Inflation: आरबीआई ने मूल्य वृद्धि रोकने के लिए दर बढ़ाए, अगले वर्ष महंगाई छह फीसदी से नीचे आएगी
Inflation: बढ़ती मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई ने 30 सितंबर को रेपो दर को 5.9 प्रतिशत तक ले जाने के लिए लगातार तीसरी बार अल्पकालिक ऋण दर में 50 बीपीएस की वृद्धि की है। मई के बाद से इसने प्रमुख ब्याज दरों को 190 आधार अंकों तक बढ़ा दिया है।
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आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की सदस्य आशिमा गोयल ने बुधवार को कहा कि बार-बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी से महंगाई पर काबू पाने के रिजर्व बैंक के प्रयासों से मुद्रास्फीति पर काबू पाने में मदद मिलेगी, इसके अगले वर्ष छह फीसदी से नीचे आने की संभावना है।
गोयल ने आगे कहा कि नीतिगत दरों में बढ़ोतरी ने बड़े पैमाने पर महामारी के समय में की गई कटौती को पलट दिया है, लेकिन वास्तविक दर अब भी इतनी कम है कि अर्थव्यवस्था में विकास को नुकसान नहीं पहुंचे।
उन्होंने कहा, ‘दो-तीन तिमाहियों के अंतराल पर उच्च वास्तविक दरें अर्थव्यवस्था में मांग को कम कर देंगी। एमपीसी सदस्य ने एक टेलीफोनिक साक्षात्कार में मीडिया से कहा है कि, "वैश्विक मंदी के साथ अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी की कीमतें नरम हो रही हैं और आपूर्ति शृंखला की बाधाएं कम हो गई हैं।"
बता दें कि बढ़ती मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई ने 30 सितंबर को रेपो दर को 5.9 प्रतिशत तक ले जाने के लिए लगातार तीसरी बार अल्पकालिक ऋण दर में 50 बीपीएस की वृद्धि की है। मई के बाद से इसने प्रमुख ब्याज दरों को 190 आधार अंकों तक बढ़ा दिया है।
गोयल ने कहा, "भारत सरकार आपूर्ति पक्ष की मुद्रास्फीति को कम करने के लिए भी कार्रवाई कर रही है। मौजूदा अनुमानों से पता चलता है कि मुद्रास्फीति अगले साल 6 प्रतिशत से नीचे आ जाएगी।"
गौरतलब है कि केंद्रीय बैंक के लिए महंगाई दर को दो प्रतिशत से ऊपर और चार प्रतिशत से नीचे रखना अनिवार्य है।