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Report: UPI लेनदेन में 42% इजाफा पर औसत टिकट साइज 8% घटा; 2024 की दूसरी छमाही में हुए कुल 93.23 अरब लेनदेन

Thu, 03 Apr 2025 05:11 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Thu, 03 Apr 2025 05:11 AM IST
सार

संख्या और मूल्य के लिहाज से 2024 की दूसरी छमाही में यूपीआई लेनदेन में फोनपे, गूगल पे और पेटीएम का दबदबा रहा। कुल यूपीआई लेनदेन में तीनों एप की संयुक्त हिस्सेदारी क्रमशः 93 फीसदी और 92 फीसदी रही।

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Report: UPI transactions increased by 42% but average ticket size decreased by 8%
UPI - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

देश की डिजिटल भुगतान प्रणाली में यूपीआई का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। वर्ल्डलाइन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 की दूसरी छमाही (जुलाई-दिसंबर) में यूपीआई लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 42 फीसदी बढ़कर 93.23 अरब पहुंच गई। वहीं, मूल्य के लिहाज से जुलाई-दिसंबर अवधि में कुल 130.91 लाख करोड़ रुपये के यूपीआई लेनदेन हुए, जो 2023 की दूसरी छमाही के 99.68 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 31 फीसदी अधिक है। हालांकि, यूपीआई लेनदेन का औसत टिकट साइज (हर उपभोक्ता की ओर से किया गया औसत भुगतान) 8 फीसदी घटकर 1,396 रुपये रह गया।

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संख्या और मूल्य के लिहाज से 2024 की दूसरी छमाही में यूपीआई लेनदेन में फोनपे, गूगल पे और पेटीएम का दबदबा रहा। कुल यूपीआई लेनदेन में तीनों एप की संयुक्त हिस्सेदारी क्रमशः 93 फीसदी और 92 फीसदी रही।
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क्रेडिट कार्ड से 10.76 लाख करोड़ के लेनदेन
2024 की दूसरी छमाही में क्रेडिट कार्ड के जरिये 10.76 लाख करोड़ रुपये के 2.42 अरब लेनदेन हुए। यह मूल्य और संख्या के लिहाज से क्रमशः 14 फीसदी एवं 36 फीसदी अधिक है। डेबिट कार्ड से लेनदेन की संख्या में 29 फीसदी तक गिरावट आई है।
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क्रेडिट कार्ड जारी करने में निजी बैंक आगे
2024 की दूसरी छमाही तक जारी कार्ड की संख्या 1.53 अरब थी। इनमें क्रेडिट कार्ड 10.80 करोड़ और डेबिट कार्ड की 99.09 करोड़ थे। जारी क्रेडिट कार्ड में निजी बैंक 71 फीसदी हिस्सेदारी के साथ आगे रहे, जबकि सरकारी बैंकों का योगदान 24 फीसदी रहा। डेबिट कार्ड जारी करने में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 64 फीसदी और निजी बैंकों की 25 फीसदी रही। इस अंतर से पता चलता है कि निजी बैंकों में जोखिम उठाने की क्षमता अधिक है, जबकि सरकारी बैंक वंचित लोगों को बैंकिंग प्रणाली में शामिल करने पर जोर दे रहे हैं।

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