Prosus Deal: Billdesk के 38,400 करोड़ रुपये के अधिग्रहण से पीछे हटी डच कंपनी PayU, जानें पूरा मामला
Prosus Deal: प्रोसस कंपनी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि डील की कुछ शर्तों को सितंबर तक की समयसीमा के भीतर पूरा नहीं किया गया इसलिए उसने इस सौदे को निरस्त कर दिया है। डील के लिए पहले से निर्धारित शर्तों में एक भारतीय प्रतिस्पर्धी आयोग की स्वीकृति को भारतीय कंपनी ने पांच सितंबर को हासिल कर लिया था।
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प्रोसस एनवी नामक कंपनी जिसके पास पे यू (PayU) नाम की कंपनी का स्वामित्व है, उसने सौदे की शर्तों को पूरा नहीं करने के कारण भारतीय भुगतान फर्म बिलडेस्क के अधिग्रहण से जुड़ी 4.7 बिलियन अमरीकी डालर (लगभग 38,400 करोड़ रुपये) की डील से पीछे हटने का फैसला किया है।
एक बयान में कंपनी की ओर से कहा गया है कि डील की कुछ शर्तों को सितंबर तक की समयसीमा के भीतर पूरा नहीं किया गया इसलिए उसने इस सौदे को निरस्त कर दिया है। डील के लिए पहले से निर्धारित शर्तों में एक भारतीय प्रतिस्पर्धी आयोग की स्वीकृति को भारतीय कंपनी ने पांच सितंबर को हासिल कर लिया था।
हालांकि, प्रोसस की ओर से यह नहीं बताया गया कि और कौन सी शर्तें समय सीमा के भीतर पूरी नहीं की गईं। यह यह डील पूरी हो जाती तो डच कंपनी ई-कॉमर्स के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण होता।
बता दें कि प्रोसस ने पिछले साल 31 अगस्त को अपने पेमेंट गेटवे पेयू की छत्रछाया में भारत के उभरते फिनटेक क्षेत्र में अपना विस्तार करने के लिए बिलडेस्क के अधिग्रहण की घोषणा की थी।
बिलडेस्क की स्थापना 2000 में एम एन श्रीनिवासु, अजय कौशल और कार्तिक गणपति ने की थी। देश में इंटरनेट और स्मार्टफोन का इस्तेमाल बढ़ने से बिलडेस्क का कारोबार भी हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है। इस सौदे के संपन्न होने की स्थिति में बिलडेस्क के संस्थापकों को करीब 50-50 करोड़ डॉलर मिलते।