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RBI MPC: वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी अनुमान 6.5% पर बरकरार, जानिए एमपीसी के बाद क्या बोले आरबीआई गवर्नर

Fri, 06 Jun 2025 12:29 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 06 Jun 2025 12:29 PM IST
सार

RBI Announcement on GDP: आरबीआई गवर्नर ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 के विकास अनुमानों की तुलना वित्त वर्ष 2024-25 में दर्ज 6.5 प्रतिशत आर्थिक विकास से की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जून तिमाही के लिए 6.5 प्रतिशत और सितंबर तिमाही के लिए 6.7 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान जताया है। आरबीआई गवर्नर ने आगे क्या कहा, आइए जानते हैं।

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RBI says Indian economy shows strength, stability, opportunity; retains FY26 GDP forecast at 6.5 pc
जीडीपी पर क्या बोले रिजर्व बैंक के गवर्नर। - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार जून महीने की एमपीसी के फैसलों का एलान किया। इस दौरान केंद्रीय बैंक के मुखिया ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि अनुमान को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती, स्थिरता और नए अवसरों की तस्वीर पेश करती है।

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जून तिमाही में वृद्धि दर 6.5 फीसदी रहने की उम्मीद

आरबीआई गवर्नर ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 के विकास अनुमानों की तुलना वित्त वर्ष 2024-25 में दर्ज 6.5 प्रतिशत आर्थिक विकास से की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जून तिमाही के लिए 6.5 प्रतिशत और सितंबर तिमाही के लिए 6.7 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान जताया है। वित्त वर्ष 26 की दिसंबर और मार्च तिमाहियों के लिए, जीडीपी वृद्धि क्रमशः 6.6 प्रतिशत और 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

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गवर्नर बोले- ब्याज दरों में कटौती से आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने शुक्रवार को बेंचमार्क नीति दर में 50 आधार अंकों की कटौती कर इसे 5.5 प्रतिशत कर दिया और कहा कि ब्याज दरों में अग्रिम कटौती से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, "चूंकि वैश्विक माहौल अनिश्चित बना हुआ है, इसलिए मूल्य स्थिरता के बीच घरेलू स्तर पर विकास पर ध्यान देना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। इसे देखते हुए, आज के फैसले को विकास को नए रास्ते पर ले जाने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जाना चाहिए।"

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वैश्विक चुनौतियों के बीच अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने की चुनौती: मल्होत्रा

हर दो महीने के अंतराल के बाद होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर ने इसके फैसलों का एलान किया। उन्होंने बताया कि पूंजी प्रवाह और विनिमय दरों में बढ़ती अस्थिरता के बीच, उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंकों के पास वैश्विक चुनौतियों के खिलाफ अपनी अर्थव्यवस्थाओं को स्थिर रखने कठिन जिम्मेदारी है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में दिक्कतों के बावजूद हमारी इकॉनमी मजबूत व स्थिर

उन्होंने कहा, "इस वैश्विक परिवेश में, भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती, स्थिरता और अवसर की तस्वीर पेश करती है... बुनियादी बातों का यह मैट्रिक्स भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक प्रभावों से बचाने और इसे तेज गति से बढ़ने के लिए आवश्यक ताकत प्रदान करता है।" मल्होत्रा ने विस्तार से बताते हुए कहा कि ताकत मजबूत बैलेंस शीट से आती है। इसके अलावा, तीनों मोर्चों - महंगाई, वित्तीय हालात और राजनीतिक परिदृश्य स्थिर हैं। लगातार बदल रहे वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में नीतिगत और आर्थिक स्थिरता प्रदान करते हैं। 

3डी निवेशकों को देता है बड़ा अवसर

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था 3डी- जनसांख्यिकी (Demography), डिजिटलीकरण (Digitalisation) और घरेलू मांग (Domestic Demand) निवेशकों को बड़े अवसर प्रदान करती है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल और बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत की वृद्धि दर उम्मीदों से कम बनी हुई है। इसलिए, विकास की गति को बढ़ाने के लिए नीतिगत उपायों के माध्यम से घरेलू निजी खपत और निवेश को प्रोत्साहित करना जारी रखना जरूरी है।

मानसून में अच्छी बारिश से ग्रामीण इलाकों में मांग बढ़ने की उम्मीद

मल्होत्रा ने कहा, "विकास और महंगाई के रुख में हालिया बदलाव के कारण न केवल नीतिगत ढील जारी रखने की जरूरत है, बल्कि इसे बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती भी आगे बढ़ानी होगी।" उन्होंने कहा कि आने वाले महीनो में सामान्य से अधिक दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश होने की उम्मीद है। इससे कृषि क्षेत्र व ग्रामीण इलाकों में मांग को और बढ़ावा मिल सकता है।

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