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रोटोमैक के मालिक विक्रम कोठारी को है महंगी गाड़ियों और पार्टियों का शौक

Tue, 20 Feb 2018 04:37 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 20 Feb 2018 04:37 PM IST
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rotomac group vikram kothari was flamboyant known for luxury cars and parties

3700 करोड़ रुपये के बैंकिंग घोटाले में फंसे रोटोमैक ग्रुप के मालिक विक्रम कोठारी को महंगी गाड़ियों और पार्टियां करने का शौक है। दोस्तों और अपने चाहने वालों के सामने कोठारी बहुत ही शान का जीवन जीता रहा है। 

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फिल्म स्टार को करता था आमंत्रित
कोठारी के लगभग 30 सालों से मित्र एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विक्रम को लोग महंगी पार्टियों को आयोजित करने वाले शख्स के तौर पर जानते थे। वो अपनी पार्टियों में फिल्म स्टार्स को आमंत्रित करता रहा है। पिछले एक साल से चल रहे खराब समय के बाद भी पार्टियों का दौर थमने के बजाए और ज्यादा हो गया था। 
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महंगी कार खरीदना का शौक
कोठारी को अच्छी गाड़ियों का शौक भी है। मार्केट में कोई गाड़ी आती तो सबसे पहले किसी और के खरीदने से पहले कोठारी के पास वो गाड़ी होती थी। गाड़ी खरीदने के मामले में वो काफी रिस्क लेते थे। 

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डॉलर ट्रेडिंग का भी था शौक

rotomac group vikram kothari was flamboyant known for luxury cars and parties

कोठारी के एक दूसरे मित्र ने बताया कि उन्हें डॉलर खरीदने-बेचने का भी काफी शौक था। वो ऐसे ग्रुप से जुड़े हुए थे, जिनमें चार-पांच लोग थे जो इस तरह का सट्टा खेलते थे। हालांकि इस खेल में कोठारी को हमेशा नुकसान ही हुआ, लेकिन तब भी उससे उनका जुड़ाव कम नहीं हुआ।

एक समय में रोटोमैक ने डॉलर ट्रेड में 1100 करोड़ रुपये का नुकसान भी उठाया। इसमें से 400 करोड़ रुपये कोठारी के खुद के थे। इसके बाद से कोठारी के बुरे दिन शुरू हो गए थे। 

ऐसे बने पेन किंग से कर्ज किंग
बैंक को हजारों करोड़ रुपये की चपत लगाने वाले विक्रम कोठारी की कहानी बड़ी दिलचस्प है। देश-दुनिया में कोठारी परिवार की पहचान पान मसाले के ब्रांड पान पराग से बनी। मनसुख भाई कोठारी ने बेटों दीपक कोठारी और विक्रम कोठारी के साथ वर्ष-1975 में पुड़िया वाला पान मसाला बनाकर बेचना शुरू किया। छोटी पुड़िया में पान मसाला लोगों को बहुत पसंद आया।

करीब 25 वर्ष तक अर्श में रहने वाले विक्रम के अगस्त-2016 में अचानक फर्श पर पहुंचने की जानकारी सामने आई। उनके दीवालिया होने की खबर सबसे पहले अमर उजाला ने प्रकाशित की थी। जानकारों की मानें तो गलत निवेश और फिजूलखर्ची उनके व्यावसायिक पतन का कारण बनी।

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