स्टार्टअप : एंजल कर हटने से बढ़ेगा नवाचार, विदेशी निवेश भी आएगा; विवाद और मुकदमेबाजी में भी कमी आएगी
एंजल कर हटाने से स्टार्टअप तंत्र को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। एंजल कर हटाने से विवाद और मुकदमेबाजी में भी कमी आएगी।
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स्टार्टअप के लिए एंजल कर हटाने के सरकार के फैसले से विदेशी निवेश आकर्षित करने एवं नवाचार को बढ़ावा देने के साथ स्टार्टअप तंत्र को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा, यह एक लंबित मुद्दा था, क्योंकि यह कर देश में आने वाले निवेश पर लगाया जाता था। इस तरह के विदेशी निवेश पर कर नहीं लगाया जाना चाहिए। एंजल कर हटाने से विवाद और मुकदमेबाजी में भी कमी आएगी।
जरूरी था कर हटाना
सचिव ने कहा, निवेशक संभावित नए नवाचार पर निवेश करता है और एंजल कर उन्हें नुकसान पहुंचा रहा है। इस कारण भारत में एक ‘वास्तविक रूप से अच्छे’ विचार को समर्थन नहीं मिल रहा था। साथ ही, यह लोगों को विदेश से पैसा लाने के लिए मजबूर कर रहा था।
एंजल कर के कारण भारत में एफडीआई कम हो जाता है। इससे ऐसी व्यवस्था बनती है, जहां लोग देश के बाहर रहते हैं और फिर लंबे समय बाद वापस आ जाते हैं, क्योंकि बाजार यहीं है।
क्या है एंजल कर
सरकार एंजल कर गैर-सूचीबद्ध कंपनियों या स्टार्टअप की ओर से जुटाई गई धनराशि पर तब लगाती है, जब उनका मूल्यांकन कंपनी के उचित बाजार मूल्य से अधिक है। इस पर 30 फीसदी से अधिक कर लगता है।