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PM SVANidhi: अब तक ₹9,100 करोड़ से अधिक लोन, 53 लाख से अधिक फुटकर व्यापारियों को लाभ, 75 फीसदी गैर-सामान्य

Tue, 24 Oct 2023 08:53 PM IST
ज्योति भास्कर बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 24 Oct 2023 08:53 PM IST
सार

फुटपाथ पर सामान बेचने वाले व्यापारियों की आर्थिक मदद के लिए केंद्र सरकार योजना चलाती है। पीएम स्वनिधि नाम की इस योजना के 75 प्रतिशत लाभार्थी गैर-सामान्य वर्ग के रेहड़ी-पटरी वाले हैं। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

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SBI PM SVANidhi scheme 75 per cent beneficiaries non general category
पीएम स्वनिधि स्कीम के तहत फुटपाथ विक्रेताओं को मदद - फोटो : social media

विस्तार

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, रेहड़ी-पटरी पर सामान बेचकर गुजारा करने वाले लोगों की मदद के लिए मोदी सरकार की सूक्ष्म-ऋण योजना- पीएम स्वनिधि काफी मददगार रही है। "समावेशी उद्यमिता" सुनिश्चित करने के मकसद से शुरू की गई इस योजना के तहत लगभग 75 प्रतिशत लाभार्थी गैर-सामान्य वर्ग के हैं।  एसबीआई की शोध रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस 75 फीसदी में 44 फीसदी लाभार्थी ओबीसी समुदाय से हैं।
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रेहड़ी-पटरी वालों के लिए मोदी सरकार की सूक्ष्म-ऋण योजना की सराहना करते हुए एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएम स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के 22 प्रतिशत लाभार्थियों को आर्थिक मदद मुहैया कराई गई है। कुल लाभार्थियों में से 43 प्रतिशत महिलाएं हैं।
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रिपोर्ट में कहा गया है, लाभार्थी की कुल संख्या में महिलाओं की हिस्सेदारी शहरी महिलाओं में उद्यमशीलता की क्षमता का और सशक्त होना दिखाता है। इससे स्वनिधि को लिंग समानता का टैग भी मिलता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- एक्स पर शोध रिपोर्ट साझा करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारतीय स्टेट बैंक के सौम्य कांति घोष का यह गहन शोध पीएम स्वनिधि के परिवर्तनकारी प्रभाव की बहुत स्पष्ट तस्वीर दिखाता है।"
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प्रधानमंत्री ने कहा, "यह इस योजना की समावेशी प्रकृति को रेखांकित करता है।" पीएम मोदी के अनुसार, एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि इसने वित्तीय सशक्तिकरण को कैसे बढ़ावा दिया है। प्रधानमंत्री ने अपनी वेबसाइट पर भी रिपोर्ट की मुख्य बातें साझा कीं।

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 75 प्रतिशत ऋण लाभार्थियों का गैर-सामान्य श्रेणी से आना दिखाता है कि नीति परिवर्तनकारी बदलाव लाने वाली है। इससे नेक इरादे वाली योजनाएं बनाने की जन्मजात शक्ति का प्रमाण भी मिलता है। शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएम स्वनिधि योजना की मदद से सामुदायिक बाधाओं को तोड़ने में मदद मिली है। हाशिए पर रहने वाले शहरी सूक्ष्म उद्यमियों को निर्बाध रूप से जोड़ा गया है।

एसबीआई के शोध के अनुसार, दृढ़ता अनुपात (पहला और दूसरा ऋण चुकाया गया) बढ़ रहा है। इससे योजना की जरूरत और लोकप्रियता का पता चलता है। पीएम स्वनिधि स्कीम की सफलता से उन लोगों को और प्रोत्साहन मिल रहा है जो ऋण वापस कर रहे हैं।

बता दें कि 10,000 रुपये का पहला ऋण चुकाने के बाद सरकार 20,000 रुपये का दूसरा ऋण देती है। इस लाभ को उठाने वाले लाभार्थियों का अनुपात 68 प्रतिशत है। 20,000 रुपये का दूसरा ऋण चुकाने और 50,000 रुपये का तीसरा ऋण लेने वाले लोगों का अनुपात 75 प्रतिशत है। 


रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक, तीनों किश्तों में लगभग 70 लाख ऋण बंटे जा चुके हैं। इससे 53 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी वालों को लाभ हुआ है। बांटी गई ऋण राशि 9,100 करोड़ रुपये से अधिक है। प्रधानमंत्री मोदी की वेबसाइट पर रिपोर्ट की हाइलाइट्स में कहा गया है कि आर्थिक उत्थान के उद्देश्य से पीएम स्वनिधि योजना एक "बड़ी सफलता" है। योजना के तहत 65 प्रतिशत से अधिक कर्जदार 26-45 आयु वर्ग के हैं।
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