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RBI MPC: विदेशी निवेश बढ़ाने और रुपये को मजबूत करने पर आरबीआई का जोर, जानें नई मौद्रिक नीति की प्रमुख बातें

Sat, 06 Jun 2026 12:59 PM IST
Navita R Asthana बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Navita R Asthana Updated Sat, 06 Jun 2026 12:59 PM IST
सार

आरबीआई की नई मौद्रिक नीति में विदेशी निवेश बढ़ाने और रुपये को स्थिर करने पर जोर दिया गया है। टैक्स छूट और अर्थव्यवस्था पर इसके असर की पूरी जानकारी के लिए यह खबर पढ़ें। अभी क्लिक करें।

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RBI Shifts Focus to Attract Foreign Investment and Stabilise Rupee: Key Takeaways from the New Monetary Policy
आरबीआई एमपीसी - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की हालिया मौद्रिक नीति ने महंगाई को नियंत्रित करने के अपने पारंपरिक ढांचे से बाहर निकलकर एक नया और व्यावहारिक रुख अपनाया है। इस बार केंद्रीय बैंक का मुख्य फोकस भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश की कमी को पाटना और बाहरी क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करना है। आसान शब्दों में समझें तो, लगातार कमजोर हो रहे रुपये और बाजार से बाहर जा रहे विदेशी डॉलर को रोकने के लिए आरबीआई ने कई बड़े आर्थिक उपायों और कर छूट की घोषणा की है। इन कदमों का उद्देश्य विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का भरोसा जीतना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करना है। 

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नई मौद्रिक नीति समिति पर जानकारों की क्या राय?

यस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील पान ने बताया, इस बार की आरबीआई की नीति, मुद्रास्फीति की गतिशीलता को संबोधित करने के बजाय भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश की कमी को दूर करने ओर बाहरी क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करने पर अधिक केंद्रित रही। जिसमें वैश्विक प्रतिभूति और आर्थिक बाजारों में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण उपायों में विदहोल्डिंग टैक्स और दीर्घकालिक पूंजीगत करो को हटाने जैसे उपाय शामिल हैं। बैंकों को तीन से पांच साल की परिपक्वता अवधि के एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट जुटाने की अनुमति दी गई है, जिसमें आरबीआई इसकी पूरी हेजिंग की लागत वहन करेगी। वहीं बैंकों को रियायती फॉरेक्स स्वैप के साथ ईसीबी जुटाने की भी अनुमति दी गई है। हालांकि निवेश की सही प्रकृति का पता लगाना अभी कठिन है, लेकिन 35 से 45 अरब अमेरिकी डॉलर का अनुमान उचित हो सकता है, जो वित्त वर्ष 2027 के लिए अनुमानित बीओपी के अंतर को लगभग पाटने के लिए पर्याप्त है।

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विदेशी मुद्रा प्रवाह और भुगतान संतुलन में सुधार का अनुमान

केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा, घरेलू बाजार में विदेशी पूंजी प्रवाह को आकर्षिक करने और बढ़ाने के उद्देश्य से कई उपायों की घोषणा आरबीआई ने आज की है। जिसमें विदेशी निवेशकों के लिए पूरी तरह से सुलभ मार्ग देना जिसमें पात्र प्रतिभूतियों के दायरे का विस्तार करना, ईसीबी जुटाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के लिए रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधाएं दी गई हैं और एफसीएनआर (बी) जमा पर हेजिंग लागत को माफ करना मुख्य है। इन उपायों से विदेशी मुद्रा प्रवाह और भुगतान संतुलन की स्थिति में सुधार होने का अनुमान है।  

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रुपये पर दबाव कम होने की उम्मीद

वर्तमान में रुपये की कमजोरी मुख्य रूप से लगातार विदेशी निवेश बहिर्वाह से उत्पन्न हो रही है। हम वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी के 0.5-0.6 प्रतिशत के विदेशी निवेश प्रवाह की उम्मीद करते हैं, जो टेपर-टैंट्रम संकट (एक वैश्विक वित्तीय घटना है जो 2013 में तब घटी, जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) ने अर्थव्यवस्था में पैसे डालने के अपने  कार्यक्रम को धीमा करने या रोकने  का संकेत दिया था) के दौरान देखे गए जीडीपी के 2 प्रतिशत के औसत से काफी कम है। आरबीआई और सरकार द्वारा आज घोषित उपायों से रुपये पर दबाव कम होने की उम्मीद है। यदि निकट भविष्य में संघर्ष कम होता है और वित्त वर्ष 2027 में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें औसतन 90 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती हैं, तो हमें उम्मीद है कि रुपये का मूल्य अमेरिकी डॉलर के मुकाबले औसतन 92-93 के बीच रहेगा।

भविष्य में ऋण पक्ष में एफआईआई प्रवाह में सुधार होने की संभावना

जेएम फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज के मैक्रो इकोनॉमिस्ट हितेश सुवर्णा कहते हैं, आरबीआई की वृद्धि-मुद्रास्फीति संबंधी अपेक्षाएं वित्त वर्ष 2027 में लंबे समय तक आपूर्ति व्यवधान के प्रभाव का संकेत दे रही हैं। हमारा मानना है कि विदेशी मुद्रा को मजबूत करने के लिए उठाए गए अतिरिक्त उपायों से मुद्रा (आईएनआर) पर दबाव कम होगा क्योंकि निकट भविष्य में ऋण पक्ष में एफआईआई प्रवाह (विदेशी संस्थागत निवेश) में सुधार होना चाहिए।

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