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आरबीआई गवर्नर ने कहा: अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित होंगे सभी देश; भारतीय अर्थव्यवस्था पर कम होगा असर

Thu, 10 Apr 2025 04:19 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Thu, 10 Apr 2025 04:19 AM IST
सार

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक की जानकारी देते हुए कहा, भारत के कुल निर्यात का जीडीपी में 12 फीसदी योगदान है, जबकि अमेरिका को होने वाला निर्यात 2 फीसदी से भी कम है।

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RBI Governor says All countries will be affected by US tariffs; Indian economy will be less affected
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिका के जवाबी टैरिफ लगाने के बाद व्यापार युद्ध गहराने की चिंता ने सभी क्षेत्रों में आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। ट्रंप टैरिफ से न सिर्फ दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ेगा, बल्कि निर्यात और महंगाई के लिए भी नई चुनौतियों के साथ जोखिम पैदा हुए हैं। हालांकि, भारत पर टैरिफ का असर कई अन्य देशों की तुलना में कम होगा।
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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक की जानकारी देते हुए कहा, भारत के कुल निर्यात का जीडीपी में 12 फीसदी योगदान है, जबकि अमेरिका को होने वाला निर्यात 2 फीसदी से भी कम है। इसके उलट, चीन की जीडीपी में उसके निर्यात का हिस्सा करीब 19 फीसदी, जर्मनी का 37 फीसदी और यूरोपीय संघ (ईयू) का 30 फीसदी से ज्यादा है। इसी प्रकार, ताइवान और ईरान जैसे देशों से होने वाले निर्यात का उनकी जीडीपी में अधिक योगदान है।
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इसके अलावा, टैरिफ भारत के लिए कम महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका के साथ हमारा व्यापार अधिशेष अन्य देशों से कम है। यह भारत को अमेरिकी टैरिफ के संदर्भ में तुलनात्मक लाभ देता है। हालांकि, यह सच है कि टैरिफ वृद्धि दर को धीमा कर सकता है।  
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गवर्नर ने कहा, दुनिया में मची उथल-पुथल के बीच अमेरिकी डॉलर में गिरावट आई है। बॉन्ड पर रिटर्न घटा है। शेयर बाजारों में गिरावट आ रही है। क्रूड करीब चार साल के निचले स्तर पर आ गया है। ऐसे हालात में केंद्रीय बैंक प्राथमिकताओं के आधार पर सतर्कतापूर्वक काम कर रहे हैं।

शुल्क युद्ध के महंगाई से ज्यादा वृद्धि पर प्रभाव को लेकर चिंता
जहां तक भारत पर अमेरिकी शुल्क के प्रभाव का सवाल है, हमने अपना आकलन दे दिया है। हमने 2025-26 के लिए वृद्धि दर अनुमान में 0.20 फीसदी की कमी की है। इसका प्रमुख कारण वैश्विक अनिश्चितता है। शुल्क युद्ध का महंगाई की तुलना में आर्थिक वृद्धि पर असर को लेकर चिंता ज्यादा है। 

यूपीआई : ग्राहक अब कर सकेंगे ज्यादा भुगतान
आरबीआई ने भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) को यूपीआई के जरिये ‘पर्सन-2-मर्चेंट (पी2एम) लेनदेन की सीमा बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय बैंक के इस कदम के बाद यूपीआई के जरिये बड़े भुगतान का रास्ता खुल गया है। हालांकि, पर्सन-2-पर्सन (पी2पी) यूपीआई लेनदेन की सीमा पहले की तरह एक लाख रुपये ही रहेगी। यानी एक व्यक्ति यूपीआई के जरिये किसी दूसरे शख्स को एक बार में अधिकतम एक लाख रुपये ही भेज सकता है।

वर्तमान में व्यक्ति से कारोबारियों (पी2एम) को लेनदेन के तहत ग्राहक पूंजी बाजार और बीमा जैसे मामलों में एक बार में अधिकतम दो लाख रुपये का भुगतान कर सकता है। वहीं, टैक्स, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए भुगतान सीमा पांच लाख रुपये है।

