ण सुरक्षा अभियानों में तैनात बम निस्तारण प्रणालियों पर भरोसा मजबूत होगा।
भारतीय मानक की जरूरत क्यों पड़ी?
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बताया कि मानक में परीक्षण उपकरणों, परीक्षण क्षेत्र की स्थितियों और मूल्यांकन प्रक्रियाओं से जुड़ी विस्तृत आवश्यकताएं शामिल हैं, ताकि प्रणालियों की प्रभावशीलता का निष्पक्ष आकलन किया जा सके। भारतीय मानक की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय मानक या तो सीमित पहुंच वाले हैं या भारत की सुरक्षा एजेंसियों के सामने आने वाले खतरे और परिचालन परिस्थितियों से पूरी तरह मेल नहीं खाते।
भारतीय सशस्त्र बल, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, राज्य पुलिस और नागरिक एजेंसियां संघर्ष क्षेत्रों, सैन्य छावनियों और सार्वजनिक स्थानों पर बिना फटे बमों, आईईडी और हैंड ग्रेनेड जैसे खतरों का सामना कर रही हैं। इन जोखिमों को कम करने के लिए बम ब्लैंकेट, बम बास्केट और बम इनहिबिटर जैसी प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाता है।
नया मानक परीक्षण पद्धतियों, उपकरणों, नमूनों और स्वीकृति मानदंडों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है, जिससे निर्माताओं और मान्यता प्राप्त परीक्षण एजेंसियों को प्रदर्शन मानकों के अनुरूपता की पुष्टि करने में मदद मिलेगी। मंत्रालय के अनुसार, IS 19445:2025 को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए, भारतीय खतरे परिदृश्यों और परिचालन वातावरण के अनुरूप ढाला गया है। इससे वैश्विक समन्वय के साथ राष्ट्रीय जरूरतें भी पूरी होंगी और भारतीय निर्माताओं की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता को बल मिलेगा।