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Supreme Court: सीएमआरएल मामले में कांग्रेस एमएलए की याचिका खारिज, केरल सीएम के खिलाफ जांच की मांग की थी

Mon, 06 Oct 2025 06:53 PM IST
कुमार विवेक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 06 Oct 2025 06:53 PM IST
सार

केरल उच्च न्यायालय ने 28 मार्च को कुझालनादन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ उनकी बेटी की अब बंद हो चुकी आईटी फर्म और निजी खनन कंपनी सीएमआरएल के बीच कथित वित्तीय लेनदेन की जांच की मांग की थी। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

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SC rejects Congress MLA's plea seeking probe against Kerala CM in CMRL case
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझालनादन की याचिका खारिज कर दी, जिसमें कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन के संबंध में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनकी बेटी वीना विजयन के खिलाफ जांच की मांग की गई थी।

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केरल उच्च न्यायालय ने 28 मार्च को कुझालनादन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ उनकी बेटी की अब बंद हो चुकी आईटी फर्म और निजी खनन कंपनी सीएमआरएल के बीच कथित वित्तीय लेनदेन की जांच की मांग की थी।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने कांग्रेस विधायक की याचिका को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा, "हम लगातार कह रहे हैं कि आप अपनी राजनीतिक लड़ाई मतदाताओं के समक्ष लड़ें, अदालत में नहीं।"
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मुख्य न्यायाधीश ने जैसे ही मामला सामने आया, कुझालनादन की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गुरु कृष्ण कुमार के समक्ष अपना रुख स्पष्ट कर दिया। कुझालनादन के वकील ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने याचिका को राजनीति से प्रेरित नहीं पाया है और एक स्तर पर तो यहां तक कहा कि "इसमें कुछ ऐसा है जिस पर गौर किया जाना चाहिए।"

वरिष्ठ वकील ने कहा कि मामले में तीन निर्विवाद तथ्य हैं और उनमें यह भी शामिल है कि सीएमआरएल और वीना विजयन के स्वामित्व वाली कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच एक अनुबंध था। उन्होंने कहा कि एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को सीएमआरएल से 1.72 करोड़ रुपये मिले और आयकर अंतरिम निपटान बोर्ड के समक्ष कार्यवाही के दौरान सीएमआरएल ने स्वीकार किया कि वीना विजयन की कंपनी द्वारा कोई सेवा प्रदान नहीं की गई।

कुमार ने तर्क दिया कि हालांकि उच्च न्यायालय ने माना था कि इन तथ्यों से "संदेह" उत्पन्न हुआ, लेकिन उसने यह मान कर गलती की कि संज्ञान-पूर्व चरण में शिकायत "सिद्ध तथ्यों" पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "पूर्व-संज्ञान चरण में सिद्ध तथ्यों पर जोर देकर उच्च न्यायालय ने गलती की है।" हालांकि पीठ ने दोहराया कि वह दोनों निचली अदालतों के निष्कर्षों में हस्तक्षेप नहीं करेगी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "अपनी राजनीतिक लड़ाई मतदाताओं के सामने लड़ें। अदालत के मंच का इस्तेमाल न करें।"

कुझालनादन ने सतर्कता अदालत के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया था। इसमें सीएमआरएल और एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच कथित वित्तीय लेनदेन को लेकर विजयन के खिलाफ जांच की उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।


न्यायमूर्ति के बाबू ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि विधायक सतर्कता अदालत के सामने मुख्यमंत्री, उनकी बेटी और उनकी कंपनी के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित तथ्य पेश करने में विफल रहे हैं। उच्च न्यायालय ने कहा था, "दी गई सामग्री में संज्ञान लेने के लिए आरोपित अपराधों से संबंधित तथ्य उपलब्ध नहीं हैं।" साथ ही न्यायालय ने यह भी कहा कि विधायक की ओर से उपलब्ध कराए गए तथ्य "अधिक से अधिक संदेह पैदा करते हैं।"

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