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SC: तीन हफ्ते में जवाब दे मंत्रालय, बैंकों में लावारिस पड़ी जमाराशि से जुड़ी याचिका पर कोर्ट का निर्देश
Thu, 06 Apr 2023 06:38 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Thu, 06 Apr 2023 06:38 PM IST
सार
Supreme Court: प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे एक वकील की इस दलील पर गौर किया कि कंपनी मामलों के मंत्रालय ने जनहित याचिका पर जवाब दाखिल कर दिया है और उन्होंने वित्त मंत्रालय को कुछ और समय की मांग की।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी उत्तराधिकारियों को निष्क्रिय खातों में पड़ी जमा राशि के बारे में सूचित करने के लिए तंत्र विकसित करने की मांग वाली याचिका पर वित्त मंत्रालय से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने पाया कि पत्रकार सुचेता दलाल की याचिका पर कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय और आरबीआई ने अपना जवाबी हलफनामा दाखिल किया है, लेकिन वित्त मंत्रालय से जवाब नहीं आया।
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सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ के समक्ष केंद्र के वकील ने वित्त मंत्रालय को जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया। पीठ ने इसे स्वीकार करते हुए मामले को तीन सप्ताह के बाद 28 अप्रैल को सूचीबद्ध कर दिया। जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट से केंद्र और अन्य को यह सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है कि सरकार के स्वामित्व वाले फंड में स्थानांतरित होने वाली निष्क्रिय खातों की जमा राशि की सूचना जमाकर्ताओं के कानूनी उत्तराधिकारियों को दी जाए। इसमें कहा गया कि निष्क्रिय बैंक खातों में पड़ी लावारिस जमा राशि के बारे में कानूनी उत्तराधिकारियों को सूचित करने के लिए एक तंत्र विकसित करने की जरूरत है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में पहले वित्त मंत्रालय, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय, सेबी और आरबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
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सरकारी फंड में बड़ी मात्रा में जमा हो रही निष्क्रिय खातों की राशि : याचिका के मुताबिक, डिपॉजिटर्स एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (डीईएएफ) में मार्च 2021 के अंत में 39,264.25 करोड़ रुपये और 31 मार्च, 2020 को यह राशि 33,114 करोड़ रुपये थी, जबकि मार्च 2019 के अंत में इस फंड में 18,381 करोड़ रुपये थे।
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जो जीवित नहीं उनके खातों में पड़ी राशि का डाटाबेस बनाने की मांग
याचिका में जीवित नहीं बचे लोगों के विभिन्न बैंक खातों, बीमा, जमा राशियों, पोस्ट ऑफिस फंड्स के बारे में एक केंद्रीयकृत डाटाबेस तैयार करने की भी मांग की गई है। साथ ही कहा गया है कि आरबीआई इसका नियंत्रण करे। इसमें मृतक खाताधारक का नाम, पता और लेन-देन की अंतिम तिथि शामिल की जाए, ताकि इनके कानूनी उत्तराधिकारियों को इस राशि के बारे में जानकारी दी जा सके। इसके अलावा, बैंकों के लिए निष्क्रिय खातों के बारे में आरबीआई को सूचित करना अनिवार्य होना चाहिए। इस अभ्यास को 9-12 महीने के अंतराल के बाद दोहराना चाहिए।