Report: आरबीआई के नीतिगत फैसले से एनबीएफसी को मिली मजबूती, मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में दावा
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई के फैसले ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को बड़ी रहात दी है। आरबीआई ने ऑपरेशनल और उच्च गुणवत्ता वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए एनबीएफसी ऋण पर जोखिम भार कम करने का प्रस्ताव रखा है।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अक्तूबर के नीतिगत उपाय भारत की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए बड़ी राहत है। मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई का फैसला एनबीएफसी और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग सेक्टर के प्रति आरबीआई के सहायक रुख को दर्शाते हैं।
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रिपोर्ट में बताया गया है कि आरबीआई ने फाइनल रेगुलेशंस में बैंक और उसकी समूह इकाइयों द्वारा किए जाने वाले व्यवसायों में ओवरलैप पर प्रस्तावित प्रतिबंध को हटा दिया है। ये रेगुलेशंस जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। इसमें कहा गया है कि हम मानते हैं कि यह हमारे कवरेज में आने वाले बैंक प्रमोटेड एनबीएफसी के लिए सकारात्मक संकेत है।
आरबीआई ने एनबीएफसी ऋण पर जोखिम भार कम करने का प्रस्ताव रखा
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई ने ऑपरेशनल और उच्च गुणवत्ता वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए एनबीएफसी ऋण पर जोखिम भार कम करने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग की लागत घटाने और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और REC जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर-फोकस्ड NBFCs को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि PFC और REC अच्छी तरह से पूंजीकृत और आत्मनिर्भर व्यवसाय हैं, इसलिए इस कदम से संरचनात्मक रूप से सकारात्मक असर होगा, लेकिन तत्काल वित्तीय लाभ सीमित रह सकता है।
आरबीआई का फैसला का असर
इसके साथ ही, आरबीआई की ये पहल मुख्य सेक्टर्स जैसे हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को क्रेडिट फ्लो सुनिश्चित करते हुए संतुलित नियामक दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। ये कदम NBFC क्षेत्र में निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने और बैंक-प्रमोटेड संस्था-यों के लिए रणनीतिक लचीलापन बढ़ाने में मदद करेंगे।
वहीं, 1 अक्तूबर को मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा। इसके साथ, स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर 5.25 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) और बैंक रेट 5.75 प्रतिशत पर स्थिर हैं।
जानकारी के अनुसार, SDF दर वह ब्याज दर है जो RBI बैंकों को उनके अधिशेष अनकोलैटरलाइज्ड फंड पर ओवरनाइट जमा करने पर देती है, जबकि MSF दर वह दंडात्मक ब्याज दर है जो बैंक ओवरनाइट लिक्विडिटी के लिए RBI से उधार लेते समय चुकाते हैं, खासकर जब इंटर-बैंक मार्केट में
फंड उपलब्ध नहीं होता।