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Rupee vs Dollar: रुपया 80 पार, आम आदमी पर इस कमजोरी से कितनी पड़ेगी मार? ऐसे समझिए
Tue, 19 Jul 2022 02:05 PM IST
विवेक दास
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विवेक दास
Updated Tue, 19 Jul 2022 02:05 PM IST
सार
रुपये में कमजोरी आने से कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, खाद्य तेल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं। ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक सामान और गैजेट्स विदेश से आयात किए जाते हैं। ऐसे में, रुपये के कमजोर होने से उनके लिए हमें ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।
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कमजोर रुपये के साइड इफेक्ट्स
- फोटो : amarujala.com
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विस्तार
दिसंबर 2014 के बाद से रुपये में डॉलर की तुलना में 25 प्रतिशत तक की कमजोरी आ चुकी है। मंगलवार को रुपया ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण प्रति डॉलर 80 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी पार कर गया है। ऐसे में इस बात का आकलन जरूरी है कि रुपये की इस गिरावट का आम आदमी के जीवन पर क्या असर पड़ने वाला है?
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कुल मिलाकर देखा जाए तो रुपये में जैसे-जैसे कमजोरी बढ़ेगी आम आदमी की मुसीबत भी बढ़ती ही जाएगी। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हमारा देश बहुत सारी चीजों के लिए आयात पर निर्भर है। ज्यादातर आयात-निर्यात अमेरिकी डॉलर में ही होता है इसलिए बाहरी देशों से कुछ भी खरीदने के लिए हमें अधिक मात्रा में रुपये खर्च करने पड़ेंगे। ऐसे में पेट्रोल-डीजल समेत अन्य आयातित वस्तुएं देश मे महंगी होती जाएंगी।
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कंप्यूटर, मोबाइल, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक सामान हो सकते हैं महंगे
रुपये में कमजोरी का असर कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, खाद्य तेल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर पड़ सकता है। ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक सामान और गैजेट्स विदेश से आयात किए जाते हैं। ऐसे में, रुपये के कमजोर होने से उनकी कीमतें भी बढ़ सकती है, क्योंकि समान मूल्य और मात्रा के लिए आयातकों को अधिक पैसा चुकाना पड़ेगा। विदेश में पढ़ाई करना भी रुपये में कमजोरी के कारण महंगा हो सकता है। रुपये के मूल्य में गिरावट का साफ मतलब यह है कि आपको हर डॉलर के लिए ज्यादा रुपये चुकाने पड़ेंगे। इससे विदेश में पढ़ने वाले छात्रों का खर्च निश्चित तौर पर बढ़ जाएगा।
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विदेशों में छुट्टियां मनाना होगा महंगा
अगर आप कारोबार या छुट्टियां मनाने के लिए विदेश जाने की सोच रहे हैं तो रुपये के कमजोर होने से ये आपके के लिए खर्चीला सौदा साबित हो सकता है। जैसे-जैसे रुपया कमजोर होकर नीचे गिरेगा आपकी विदेश यात्रा महंगी होती जाएगी। अगर आपने 70 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर अपनी विदेश यात्रा का प्लान बनाया था तो रुपये के 80 रुपये प्रति डॉलर पर चले जाने से आपके खर्च में भी तकरीबन 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाएगी। रुपये की कीमत जैसे-जैसे नीचे जाती है इससे देश का आयात भी महंगा होता जाता है, इससे देश का विदेश व्यापार घाटा भी बढ़ता है।
रुपये के टूटने से इन लोगों को हो रहा फायदा
रुपये में आ रही कमजोरी सबके लिए नुकसान का सौदा नहीं है। निर्यातकों को इससे फायदा होने वाला है। इसका कारण यह है कि विदेश में सामान बेचने से डॉलर में आमदनी होती है और जैसे-जैसे रुपया कमजोर होकर गिरेगा उन्हें अपने उत्पाद की ज्यादा कीमत मिलेगी। आईटी और फार्मा कंपनियों को रुपये में कमजोरी से फायदा मिलेगा क्योंकि वे अपने उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात भी करते हैं। उनकी ज्यादातर आय डॉलर में ही होती है।
रुपये की तुलना डॉलर से ही क्यों होती है? क्या है ब्रेटन वुड्स एग्रीमेंट?
वैश्विक मुद्रा बाजार में अधिकांश मुद्राओं की तुलना डॉलर के साथ ही की जाती है। हम अक्सर देखते हैं कि किसी देश की मुद्रा की डॉलर के मुकाबले उसकी कीमत चर्चा में रहती है। हमारे देश में भी रुपये के उतार चढ़ाव की तुलना डॉलर से ही की जाती है। बीते कुछ महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपया काफी कमजोर हुआ है। पर, आखिर रुपये की डॉलर से ही तुलना क्यों होती है? इस सवाल का जवाब छिपा है द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुए ‘ब्रेटन वुड्स एग्रीमेंट’ में। इस समझौते में न्यूट्रल ग्लोबल करेंसी बनाने का प्रस्ताव रखा गया था।
उस समय युद्धग्रस्त पूरी दुनिया में अमेरिका आर्थिक तौर पर मजबूत होकर उभरा था। ऐसे में अमेरिकी डॉलर को दुनिया की रिजर्व करेंसी के रूप में चुना गया और पूरी दुनिया की करेंसी के लिए डॉलर को एक मापदंड के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा।