फिच ने लगातार 13वें साल ‘बीबीबी-’ पर बरकरार रखी रेटिंग, खराब वित्तीय हालत का दिया हवाला
रेटिंग एजेंसी फिच ने कमजोर वित्तीय स्थिति जारी रहने का हवाला देते हुए भारत की संप्रभु रेटिंग बीबीबी माइनस रखी है, जो निचले निवेश ग्रेड की है। इसके साथ ही फिच ने भारत का परिदृश्य सकारात्मक रखा है।
यह लगातार 13वां ऐसा वर्ष है, जब फिच ने भारत की रेटिंग बीबीबी माइनस रखी है। इससे पहले फिच ने एक अगस्त, 2006 को भारत की रेटिंग स्थिर परिदृश्य के साथ बीबी प्लस से घटाकर बीबीबी माइनस की थी। फिच ने एक बयान में कहा कि भारत की रेटिंग उच्च सार्वजनिक कर्ज, कमजोर वित्तीय क्षेत्र, कुछ पिछड़े संरचनात्मक कारक और मजबूत मध्यावधि वृद्धि परिदृश्य, मजबूत विदेशी बफर रिजर्व के बीच संतुलन स्थापित करती है।
एजेंसी ने आगे कहा कि मजबूत वृद्धि परिदृश्य से निरंतर भारत के क्रेडिट प्रोफाइल को समर्थन मिलता है। सरकारी खर्च के साथ मौद्रिक नीति और बैंकों के मानकों में रियायत के आधार पर फिच मौजूदा वित्त वर्ष में 6.8 फीसदी की वृद्धि और अगले में 7.1 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद कर रही है।
फिच ने कहा कि देश में आम चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई, 2019 को हो रहा है। इसके कारण नीति एजेंडा को लेकर कुछ अस्थायी अनिश्चितता है। पिछले 30 साल विभिन्न राजनीतिक विचारधारा की सरकारों ने आम तौर पर सुधारों को आगे बढ़ाया है।
फिच ने एक बयान में कहा, ‘‘भारत की रेटिंग उच्च सार्वजनिक कर्ज, कमजोर वित्तीय क्षेत्र तथा संरचनात्मक सुधारों के मोर्चे पर पीछे रहने के मुकाबले एक मजबूत मध्यम अवधि वृद्धि परिदृश्य तथा सुदृढ़ विदेशी मुद्रा भंडार के कारण अपेक्षाकृत बाह्य मजबूती संतुलित करती है।’’
मजबूत वृद्धि परिदृश्य भारत के वित्तीय साख रूपरेखा को मदद करता रहेगा। फिच को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक की नरम मौद्रिक नीति, बैंक नियमन में ढील तथा सरकारी खर्च से चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत तथा अगले वित्त वर्ष में 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रेटिंग एजेंसी ने देश की साख (इश्यूर डिफाल्ट रेटिंग) को स्थिर परिदृश्य के साथ ‘बीबीबी-’ पर बरकरार रखते हुए कहा, ‘कमजोर राजकोषीय स्थिति भारत की सरकारी साख के लिये बाधा बनी हुई है। इस संदर्भ में नई सरकार की मध्यम अवधि की राजकोषीय नीति का रेटिंग नजरिये से विशेष महत्व होगा।’