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राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन परियोजना में 100 लाख करोड़ रुपये होंगे खर्च: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
Sat, 15 Aug 2020 11:07 AM IST
डिंपल अलवधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Sat, 15 Aug 2020 11:07 AM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : अमर उजाला--रोहित झा
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आज देश में 74वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार सातवीं बार लालकिले की प्राचीर से झंडा लहराया है। पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि देश के सर्वांगीण अवसरंचना विकास के लिए 'राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन परियोजना' में 100 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जाएंगे और इसके लिए लगभग सात हजार परियोजनाओं को चिह्नित भी किया जा चुका है। ये एक तरह से अवसरंचना में नई क्रांति की तरह होगा।
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विकास को एक नई दिशा देने की जरूरत
देशवासियों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा भारत को आधुनिकता की तरफ तेज गति से ले जाने के लिए, देश के सर्वांगीण अवसंरचना विकास को एक नई दिशा देने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का मतलब सिर्फ आयात कम करना ही नहीं, अपनी क्षमता, अपनी रचनात्मकता, अपने कौशल को बढ़ाना भी है। उन्होंने कहा कि सिर्फ कुछ महीने पहले तक एन-95 मास्क, पीपीई किट, वेंटिलेटर ये सब विदेशों से मंगवाए जाते थे लेकिन आज इन सभी में भारत न सिर्फ अपनी जरूरतें खुद पूरी कर रहा है, बल्कि दूसरे देशों की मदद के लिए भी आगे आया है।
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एफडीआई के सारे रिकॉर्ड टूटे
उन्होंने कहा कि पिछले साल भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा, 'भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। आज दुनिया की बहुत बड़ी-बड़ी कंपनियां भारत का रुख कर रही हैं। हमें 'मेक इन इंडिया' के साथ-साथ 'मेक फॉर वर्ल्ड' के मंत्र को लेकर आगे बढ़ना है।'
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भारत को आत्मनिर्भर होना होगा
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के बीच भारतीयों ने आत्मनिर्भर होने का संकल्प लिया है और यह केवल शब्द नहीं बल्कि सभी लोगों के लिए मंत्र है। उन्होंने कहा कि आखिर भारत कब तक कच्चे माल का निर्यात करेगा और तैयार उत्पादों का आयात करेगा, भारत को आत्मनिर्भर होना होगा।
वोकल फॉर लोकल पर भी जोर
उन्होंने कहा कि भारत की विश्व अर्थव्यवस्था में जो हिस्सेदारी है, वह बढ़नी चाहिए और इसके लिए हमें आत्मनिर्भर होना होगा। उन्होंने कहा, 'जब हम आर्थिक वृद्धि और विकास पर ध्यान केंद्रित करें तो मानवता इस प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका में होनी चाहिए।' प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा कि हमारा मन पूरी तरह से 'वोकल फॉर लोकल' (स्थानीय उत्पादों पर जोर देने वाला) होना चाहिए।
कृषि क्षेत्र में मूल्य वर्धन की आवश्यकता
प्रधानमंत्री ने अपने करीब डेढ़ घंटे के लंबे भाषण में आत्मनिर्भर भारत को लेकर प्राकृतिक संसाधनों से लेकर, कृषि क्षेत्र, बुनियादी ढांचा क्षेत्र, डिजिटल भारत, कौशल भारत और स्थानीय उत्पादों को गौरवमय बनाने को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत आज कृषि क्षेत्र में अन्न का निर्यात करने में सक्षम है। कृषि क्षेत्र में भी मूल्य वर्धन की आवश्यकता है। आत्मनिर्भर भारत में कौशल और सृजनशीलता को बढ़ाना है।
किसानों के लिए उनके उत्पाद बेचने के मामले में सीमित दायरे को समाप्त किया गया है। अब किसान दुनिया के किसी भी हिस्से में अपना सामान बेच सकता है। कृषि उत्पादों के परिवहन और बेहतर रखरखाव के लिए एक लाख करोड़ रुपये के कृषि अवसंरचना कोष की शुरुआत की गई है। किसान उत्पादक संघों (एफपीओ) को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, 'कोरोना काल में भी दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियां भारत की तरफ आकर्षित हुई हें। यह सब भारत में बदलाव से ही संभव हो सका है। देश में 110 लाख करोड़ रुपये की 7,000 परियोजनाओं की पहचान कर ली गई है। ढांचागत क्षेत्र की परियोजनाओं पर जितना ज्यादा काम होगा सभी को उसका लाभ मिलेगा।'