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RBI: हमारे पास 11 महीने के निर्यात को कवर करने जितना विदेशी मुद्रा भंडार, बोले आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा

Mon, 25 Aug 2025 02:27 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 25 Aug 2025 02:27 PM IST
सार

RBI: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने केंद्रीय बैंक के विनियमों की समीक्षा के लिए एक नियामक समीक्षा प्रकोष्ठ बनाने की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा है कि देश के पास 11 महीनों के निर्यात को कवर करने केलिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

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Proposed Regulatory Review Cell will review all regulations at least once in 5-7 years: RBI Guv
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा - फोटो : PTI

विस्तार

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 11 महीने के व्यापारिक निर्यात को कवर करने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत है, इससे अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों के खिलाफ सुरक्षा मिलेगी।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को मुंबई में वार्षिक बैंकिंग सम्मेलन एफआईबीएसी 2025 में यह बात कही।

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उन्होंने कहा, "हमारे पास बहुत मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार है, हमारे पास उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 695 बिलियन डॉलर है। यह 11 महीने के व्यापारिक निर्यात को कवर करने के लिए पर्याप्त है।" यह ध्यान देने देने वाली बात है कि आरबीआई आमतौर पर विदेशी मुद्रा भंडार को आयात के आधार पर मापता है, निर्यात के आधार पर नहीं।

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आरबीआई के नियमों की समीक्षा के लिए बनेगा प्रकोष्ठ

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने केंद्रीय बैंक के नियमों यानी विनियमों की समीक्षा के लिए एक नियामक समीक्षा प्रकोष्ठ बनाने की बात कही है। आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि प्रस्तावित प्रकोष्ठ 5-7 वर्षों में कम से कम एक बार सभी विनियमों की समीक्षा करेगा। मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक मूल्य स्थिरता व आर्थिक विकास के उद्देश्य से मौद्रिक नीति का संचालन जारी रखेगा। मल्होत्रा ने कहा कि हम वित्तीय स्थिरता को मजबूत करना जारी रखेंगे, यह हमारा प्राथमिक उद्देश्य है।

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एफआईबीएसी 2025 में बोलते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई बैंक ऋण बढ़ाने के उपायों की जांच कर रहा है। भारतीय वाणिज्य व उद्योग महासंघ (फिक्की) और भारतीय बैंक संघ (आईबीए)  संयुक्त रूप से  25 और 26 अगस्त 2025 को मुंबई के नरीमन पॉइंट स्थित होटल ट्राइडेंट में वार्षिक बैंकिंग सम्मेलन, एफआईबीएसी 2025 का आयोजन कर रहा है। एफआईबीएसी 2025 का प्रस्तावित विषय है- "नए आयाम स्थापित करना।"  बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) इस सम्मेलन का ज्ञान भागीदार है।

विनियमित संस्थाएं ग्राहकों के लाभ के लिए प्रोद्योगिकी में करें निवेश

एफआईबीएसी 2025 के दौरान बोलते हुए गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई को उम्मीद है कि विनियमित संस्थाएं ग्राहकों के लाभ के लिए प्रौद्योगिकी में निवेश करेंगी। अस्थिर वैश्विक आर्थिक माहौल पर बोलते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि हमें इससे आगे बढ़ते हुए विकास की सीमाओं का विस्तार करने की जरूरत है।

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को बैंकों और कंपनियों से एक साथ आने और निवेश चक्र बनाने के लिए उत्साह बढ़ाने को कहा। उन्होंने कहा कि देश अस्थिर वैश्विक आर्थिक माहौल से गुजर रहा है। वार्षिक बैंकिंग सम्मेलन 'एफआईबीएसी 2025' में अपने उद्घाटन भाषण में गवर्नर ने कहा कि आरबीआई उभरते क्षेत्रों सहित बैंक ऋण का विस्तार करने के उपायों की जांच कर रहा है।

उन्होंने कहा, "मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहूँगा कि हम भले ही एक-दूसरे से विपरीत दिशा में खड़े नजर आते हों, जहां विनियमित संस्थाएं विकास को गति देने की कोशिश कर रही हैं और नियामक स्थिरता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। लेकिन वास्तव में हमारे उद्देश्य एक ही हैं। हम एक ही टीम में हैं, और विकसित भारत के लिए हमारा एक ही साझा दृष्टिकोण है।"

निवेश को बढ़ाने के लिए बैंक और कॉरपोरेट्स आगे आएं

मल्होत्रा ने कहा कि वह भारत की वित्तीय मध्यस्थता की दक्षता और प्रभावशीलता में सुधार लाने के लिए विनियमित संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं। इससे  यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि लोगों तक उचित लाभ पहुंचे। उन्होंने कहा, "ऐसे समय में जब बैंकों और कॉरपोरेट्स की बैलेंस शीट अपने सबसे अच्छे स्तर पर है, उन्हें एक साथ आना चाहिए और निवेश चक्र बनाने के लिए उत्साह को बढ़ाना चाहिए। यह समय के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है।"

गवर्नर ने यह भी कहा कि रिजर्व बैंक विकास के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता के प्राथमिक उद्देश्य के साथ मौद्रिक नीति का संचालन जारी रखेगा। उन्होंने आगे कहा कि आज भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादी ढांचे से युक्त है और यह लचीलेपन और आशा का प्रतीक बनी हुई है। उन्होंने कहा, "हम अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं... जैसे-जैसे हम अस्थिर वैश्विक आर्थिक माहौल से निपट रहे हैं, जो बढ़ते व्यापार, अनिश्चितता और लगातार भू-राजनीतिक तनावों से प्रभावित है, हमें विकास की सीमाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है।"



मल्होत्रा ने उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए प्रयास बढ़ाने तथा साथ ही अवसरों का लाभ उठाने पर जोर दिया। उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय बैंक एआई और एमएल सहित प्रौद्योगिकी को अपनाना जारी रखेंगे, और सभी विनियमित संस्थाओं से अपेक्षा की कि वे अपने और अपने ग्राहकों के लाभ के लिए इन प्रौद्योगिकियों में निवेश करें।

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