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Rupee vs Dollar 2023: 2022 में 10% टूटा रुपया, नए साल में कैसी रहेगी करेंसी की चाल, क्या है जानकारों की राय?

Mon, 26 Dec 2022 01:07 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Mon, 26 Dec 2022 01:07 PM IST
सार

Rupee vs Dollar 2023: मुद्रा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2023 के पहले छह महीनों के दौरान वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण रुपये के बाजार में भारतीय उठा-पटक देखने को मिल सकती है। जानकार मानते हैं कि रुपये को गिरावट की ओर धकेलने में ग्लोबल मंदी, जिसकी आशंका जताई जा रही है और कोविड का भी योगदान रह सकता है।

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Rupee vs Dollar 2023: 10% broken rupee in 2022, how will the currency move in the new year, what experts say?
Dollar vs Rupee - फोटो : amarujala.com

विस्तार

वर्ष 2022 को विदाई देने का वक्त आ गया है। नया साल प्रवेश करने को तैयार है। ऐसे में इस बात पर चर्चा भी जरूरी है कि बीते साल में लगातार नीचे की ओर फिसलने वाली भारतीय मुद्रा रुपये की चाल डॉलर के मुकाबले नए साल में कैसी रहेगी? आइए जानकारों के नजरिए से समझते हैं कि नए साल में रुपये का गिरना जारी रहेगा या इसके दिन बहुरेंगे। 

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मुद्रा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2023 के पहले छह महीनों के दौरान वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण रुपये के बाजार में भारतीय उठा-पटक देखने को मिल सकती है। जानकार मानते हैं कि रुपये को गिरावट की ओर धकेलने में ग्लोबल मंदी, जिसकी आशंका जताई जा रही है और कोविड का भी योगदान रह सकता है। हालांकि, मनी  मार्केट के डीलर्स मानते हैं कि वर्ष 2023 के दूसरे हाफ में रुपया मजबूत हो सकता है, क्योंकि उम्मीद  है कि तब तक केंद्रीय बैंक अपनी ब्याज दरों को उच्चतम स्तर पर ले जा चुके होंगे, और महंगाई से भी राहत मिल चुकी होगी।

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रुपया बनाम डॉलर - फोटो : pixabay

# नए साल में भी जारी रह सकता है रुपये में उतार-चढ़ाव का दौर
कोटक सिक्योरिटीज के वीपी अनिंद्य बनर्जी के अनुसार वर्ष 2023 के पहले छह महीनों के दौरान वैश्विक बाजार मंदी की अनिश्चिताओं के कारण प्रभावित रह सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय बाजार की आर्थिक हालत कुछ हद तक सुधर सकती है, क्योंकि ऊर्जा की कीमतों के मामले में जो सबसे बुरा हो सकता था वह फिलहाल नहीं होता दिख रहा है। इस बीच अगर रूस और यूक्रेन के बीच  संघर्ष समाप्ति की खबर आती है तो यह भी बाजार के लिए संजीवनी बुटी का काम करेगा।

बनर्जी के अनुसार वैश्विक आर्थिक चिंताओं के कारण घरेलू मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। 20 दिसंबर को जारी आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की ओर से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएस फेडरल रिजर्व ने दिसंबर महीने में ब्याज वृद्धि की दर धीमी जरूर की, उस उसकी टिप्पणी अभी दरों में और वृद्धि की ओर इशारा कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार फेड ना सिर्फ महंगाई से मुकाबला कर रहा है बल्कि उसे बाजार की उम्मीदों का भी ध्यान रखना पड़ा रहा है, विकास की अनिश्चितताओं के कारण चिंतित है। 

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भारतीय रुपया - फोटो : amarujala.com

# नए साल में किस रेंज में कारोबार कर सकता है रुपया?

बाजार के विशेषेज्ञों के अनुसार साल 2023 में रुपया अमेरिकी डॉलर  के मुकाबले 79-85 रुपये के विस्तृत रेंज में कारोबार कर सकता है। नए साल के पहले छह महीनों के दौरान मुद्रा बाजार में 80 रुपये से 82 रुपये के बीच कारोबार देखने को मिल सकता है। वर्ष के दूसरे छह महीनों में रुपये के लिहाज से स्थिति बेहतर हो सकती है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार के मुताबिक नए साल 2023 में हम रुपये की चाल 79 रुपसे से 84 रुपये के बीच देख सकते हैं। साल के पहले छह महीने रुपये की मजबूती की लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

