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रेपो रेट में कमी से रियल एस्टेट को मिलेगा बल, महंगाई के काबू में रहने की उम्मीद

Thu, 04 Apr 2019 05:18 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Thu, 04 Apr 2019 05:18 PM IST
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repo rate cut will boost real estate sector, also ease inflation

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती करने के एलान के साथ ही रियल एस्टेट बाजार के साथ ही अन्य अर्थशास्त्रियों ने भी खुशी जताई है। इन लोगों का मानना है कि इससे होम लोन लेना सस्ता होगा, जिससे मकानों की बिक्री बढ़ेगी। वहीं दूसरी तरफ महंगाई को काबू रखा जा सकेगा, जिसके चलते आरबीआई अगले चार महीनों में रेपो रेट में और कटौती कर सकता है। 

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अफोर्डेबल हाउसिंग को मिलेगा प्रोत्साहन

होमक्राफ्ट के सीईओ प्रसून चौहान ने कहा कि रेपो रेट में कटौती से सबसे बड़ा असर अफोर्डेबल और मध्यम वर्गीय घर खरीदारों पर पड़ेगा। बैंक अगर अपनी ब्याज दरों में कटौती करेंगे तो इसका फायदा आने वाले हफ्तों में देखने को मिल सकता है। 

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बढ़ सकती है मकानों की बिक्री

एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि लगातार दूसरी बार आरबीआई ने रेपो रेट में कटौती की है। देश के सात बड़े शहरों में पिछले तीन माह में मकानों की बिक्री 12 फीसदी बढ़ गई है। अब पिछले चार माह में 50 बेसिस प्वाइंट की कुल कटौती से रियल एस्टेट सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है। 

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अगस्त में होगी और कटौती

एचडीएफसी बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट अभीक बरूआ ने कहा कि अब आरबीआई अगस्त में रेट कटौती करेगा, क्योंकि अगस्त महीने में वो कच्चे तेल के दाम, मानसून और नई सरकार के आने के बाद बदले माहौल को देखेगा।  

महंगाई दर काबू रखने में मिली सफलता

रियल एस्टेट क्षेत्र के संगठन क्रेडाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष जक्षय शाह का कहना है कि सरकार महंगाई की दर को 2.5 फीसदी से भी कम रखने में सफल रही है। इस वजह से एक बार फिर से रेपो दर में ढाई फीसदी की कटौती का मार्ग प्रशस्त हुआ। रिजर्व बैंक के इस फैसले से लोगों पर ईएमआई का बोझ कम होगा, जिससे अवासीय इकाइयों की मांग बढ़ेगी। यह फैसलादीर्घकाल में अर्थव्यवस्था में तेज विकास दर का मार्ग प्रशस्त करेगा।

बैंकों को ब्याज दर घटाने को कहे रिजर्व बैंक

इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल -ईईपीसी- इंडिया के अध्यक्ष रवि सहगल का कहना है कि बीते फरवरी से रेपो दर में आधा फीसदी की कटौती हो चुकी है लेकिन बैंकों ने इसका लाभ ग्राहकों को नहीं दिया है। इस वजह से लघु उद्यमियों और निर्यातकों को महंगी ब्याज दर पर ऋण लेकर काम करना पड़ रहा है। उन्होंने रिजर्व बैंक से कहा है कि ब्याज दर में कटौती का फैसला बैंकों से भी लागू करवायें।

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