SEBI: सेबी ने कार्वी के निवेशकों से दावा दायर करने को कहा, 2 जून की समयसीमा है नजदीक
बाजार नियामक सेबी ने शुक्रवार को भुगतान में चूक करने वाली कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड (केएसबीएल) के निवेशकों से दो जून की समयसीमा से पहले अपना-अपना दावा दाखिल करने को कहा है। आइए इस बारे में और जानें।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बाजार नियामक सेबी ने शुक्रवार को भुगतान में चूक करने वाली कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड (केएसबीएल) के निवेशकों से दो जून की समयसीमा से पहले अपना-अपना दावा दाखिल करने को कहा है। केएसबीएल को 23 नवंबर, 2020 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) द्वारा डिफॉल्टर घोषित किया गया था। इसके बाद, निवेशकों को डिफॉल्टर ब्रोकर के खिलाफ दावे प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया था, जिसकी अंतिम तिथि 2 जून, 2025 निर्धारित की गई थी।
सेबी ने अपने बयान में कहा, "चूंकि डिफॉल्ट ब्रोकर कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के खिलाफ निवेशकों के दावे प्रस्तुत करने की समय सीमा निकट आ रही है, इसलिए निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे उपरोक्त समय सीमा पर ध्यान दें और आग्रह किया जाता है कि यदि उन्होंने अभी तक दावा प्रस्तुत नहीं किया है तो वे समय सीमा से पहले ही दावा प्रस्तुत कर दें।" सहायता के लिए निवेशक एनएसई से उसके टोल-फ्री नंबर 1800 266 0050 पर कॉल करके (आईवीआर विकल्प 5 चुनें) या defaultisc@nse.co.in पर ईमेल करके संपर्क कर सकते हैं।
केएसबीएल और उसके सीएमडी पर 2023 में लगा था सात साल का प्रतिबंध
अप्रैल 2023 में, सेबी ने केएसबीएल और उसके सीएमडी सी पार्थसारथी को प्रतिभूति बाजार से सात साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। ब्रोकिंग फर्म को दिए गए पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग करके ग्राहकों के धन की हेराफेरी करने के लिए उन पर 21 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
यह कार्रवाई केएसबीएल की ओर से बड़े पैमाने पर संपत्ति जुटाने के अभियान के बाद की गई है। कंपनी ने वित्तीय संस्थानों से भारी मात्रा में धन जुटाया। ब्रोकिंग फर्म ने ग्राहकों की प्रतिभूतियों को गिरवी रखकर ऐसा किया- जो केएसबीएल को दिए गए पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से सुरक्षित हैं।
हालांकि, इन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के बजाय, धन का दुरुपयोग किया गया और उसे केएसबीएल से जुड़ी संस्थाओं में स्थानांतरित कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप नियामक मानदंडों का उल्लंघन करते हुए, ग्राहक प्रतिभूतियों और निधियों के निपटान में चूक हुई।