गवर्नर ने कहा, अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुसार एनपीसीआई, बैंकों और यूपीआई परिवेश से जुड़े अन्य पक्षों के परामर्श से उपयोगकर्ता की बदलती जरूरतों के आधार पर यूपीआई सीमा में संशोधन कर सकता है।बैंकों को एनपीसीआई की घोषित सीमाओं के भीतर अपनी आंतरिक लिमिट तय करने का विवेकाधिकार बना रहेगा। ऊंची सीमा से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए उचित सुरक्षा उपाय किए जाएंगे।


रेपो दर : दिसंबर तक 0.50 फीसदी और घटने की उम्मीद
आरबीआई के उदार रुख को देखते हुए अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दिसंबर, 2025 तक रेपो दर में 0.50 फीसदी की और कटौती हो सकती है। इससे यह मौजूदा 6 फीसदी से घटकर 5.5 फीसदी रह जाएगी।
  •  कोटक महिंद्रा बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज ने कहा, वैश्विक उथल-पुथल बढ़ रही है, जिसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इससे निपटने के लिए आरबीआई को रेपो दर में और कटौती करनी होगी। इस साल एक फीसदी और कटौती की गुंजाइश दिख रही है।
  • एचएसबीसी म्यूचुअल फंड के सीआईओ (फिक्स्ड इनकम) श्रीराम रामनाथन ने कहा, आरबीआई अब मानता है कि मुख्य महंगाई का 4 फीसदी का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इससे केंद्रीय बैंक को अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने की गुंजाइश मिलती है। हमें उम्मीद है कि 2025 के अंत तक रेपो दर घटकर 5.5 फीसदी रह जाएगी।
विदेशी मुद्रा भंडार : पांच महीने के उच्च स्तर पर
आरबीआई ने बताया, देश का विदेशी मुद्रा भंडार 4 अप्रैल तक 10.9 अरब डॉलर बढ़कर 676.3 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पांच महीने का सर्वाधिक स्तर है। यह भंडार लगातार पांचवें सप्ताह बढ़ा है।

अमेरिका को 2024 में 33 अरब डॉलर का निर्यात
  • भारत ने 2024 में अमेरिका को करीब 33 अरब डॉलर की वस्तुओं का निर्यात किया है। इनमें सर्वाधिक 8.1 अरब डॉलर के फार्मा उत्पादों का निर्यात शामिल है।
  • 6.5 अरब डॉलर के दूरसंचार उपकरणों, 5.3 अरब डॉलर की कीमती पत्थरों, 4.1 अरब डॉलर के पेट्रोलियम उत्पादों का भी निर्यात किया गया है।   
  • भारत ने 2024 में अमेरिका से 4.5 अरब डॉलर के क्रूड समेत 18.1 अरब डॉलर के उत्पादों का आयात किया है।

जीडीपी के लिए कुछ अच्छे संकेत, 6.5 फीसदी रहेगी वृद्धि दर
आरबीआई गवर्नर ने कहा, वैश्विक चुनौतियों के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए कुछ अच्छे संकेत भी दिख रहे हैं। जलाशयों की बेहतर स्थिति और चालू वित्त वर्ष में फसल उत्पादन अच्छा रहने के अनुमान से कृषि क्षेत्र की संभावनाएं उज्ज्वल हैं। विनिर्माण गतिविधियों में सुधार है। कारोबारी उम्मीदें मजबूत हैं। सेवा क्षेत्र भी जुझारू प्रदर्शन कर रहा है। निवेश गतिविधियों में तेजी आई है। उच्च क्षमता उपयोग के साथ सरकार बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ा रही है। बैंकों एवं कंपनियों के बेहतर बही-खाते और वित्तीय स्थितियों में सुधार से निवेश बढ़ने की उम्मीद है।

इसे भी पढ़ें- Tariff War: ट्रंप बोले- अमेरिका में लूट नामंजूर, चीन पर 125% टैरिफ लगेगा; 75 देशों को टैरिफ से 90 दिन की राहत 

खुदरा महंगाई : पहली तिमाही में चार फीसदी से नीचे आ जाएगी
मल्होत्रा ने कहा, बेहतर कृषि उत्पादन और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को देखते हुए खुदरा महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में खुदरा महंगाई 3.6 फीसदी रह सकती है। दूसरी तिमाही में इसके 3.9 फीसदी, तीसरी तिमाही में 3.8 फीसदी और चौथी तिमाही के दौरान 4.4 फीसदी रहने का अनुमान है।

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