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केरल-कर्नाटक के बाद पंजाब बनेगा चंदन की खेती का हब, किसानों को होगी 6 करोड़ की कमाई

Mon, 27 Nov 2017 12:06 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 27 Nov 2017 12:06 PM IST
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Punjab will become hub of sandalwood farming, farmers to earn 6 crore rupees
- फोटो : AmarUjala
गेहूं-धान फसल चक्र से जमीन को हो रहे नुकसान, पराली से आम आदमी के घुट रहे दम, आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या जैसी समस्याओं से जूझ रहे किसानों को चंदन की खेती खुशहाली का नया रास्ता दिखा रही है।
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पंजाब में चंदन की खेती के ट्रायल भी पास हो गए हैं। यहां पैदा किए जा रहे चंदन में नेचुरल ग्रोअर केरल एवं कर्नाटक के बाद ऑयल कंटेंट की मात्रा 2.80 से तीन फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर है। 
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सूबे में चंदन की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रोग्रेसिव चंदन फार्मर्स एसोसिएशन (पीसीएफए) ने बाकायदा एक लाख पौधे की नर्सरी तैयार कर ली है। अब पंजाब के किसानों को जागरूक करके उन्हें इस तरफ  मोड़ा जा रहा है।
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एसोसिएशन का दावा है कि प्रति एकड़ चंदन की खेती कर12 साल बाद छह करोड़ रुपये कमाए जा सकते हैं, जबकि इसी दौरान खेत की खाली जगह में आंवला, मेलिया, धुबिया और सब्जियां उगाकर भी मोटा मुनाफा अलग से आ सकता है।

केरल, कर्नाटक चंदन उत्पादन में अग्रणी
देश में चंदन की खेती के मुख्य राज्य केरल एवं कर्नाटक हैं। लेकिन अब अन्य राज्यों में भी इसके ट्रायल हो रहे हैं। केरल में चंदन का ऑयल कंटेंट चार फीसदी और कर्नाटक में तीन फीसदी है, जबकि इसके बाद पंजाब में 2.80 से तीन फीसदी, ओडिशा में ढाई फीसदी, महाराष्ट्र में दो फीसदी, मध्यप्रदेश में डेढ़ फीसदी और राजस्थान में डेढ़ फीसदी तक है।

स्पष्ट है कि पंजाब में चंदन की खेती की अपार संभावनाएं हैं और सूबा इसमें अग्रणी बन सकता है। चंदन की व्यावसायिक खेती कर पंजाब में भी ऑयल कंटेंट तीन फीसदी तक आसानी से लाया जा सकता है। रूटीन फसलें पैदा करने के साथ-साथ किसान अपने खेत के चारों तरफ  की बट पर भी प्रति एकड़ अस्सी पेड़ लगाकर आमदनी बढ़ा सकता है।

पंजाब की जलवायु के अनुकूल बीज हुए तैयार

Punjab will become hub of sandalwood farming, farmers to earn 6 crore rupees
sandalwood
प्रोग्रेसिव चंदन फार्मर्स एसोसिएशन के चेयरमैन अरुण खुरमी का कहना है कि पहले किसान केरल, कर्नाटक जैसे राज्यों से चंदन के बीज लाकर खेती का प्रयास कर रहे थे, लेकिन यह उतना सफल नहीं हुआ। अब एसोसिएशन ने पंजाब की मिट्टी एवं जलवायु के अनुकूल बीज सूबे में ही तैयार किया है।

एक लाख पौधे की नर्सरी के जरिये इसे प्रोमोट किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रति एकड़ में चंदन के 225 पेड़ लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा, 115 आंवला के पेड़ और 418 मेलिया धुबिया के पेड़ भी लगाए जा सकते हैं। इन सबके बीच सब्जियां एवं अन्य फसलें पैदा की जा सकती हैं।

12 साल बाद छह करोड़ की आमदनी
अरुण का कहना है कि चंदन की लकड़ी, टहनियां, पत्ते, छिलके से लेकर इसकी मिट्टी तक बिकती है। चंदन की लकड़ी का आज का दाम करीब 12 हजार रुपये प्रति किलो है। इसका बाहरी छिलका 1,500 रुपये प्रति किलो बिकता है। इसकी जड़ों से निकलने वाला तेल तीन लाख रुपये प्रति किलो है।

प्रति पौधा केवल 15 ग्राम तेल निकलता है। इसकी टहनियों, पत्तों से सौंदर्य उत्पाद और मिट्टी धूपबत्ती इत्यादि बनाने के काम आती है। प्रति एकड़ 12 साल बाद छह करोड़ की आमदनी के अलावा, किसान इसी खेत में पैदा किए आंवले एवं मेलिया धुबिया से प्रति साल पांच लाख की कमाई कर सकता है। जबकि सब्जियों से कमाई अतिरिक्त होगी।
 
चंदन की खेती में अपार संभावनाएं
प्रोग्रेसिव चंदन फार्मर्स एसोसिएशन के अरुण खुरमी के अनुसार, देश में प्रति माह दो हजार क्विंटल चंदन की लकड़ी की मांग है, जबकि उपलब्धता केवल सौ क्विंटल ही है। ऐसे में पंजाब में इस खेती में अपार संभावनाएं हैं। एसोसिएशन किसानों के बीच पहुंच कर इसकी खेती को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रहा है।
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