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Report: FY26 की पहली तिमाही में फार्मा सेक्टर की आय बढ़ेगी, पर EBITDA मार्जिन में गिरावट की आशंका

Sat, 12 Jul 2025 01:10 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Sat, 12 Jul 2025 01:10 PM IST
सार

एचडीएफसी सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में वित्तीय वर्ष 2026 की पहली तिमाही में स्थिर राजस्व वृद्धि की संभावना है। हालांकि  ईबीआईटीडीए मार्जिन में गिरावट की संभावना है। फार्मा क्षेत्र की कंपनियों की बिक्री में साल-दर-साल 11 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।

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Pharma sector income will increase in the first quarter of FY26, but EBITDA margin is expected to decline
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारतीय फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर की आमदनी में स्थिर वृद्धि देखी जाएगी। लेकिन मुनाफे के लिहाज से चुनौतियां बरकरार हैं। एचडीएफसी सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इस तिमाही में इनपुट लागत बढ़ने और कीमतों पर दबाव के कारण ईबीआईटीडीए (EBITDA) मार्जिन में गिरावट की आशंका है। EBITDA जिसका अर्थ है ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई, किसी फर्म की कुल आय और कुल राजस्व के बीच के संबंध को दर्शाता है।

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बिक्री में 11 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि की संभावना
रिपोर्ट में कहा गया है कि अध्ययन में शामिल फार्मा क्षेत्र की कंपनियों की बिक्री में साल-दर-साल 11 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। इसमें भारत में कारोबार से 11 प्रतिशत की वार्षिक बढ़ोतरी और अमेरिकी बाजार में तिमाही आधार पर 2 प्रतिशत साथ ही वार्षिक आधार पर भी 2 प्रतिशत की बढ़त शामिल है।
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मुनाफे में 42 आधार अंक की गिरावट की उम्मीद 
हालांकि, मुनाफे के प्रमुख सूचकांक ईबीआईटीडीए मार्जिन में 42 आधार अंक की गिरावट आने की उम्मीद है। इसके पीछे अमेरिकी बाजार में दवाओं की कीमतों में गिरावट और अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) में अपेक्षित वृद्धि के कारण है।

हॉस्पिटल व्यवसाय में 15 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान
भारत का हॉस्पिटल व्यवसाय सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। हालांकि अस्पतालों में बेड की ओक्यूपेंसी यानी भराव दर सीमित बनी रहेगी, लेकिन ‘एवरेज रेवेन्यू पर ऑक्यूपाइड बेड’ (ARPOB) स्थिर बना रहेगा। इससे राजस्व को सहारा मिलेगा। ARPOB अस्पताल के वित्तीय प्रदर्शन का आकलन करने वाला एक प्रमुख प्रदेशन संकेतक है। 

वित्त वर्ष 2024 में फार्मास्यूटिकल बाजार 50 अरब डॉलर पहुंचा 
वित्त वर्ष 2023-24 के लिए भारत का फार्मास्यूटिकल बाजार 50 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें घरेलू खपत की हिस्सेदारी 23.5 अरब डॉलर और निर्यात की हिस्सेदारी 26.5 अरब डॉलर है।


घरेलू दवा उद्योग में भारत की स्थिति 
घरेलू दवा उद्योग को उत्पादन की मात्रा के हिसाब से दुनिया में तीसरा और वैल्यू (उत्पादन मूल्य) के हिसाब से 14वां स्थान हासिल है। यह उद्योग जेनेरिक दवाओं, बल्क ड्रग्स, ओवर-द-काउंटर दवाओं, वैक्सीन, बायोसिमिलर और बायोलॉजिक्स जैसे विविद उत्पाद आधार के साथ, भारतीय दवा उद्योग की वैश्विक स्तर पर एक मजबूत उपस्थिति है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़ें?
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा प्रकाशित राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी 2024 के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 में फार्मास्यूटिकल्स, औषधीय और वनस्पति उत्पादों का कुल उत्पाद स्थिर मूल्यों पर 4,56,246 करोड़ रुपये रहा। इसमें से मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडेड) 1,75,583 करोड़ रुपये का रहा।

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