कोटक सिक्योरिटीज के बनर्जी के मुताबिक साल के दूसरे हाफ में केंद्रीय बैंकों की ओर से ब्याज वृद्धि दर में कटौती करने और महंगाई में राहत से रुपये में मजबूती आ सकती है। वर्ष 2023 की दूसरी छमाही में यूएस फेड की ओर से ब्याज दरों में कटौती से डॉलर में कमजोरी दिख सकती है। वहीं परमार के मुताबिक वैश्विक केंद्रीय बैंको की ओर से मौद्रिक पाॅलिसी में लचीलापन, भारतीय बॉन्ड के ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में जुड़ना, विदेशी पूंजी का आना आदि कारण रुपये की मजबूती में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं।

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# रुपये में मजबूती लौटी तो विदेशी मुद्रा भंडार में हो सकता है इजाफा 

विदेशी मुद्रा डीलरों ने कहा कि रुपए की मजबूती से केंद्रीय बैंक को कोविड महामारी के दौरान दिखे स्तर पर विदेशी मुद्रा भंडार पहुंचाने में मदद मिल सकती है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के इकोनॉमिक्स रिसर्च के अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने एक रिपोर्ट में कहा, "आरबीआई फॉरेक्स रिजर्व बढ़ाने के लिए डॉलर की कमजोरी की समयावधि का उपयोग कर सकता है। यह रुपये को 81 के स्तर से नीचे गिरने से रोक देगा।"

गुप्ता ने कहा, “बाजार की आशंकाओं और फेड का रुख रुपये का निचला स्तर 83.50 रुपये तक सीमित कर सकता है। रुपये को तेजी से गिरने से बचाने के लिए आरबीआई पिछले कुछ महीनों से विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। इस दौरान, केंद्रीय बैंक ने अपने विदेशी मुद्रा कोष से भारी मात्रा में खर्च किया है।

Rupee vs Dollar 2023: 10% broken rupee in 2022, how will the currency move in the new year, what experts say?
फॉरेक्स - फोटो : pixabay

# बीते एक महीने में विदेशी मुद्रा भंडार 30 अरब डॉलर बढ़ा 
लेकिन पिछले पांच हफ्तों में रुपये में स्थिरता के कारण भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 18 नवंबर से अब तक देश का फॉरेक्स रिजर्व 30 अरब डॉलर से ज्यादा बढ़ चुका है। एचडीएफसी बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री स्वाति अरोड़ा के अनुसार, रुपये को स्थिर रखने के लिए आरबीआई की ओर से हस्तक्षेप जारी रहने की संभावना है। अरोड़ा ने कहा, "केंद्रीय बैंक किसी भी स्तर का बचाव नहीं कर रहा है, लेकिन यह तेज अस्थिरता या रुपये में गिरावट को रोकने के लिए हस्तक्षेप करेगा।"

2022 में अब तक रुपये में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह 82 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के माध्यम से लगातार अपना निवेश बाहर निकालने और यूएस फेड की ओर से आक्रामक दर वृद्धि के कारण रुपये में यह तीव्र गिरावट दिखी। इसके बावजूद, डीलरों का मानना है कि पाउंड स्टर्लिंग, यूरो और जापानी येन सहित अन्य की तुलना में रुपया अधिक स्थिर बना हुआ है।
 

# दुनिया की दूसरी मुद्राओं की तुलना में रुपये का लचीलापन बरकरार

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति बयान में कहा कि रुपये में इसके अन्य समकक्षों की तुलना में अपेक्षाकृत कम गिरावट आई है। दास ने कहा, “दरअसल, कुछ को छोड़कर अन्य सभी प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले रुपये में मजबूती आई है।” वित्तीय वर्ष के आधार पर, अप्रैल 2022 और अक्टूबर 2022 के बीच रुपये में वास्तविक रूप से 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, हालांकि इस दौरान कई प्रमुख मुद्राओं का मूल्यह्रास हुआ। अलग-अलग देशों की मुद्राओं की विनिमय दर वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति-समायोजित उतार-चढ़ाव आधार पर तय की जाती है या जिसे वास्तविक प्रभावी शर्तों (Real Effective Terms) के रूप में जाना जाता है।

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