RBI Big Relief: छोटे कारोबारियों को अब बिना गारंटी 20 लाख रुपये तक का लोन, 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे नए नियम
आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि MSE सेक्टर को 20 लाख रुपये तक का लोन बिना गारंटी के दिया जाए। अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड पर यह सीमा 25 लाख रुपये होगी। जानें कब से लागू होंगे नियम।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश के सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) को बड़ी राहत देते हुए सोमवार को एक अहम फैसला सुनाया है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों को साफ निर्देश दिया है कि वे एमएसई सेक्टर की इकाइयों को 20 लाख रुपये तक के लोन बिना किसी गारंटी के प्रदान करें। यह कदम छोटे कारोबारियों की नकदी की समस्या को दूर करने और उनके विकास को गति देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
क्या है आरबीआई का नया आदेश?
सोमवार को जारी एक अधिसूचना में आरबीआई ने कहा है कि बैंकों को एमएसई सेक्टर की इकाइयों को दिए जाने वाले 20 लाख रुपये तक के ऋण के मामले में कोई भी कोलेटरल सिक्योरिटी स्वीकार नहीं करनी चाहिए। यह नियम न केवल सामान्य एमएसई इकाइयों पर लागू होगा, बल्कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत वित्तपोषित इकाइयों को भी इसका लाभ मिलेगा।
आरबीआई के सर्कुलर के अनुसार, "बैंकों को सलाह दी जाती है कि वे खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा प्रशासित पीएमईजीपी के तहत वित्तपोषित सभी इकाइयों को भी 20 लाख रुपये तक का बिना गारंटी वाला लोन प्रदान करें"।
अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड पर 25 लाख तक की सीमा आरबीआई ने बैंकों को कुछ लचीलापन भी प्रदान किया है। यदि किसी एमएसई इकाई का वित्तीय रिकॉर्ड मजबूत है, तो बैंक अपनी आंतरिक नीति के आधार पर इस सीमा को बढ़ा सकते हैं।
- अच्छी वित्तीय स्थिति: अधिसूचना में कहा गया है कि बैंक एमएसई इकाइयों के अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड और वित्तीय स्थिति के आधार पर बिना गारंटी वाले लोन की सीमा को 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये तक कर सकते हैं।
- क्रेडिट गारंटी योजना: बैंक जहां लागू हो, वहां क्रेडिट गारंटी योजना कवर का लाभ उठा सकते हैं।
स्वैच्छिक रूप से सोना गिरवी रखने की छूट कई बार छोटे कारोबारी लोन जल्दी प्राप्त करने के लिए अपनी मर्जी से संपत्ति गिरवी रखना चाहते हैं। इस पर स्पष्टता देते हुए आरबीआई ने कहा है कि यदि कोई उधारकर्ता अपनी स्वेच्छा से सोना या चांदी बतौर कोलेटरल बैंकों के पास गिरवी रखता है, तो इसे इस जनादेश का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। यानी, 20 लाख रुपये तक की सीमा के भीतर भी अगर कोई अपनी मर्जी से गोल्ड लोन लेना चाहे, तो बैंक उसे स्वीकार कर सकते हैं।
कब से लागू होंगे नियम?
यह नया संशोधन तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा। आरबीआई ने इसके लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों को तैयारी का समय दिया है। यह नियम 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद स्वीकृत या नवीनीकृत किए जाने वाले सभी एमएसई लोन्स पर लागू होगा।
आरबीआई का यह कदम भारत के एमएसएमई सेक्टर के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है, जिसे अक्सर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। बिना गारंटी के लोन मिलने से छोटे उद्यमियों को पूंजी जुटाने में आसानी होगी और वे अपनी गिरवी रखने योग्य संपत्ति का उपयोग अन्य बड़े निवेशों के लिए कर सकेंगे। 2026 से लागू होने वाले इस नियम से बैंकिंग प्रणाली में छोटे कर्जदारों के प्रति विश्वास बढ़ने की उम्मीद है।