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सहारा को अगले साल वित्तीय संकट समाप्त होने की है उम्मीद, जानिए यह है वजह
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला डॉट काम
Updated Mon, 02 Jul 2018 02:12 PM IST
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सहारा प्रमुख सुब्रत राय
- फोटो : getty images
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लंबे समय से वित्तीय संकट से जूझ रहे सहारा समूह ने अगले साल तक इसके समाप्त होने का विश्वास व्यक्त किया है। समूह की मानें तो कुछ नए क्षेत्रों में कारोबार शुरू किया गया है। जिससे समूह को काफी उम्मीद है। नए व्यवसाय से समूह को भारतीय उद्योग जगत में फिर से प्रतिष्ठा मिलेगी।
समूह ने अपनी वित्तीय स्थिति पर मीडिया में विस्तार से एक विज्ञापन दिया है जिसमें उसने पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड सेबी के पास 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा कराने का हवाला देते हुए कहा है कि यह राशि का ब्याज भी नियामक के पास जमा है। जिसका कोई उपयोग भी नहीं किया गया। पिछले पांच सालों में इनमें से निवेशकों को 91 करोड़ रुपए ही दिए गए। इसके पीछे की वजह यह हो सकती है कि कंपनी पहले ही अपने ज्यादातर निवेशकों का भुगतान कर चुकी है। समूह ने जोर देकर कहा कि निवेशकों के पुनभुर्गतान संबंधी दस्तावेजों के सत्यापन के बाद सेबी-सहारा के खाते में पड़ा पैसा उसे वापस मिल जाएगा।
समूह ने कहा कि उस पर किसी भी तरीक से राशि जुटाने पर प्रतिबंध लगा है। संपत्तियों की बिक्री से जो धन मिल रहा है वह सीधे सेबी-सहारा के खाते में चला जाता है। इसकी एक भी रकम समूह की जरूरतों के लिए उपयोग में नहीं लाई गई है। ऐसे प्रतिबंध के बाद समूह का काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है।
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समूह ने अपनी वित्तीय स्थिति पर मीडिया में विस्तार से एक विज्ञापन दिया है जिसमें उसने पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड सेबी के पास 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा कराने का हवाला देते हुए कहा है कि यह राशि का ब्याज भी नियामक के पास जमा है। जिसका कोई उपयोग भी नहीं किया गया। पिछले पांच सालों में इनमें से निवेशकों को 91 करोड़ रुपए ही दिए गए। इसके पीछे की वजह यह हो सकती है कि कंपनी पहले ही अपने ज्यादातर निवेशकों का भुगतान कर चुकी है। समूह ने जोर देकर कहा कि निवेशकों के पुनभुर्गतान संबंधी दस्तावेजों के सत्यापन के बाद सेबी-सहारा के खाते में पड़ा पैसा उसे वापस मिल जाएगा।
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समूह ने कहा कि उस पर किसी भी तरीक से राशि जुटाने पर प्रतिबंध लगा है। संपत्तियों की बिक्री से जो धन मिल रहा है वह सीधे सेबी-सहारा के खाते में चला जाता है। इसकी एक भी रकम समूह की जरूरतों के लिए उपयोग में नहीं लाई गई है। ऐसे प्रतिबंध के बाद समूह का काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है।
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समूह ने कहा कि वह फिर से 2019-20 तक एक प्रतिष्ठित ग्रुप बन जाएगा
SEBI
समूह ने कहा कि उसके नकदी प्रवाह को 15 हजार करोड़ रुपए का नुकसान सहना पड़ा है। वजह यह थी कि उसे 2012 में महज पांच-छह महीने के भीतर ही निवेशकों को करीब 22 हजार करोड़ रुपए वापस करने पड़े। मूल वित्तीय योजना के तहत 16-17 सालों में छोटी-छोटी राशियों में यह भुगतान किया जाना था। समूह ने कहा कि वह फिर से 2019-20 तक एक प्रतिष्ठित ग्रुप बन जाएगा क्योंकि उसकी संपत्ति अभी भी उसकी देनदारियों से तीन गुनी है।
समूह के प्रवक्ता ने कहा कि सेबी को जमा कराए दस्तावेजों के सत्यापन से ही साबित हो जाएगा कि समूह ने अपने 95 प्रतिशत निवेशकों को पैसा लौटा दिया है। ऐसा होने के बाद सहारा ने जो 20,000 करोड़ रुपये जमा कराये हैं उसमें से काफी धन ब्याज सहित वापस सहारा को मिल जायेगा। सहारा ने कहा कि इस पैसे पर लगी रोक हटते ही कंपनी, उसके 14 लाख कर्मचारियों और करोड़ों उपभोक्ताओं की दिक्कतें दूर हो जायेंगी।
समूह के प्रवक्ता ने कहा कि सेबी को जमा कराए दस्तावेजों के सत्यापन से ही साबित हो जाएगा कि समूह ने अपने 95 प्रतिशत निवेशकों को पैसा लौटा दिया है। ऐसा होने के बाद सहारा ने जो 20,000 करोड़ रुपये जमा कराये हैं उसमें से काफी धन ब्याज सहित वापस सहारा को मिल जायेगा। सहारा ने कहा कि इस पैसे पर लगी रोक हटते ही कंपनी, उसके 14 लाख कर्मचारियों और करोड़ों उपभोक्ताओं की दिक्कतें दूर हो जायेंगी।