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SC ने पूछा, क्या लोन मोरेटोरियम की अवधि के ब्याज को देय शुल्कों में जोड़ा जाएगा

Fri, 12 Jun 2020 12:27 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Fri, 12 Jun 2020 12:27 PM IST
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SC asks Centre in connection with loan moratorium petition Will there be additional interest later
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोन मोरेटोरियम की अवधि 31 अगस्त तक बढ़ाई है। ग्राहकों को कुल छह महीने तक किस्त टालने का विकल्प मिला है। लेकिन इस बीच ईएमआई के भुगतान को लेकर कई सवाल हैं। ऋण स्थगन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि, 'हमारी चिंता केवल यह है कि क्या तीन महीने के लिए स्थगित किए गए ब्याज को बाद में देय शुल्कों में जोड़ा जाएगा या ब्याज पर ब्याज लगेगा।'

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तीन दिन के भीतर संयुक्त बैठक
न्यायालय ने वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों से तीन दिन के भीतर संयुक्त बैठक बुलाने के लिए कहा है, ताकि यह तय किया जा सके कि 31 अगस्त यानी छह महीने तक लोन भुगतान की अवधि में छूट के दौरान ईएमआई पर ब्याज बैंकों द्वारा वसूला जा सकता है या नहीं। इस मामले की अगली सुनवाई 17 जून 2020 को होगी। अदालत ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता दोनों की बैठक का इंतजाम करें।
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इससे पहसे आरबीआई ने उच्चतम न्यायालय से कहा था कि कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर वह कर्ज किस्त के भुगतान में राहत के हर संभव उपाय कर रहा है। लेकिन जबरदस्ती ब्याज माफ करवाना उसे सही निर्णय नहीं लगता है क्योंकि इससे बैंकों की वित्तीय स्थिति बिगड़ सकती है। इसका खामियाजा बैंक के जमाधारकों को भी भुगतना पड़ सकता है। 

रिजर्व बैंक ने किस्त भुगतान पर रोक के दौरान ब्याज लगाने को चुनौती देने वाली याचिका का जवाब देते हुए कहा था कि उसका नियामकीय पैकेज, एक स्थगन, रोक की प्रकृति का है, इसे माफी अथवा इससे छूट के तौर पर नहीं माना जाना चाहिए।  


बैंकों को हो सकता है दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान
रिजर्व बैंक ने कोरोना वायरस लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियों के बंद रहने के दौरान पहले तीन माह और उसके बाद फिर तीन माह और कर्जदारों को उनकी बैंक किस्त के भुगतान से राहत दी है। कर्ज की इन किस्तों का भुगतान 31 अगस्त के बाद किया जा सकेगा। इस दौरान किस्त नहीं चुकाने पर बैंक की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। आरबीआई ने कहा कि इस अवधि का ब्याज भी नहीं लिया गया तो बैंकों को दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा।
 

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