त्योहारी सीजन: नो-कॉस्ट EMI पर सामान खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान, विक्रेता आकर्षक ऑफर देने को तैयार
नो-कॉस्ट ईएमआई या शून्य-ब्याज ईएमआई एक पुनर्भुगतान सुविधा है। यह आपकी बड़ी खरीदारी पर खर्च होने वाली रकम को 24 महीने तक की अवधि के लिए कई ब्याज मुक्त किस्तों में बांट देती है।
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त्योहारी सीजन की शुरुआत होने वाली है। खुदरा विक्रेता आकर्षक ऑफर और अन्य प्रकार की छूट देने की तैयारी कर रहे हैं। खरीदारी त्योहारों का अहम हिस्सा है, जिसके लिए नो-कॉस्ट ईएमआई लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरा है। नो-कॉस्ट ईएमआई विशेष तौर पर त्योहारी सीजन में उपयोगी होता है, जब लोग घरों का नवीनीकरण कराना चाहते हैं या इलेक्ट्रॉनिक्स और फर्नीचर जैसी अधिक मूल्य वाली वस्तुएं खरीदना चाहते हैं। यह सुविधा ग्राहकों को किसी उत्पाद की कुल लागत को बिना अतिरिक्त ब्याज का भुगतान किए एक निर्धारित अवधि के लिए आसान किस्तों में बांटकर बड़ी खरीदारी का विकल्प देती है। आप भी त्योहारों में नो-कॉस्ट ईएमआई का लाभ उठाना चाहते हैं, तो कुछ बातें जरूर जाननी चाहिए।
भुगतान को अधिकतम 24 माह की मोहलत
नो-कॉस्ट ईएमआई या शून्य-ब्याज ईएमआई एक पुनर्भुगतान सुविधा है। यह आपकी बड़ी खरीदारी पर खर्च होने वाली रकम को 24 महीने तक की अवधि के लिए कई ब्याज मुक्त किस्तों में बांट देती है।
- आप 48,000 रुपये में स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं, लेकिन पूरा भुगतान एक साथ नहीं करना चाहते हैं, तो 12 महीने की नो-कॉस्ट ईएमआई विकल्प चुन सकते हैं। यानी बिना किसी ब्याज के 4,000 की मासिक ईएमआई पर स्मार्टफोन खरीद सकते हैं।
लागू रहता है सालाना ब्याज
आप जब नो-कॉस्ट ईएमआई का विकल्प चुनते हैं तो किस्त भुगतान पर कोई अतिरिक्त ब्याज नहीं लिया जाता है। हालांकि,विक्रेता की ओर से ब्याज माफ नहीं किया जाता है,बल्कि छूट के रूप में पेश किया जाता है। इसके अलावा, कर्जदाता की ओर से एक वार्षिक ब्याज दर लागू रहती है, जिसका वहन विक्रेता करता है। इसलिए, बिना ब्याज के होने के बावजूद अन्य खर्च और शर्तें हैं,जिनके बारे में नो-कॉस्ट ईएमआई का विकल्प चुनते समय पता होना जरूरी है।
ऐसे समझें फायदे और नुकसान का गणित
- नो-कॉस्ट ईएमआई का विकल्प चुनने पर विक्रेता छूट के रूप में ब्याज माफ कर सकता है,फिर भी इसमें प्रोसेसिंग शुल्क शामिल हो सकता है। यह आमतौर पर खरीदारी राशि का करीब 2-3 फीसदी होता है। इस शुल्क पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है।
- उदाहरण के लिए,अगर आप 20,000 रुपये की कीमत का टेलीविजन खरीदते हैं तो विक्रेता अग्रिम भुगतान पर 10 फीसदी की छूट दे सकता है,जिससे इसके दाम घटकर 18,000 रुपये हो जाएंगे।
- आप नो-कॉस्ट ईएमआई चुनते हैं,तो यह छूट नहीं मिलेगी और किस्तों में पूरे 20,000 का भुगतान करना होगा। साथ ही,प्रोसेसिंग शुल्क पर 18 फीसदी जीएसटी भी देना होगा।
जहां तक संभव हो अग्रिम भुगतान करें
अपने बजट को प्रभावित किए बिना उत्पाद की अग्रिम लागत दे सकते हैं, तो नो-कॉस्ट ईएमआई से बचें। कई बार यह विकल्प चुनने से अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। यह ध्यान रखें कि नो-कॉस्ट ईएमआई विकल्प आकर्षक होने के बावजूद सिर्फ चुनिंदा उत्पादों पर ही उपलब्ध हो सकता है। वहीं, अग्रिम भुगतान में कई लाभ मिलते हैं, जो अतिरिक्त बचत में मदद करते हैं। -आदिल शेट्टी, सीईओ, बैंक बाजार