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Rupee vs Dollar: फेड के कड़े निर्णय के बाद रुपया ऑल टाइम लो पर, शेयर बाजार भी लुढ़का

Thu, 22 Sep 2022 07:26 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Thu, 22 Sep 2022 07:26 PM IST
सार

Rupee vs Dollar: यूएस फेरडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद गुरुवार को रुपया अपने पिछले कारोबारी दिन के क्लोज होने के लेवल 79.9750 की तुलना में गुरुवार को रिकॉर्ड लो 80.2850 के लेवल पर पहुंचकर खुला। इसके बाद स्टॉक मार्केट में भी गिरावट नजर आई। सेंसेक्स 337 अंकों की गिरावट के साथ 59,119 तो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 88 अंकों की गिरावट के साथ 17,629 अंकों पर बंद हुआ।

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Rupee vs Dollar: Rupee at all-time low after Fed's tough decision, stock market also rolled
Rupee Vs Dollar

विस्तार

रुपया गुरुवार को अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 80.86 के लेवल पर बंद हुआ। इससे पिछले कारोबारी सेशन में रुपया 79.9750 के लेवल पर बंद हुआ था। बीते 24 फरवरी के बाद से यह रुपये में एक दिन में आई सबसे बड़ी गिरावट है। 

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रुपया अपने पिछले कारोबारी दिन के क्लोज होने के लेवल 79.9750 की तुलना में गुरुवार को रिकॉर्ड लो 80.2850 के लेवल पर पहुंचकर खुला। बता दें कि रुपये में आई इस गिरावट का कारण यूएस फेरडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना रहा। फेड के इस फैसले के कारण दुनियाभर के बाजार पर दबाव दिखा। यूएस फेड ने रेपोरेट में 75 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का एलान किया है। इसके साथ ही फेड ने यह भी साफ कर दिया है कि भविष्य में ब्याज दरों को और बढ़ाया जा सकता है और वर्ष 2024 तक इनका बढ़ना जारी रहेगा।  

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फेड के फैसले के बाद अधिकांश भारतीय बाजार कमजोरी के साथ खुले। चीन की मुद्रा युआन भी डॉलकर के मुकाबले लुढ़ककर 7.10 के स्तर पर पहुंच गया। स्वास्तिक इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च हेड संतोष मीणा का मानना है कि यूएस फेडरल रिजर्व के हालिया कार्यकलापों और बयानों से यह जाहिर यह ब्याज दरों को बढ़ाने के अंतिम पायदान से  अब भी दूर है। साथ ही वे यह भी कहते हैं कि घरेलू बाजार में आर्थिक स्थिति बेहतर रहने के बावजूद रुपये पर दबाव बनाना रहेगा।  

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आने वाले दिनों में रुपये की चाल पर बोलते हुए उन्होंने कहा है कि रुपये में अभी कमजोरी बनी रह सकती है और यह फिसलकर 81.5-82 के स्तर तक जा सकता है। हालांकि 81 का स्तर रुपये के लिए मध्यवर्ती और बढ़िया सर्पोट लेवल होगा। कुछ विदेशी मुद्रा व्यापारियों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मुद्रा की गिरावट को रोकने के लिए कदम जरूरी उठाए पर ये  हस्तक्षेप बहुत आक्रामक नहीं थे।

रेलिगेयर ब्रोकिंग की कमोडिटी और मुद्रा अनुसंधान उपाध्यक्ष सुगंधा सचदेवा ने कहा कि रूस व यूक्रेन के बीच तनाव बढ़ने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से तीसरी बार 75 बीपीएस की भारी वृद्धि के संकेतों के बीच रुपया 80.61 अंक के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी का भी मानना है कि फेड के कठोर निर्णय लेने से रुपये पर दबाव बढ़ा है और कुछ समय तक यह जारी रह सकता है। 

वहीं दूसरी ओर, शेयर बाजार पर भी फेड के निर्णय का असर देखने को मिला। गुरुवार को लगातार दूसरे दिन भारतीय बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। इससे पहले अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से 75 बेसिस प्वाइंट ब्याज दरें बढ़ाने के बाद बाजार सुबह गिरावट के साथ खुले। उसके बाद बाजार में रिकवरी आई पर उसपर मुनाफावसूली हावी रहा। आज का कारोबार खत्म होने पर मुंबई स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 337 अंकों की गिरावट के साथ 59,119  तो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 88 अंकों की गिरावट के साथ 17,629 अंकों पर बंद हुआ।

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