RBI MPC: ब्याज दरों पर विराम लेकिन सुधारों को रफ्तार; एमएसएमई की लोन लिमिट दोगुनी, जानिए पॉलिसी की दिशा किधर
RBI Monetary Policy: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा गया है, लेकिन ग्राहकों को बड़ी सुरक्षा मिली है। डिजिटल फ्रॉड पर 25,000 रु. तक मुआवजा और एमएसएमई को मिली लोन लिमिट दोगुनी करने की बात कही गई है। पढ़ें इस की पॉलिसी की दिशा किस ओर है?
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भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी फरवरी की मौद्रिक नीति समीक्षा में भले ही रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का फैसला किया है, लेकिन केंद्रीय बैंक ने वित्तीय प्रणाली में सुधारों का बड़ा 'बूस्टर डोज' दिया है। शुक्रवार को नीतिगत दरों को स्थिर रखते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ग्राहक संरक्षण और छोटे कारोबारियों के लिए खजाना खोल दिया। आरबीआई ने जहां डिजिटल फ्रॉड के शिकार ग्राहकों के लिए 25,000 रुपये तक के मुआवजे का प्रस्ताव रखा है, वहीं रियल एस्टेट और एनबीएफसी सेक्टर के लिए नियमों को आसान बनाकर विकास को गति देने की बड़ी पहल की है।
ग्राहक संरक्षण पर आरबीआई का फोकस
ग्राहक संरक्षण को मजबूत करते हुए डिजिटल भुगतान सुरक्षा बढ़ाने और वित्तीय उत्पादों को गलत तरह से बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए कई उपायों की घोषणा की है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि इस जल्द ही गाइडलाइन पेश की जाएगी साथ ही इसको रोकने के लिए कई तरह से काम किया जा रहा है। वे ग्राहक जो अपने पैसों को धोखाधड़ी की वजह से खो देते हैं, हम उनको फौरीराहत के तौर पर बहुत छोटी राशि देने की योजना है। यह राशि ग्राहक को केवल एक बार ही दी जाएगी। गवर्नर ने कहा कि छोटे मूल्य के धोखाधड़ी वाले लेनदेन में हुए नुकसान के लिए ग्राहकों को 25,000 रुपये तक का मुआवजा देने के लिए एक ढांचा भी प्रस्तावित किया है।
गलत वित्तीय उत्पादों की बिक्री को रोकने, ऋण , ऋण वसूली और वसूली एजेंटों की नियुक्ति से संबंधित और अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहकों की देयता को सीमित करने से संबंधित तीन मसौदा दिशानिर्देश जारी करने की योजना बनाई गई है। गवर्नर ने कहा डिजिटल धोखाधड़ी को लेकर बढ़ती चिंताओं को दूर करने के लिए, केंद्रीय बैंक डिजिटल भुगतान सुरक्षा में सुधार पर एक चर्चा पत्र जारी करेगा। उन्होंने कहा कि इन उपायों में विलंबित क्रेडिट और अतिरिक्त प्रमाणीकरण शामिल हो सकते हैं, खासकर वरिष्ठ नागरिकों जैसे कमजोर उपयोगकर्ताओं के लिए होगा।
एमएसएमई और रियल एस्टेट के लिए अधिक ऋण
एमएसएमई को लाभ पहुंचाने के लिए आरबीआई ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए बिना गारंटी वाले ऋणों की सीमा को दोगुना करने का प्रस्ताव दिया है। वर्तमान में 10 लाख रुपये की सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। संपत्ति बाजार के लिए वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिए, बैंकों को विवेकपूर्ण सुरक्षा उपायों के अधीन रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) को ऋण देने की भी अनुमति दी जाएगी।
गैर-वित्तीय कंपनियों के लिए आसान नियम
आरबीआई ने कुछ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए अनुपालन बोझ को कम करने के लिए भी कदम उठाने की घोषणा की। गवर्नर ने कहा जिन एनबीसी के पास सार्वजनिक निधि और ग्राहक संपर्क नहीं है, और जिनकी परिसंपत्ति का आकार 1,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है, उन्हें पंजीकरण की आवश्यकता से छूट देने का प्रस्ताव है। मल्होत्रा ने कहा कि एनबीसी क्षेत्र की समग्र स्थिति मजबूत बनी हुई है। अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की पूंजी पर्याप्तता, तरलता, परिसंपत्ति गुणवत्ता और लाभप्रदता से संबंधित प्रणाली-स्तरीय वित्तीय मापदंड भी मजबूत बने हुए हैं।
ग्रामीण बैंकों को बढ़ावा दिया जाएगा
आरबीआई ने प्रमुख वित्तीस समावेशन योजननाओं की समीक्षा की है, जिसमें लीड बैंक योजना (एलबीएस), किसान क्रेडिट कार्ड योजना (केसीसी) और बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) मॉडल शामिल हैं। आरबीआई इसके संबंध में संशोधित दिशा निर्देश मसौदा जारी करेगा।