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RBI: रेपो रेट में बदलाव नहीं, FY25 में 4.5% रहेगी मुद्रास्फीति, GDP 7% रहने की उम्मीद, ये हैं MPC की खास बातें

Fri, 05 Apr 2024 02:48 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 05 Apr 2024 02:48 PM IST
सार

RBI MPC: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 4.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा। यह पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के 5.4 प्रतिशत के अनुमान से कम है।

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RBI MPC Meeting Key Outcome, Major Announcement from RBI Governor Shaktikant Das
RBI MPC - फोटो : Social Media

विस्तार

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की लगातार सातवीं बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। एमपीसी ने इसे 5:1 के बहुमत के आधार पर 6.5% पर ही बरकरार रखा है। आइए विस्तार से समझें महंगाई और विकास दर पर केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने एमपीसी की बैठक के क्या-क्या कहा?

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वित्तीय वर्ष 24-25 के लिए महंगाई दर का अनुमान 4.5% पर बरकरार रखा गया 
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 4.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा। यह पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के 5.4 प्रतिशत के अनुमान से कम है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पेश करते हुए कहा कि इस वर्ष मानसून की स्थिति को सामान्य मानते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति के 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पहली तिमाही में मुद्रास्फीति के 4.9 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 3.8 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 4.6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.5 प्रतिशत रहने की संभावना है।
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2024-25 के लिए वृद्धि दर का अनुमान सात प्रतिशत पर कायम रखा गया
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर के अनुमान को सात प्रतिशत पर बरकरार रखा है। यह 2023-24 के लिए 7.6 प्रतिशत के अनुमान से कम है। आरबीआई ने अपनी फरवरी की मौद्रिक नीति में एक अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर सात प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।
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चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर शक्तिकान्त दास ने कहा कि ग्रामीण मांग गति पकड़ रही है और विनिर्माण क्षेत्र में निरंतर वृद्धि से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलना चाहिए।हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार मार्ग में व्यवधान से कुछ दिक्कतें आ सकती हैं।

दास ने कहा कि देश की सकल घरेलू उत्पाद की वास्तविक वृद्धि दर 2024-25 में सात प्रतिशत रहने का अनुमान है। जून तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर सात प्रतिशत, सितंबर तिमाही में 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था के सात प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। इससे पहले इसी सप्ताह की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि रिजर्व बैंक को वृद्धि को ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’ देते हुए भरोसे और स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए।

यूपीआई के जरिए कैश डिपोजिट मशीन में नकद जमा करने का प्रस्ताव 
अब कैश डिपॉजिट मशीन (सीडीएम) के माध्यम से नकदी जमा करने के लिए मुख्य रूप से डेबिट कार्ड का उपयोग किया जाता है। एटीएम में यूपीआई का उपयोग करके कार्ड-रहित नकद निकासी से प्राप्त अनुभवों को देखते हुए, अब यूपीआई का उपयोग करके सीडीएम में नकदी जमा करने की सुविधा भी प्रदान करने का प्रस्ताव है। यह उपाय ग्राहकों की सुविधा को और बढ़ाएगा और बैंकों में मुद्रा हैंडलिंग प्रक्रिया को और अधिक कुशल बनाएगा।

सरकारी प्रतिभूति बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी के लिए RBI लाएगा मोबाइल एप
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) सरकारी प्रतिभूति बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी को सुगम बनाने के लिए जल्द ही एक मोबाइल ऐप पेश करेगा। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए यह प्रस्ताव किया।

नवंबर, 2021 में पेश की गई आरबीआई की रिटेल ‘डायरेक्ट स्कीम’ व्यक्तिगत निवेशकों को केंद्रीय के साथ गिल्ट खाते बनाए रखने और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने की सुविधा प्रदान करती है। यह योजना निवेशकों को प्राथमिक नीलामी में प्रतिभूतियों को खरीदने के साथ-साथ एनडीएस-ओएम मंच के जरिये प्रतिभूतियों को खरीदने/बेचने में सक्षम बनाती है।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि इस पहुंच को और सुगम तथा बेहतर बनाने के लिए रिटेल ‘डायरेक्ट पोर्टल’ की एक मोबाइल ऐप बनाई जा रही है। यह ऐप निवेशकों को अपनी सुविधानुसार, चलते-फिरते उपकरण खरीदने और बेचने में सक्षम बनाएगा। ऐप शीघ्र ही उपयोग के लिए उपलब्ध होगा।


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर रेपो में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा। महंगाई को चार प्रतिशत पर लाने और वैश्विक अनिश्चितता के बीच आर्थिक वृद्धि को गति देने के मकसद से नीतिगत दर को यथावत रखा गया है। यह लगातार सातवां मौका है जबकि रेपो दर में बदलाव नहीं किया गया है।

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